जीएनएसयू और एनएमसीएच को तीन अंतरराष्ट्रीय आईएसओ प्रमाणपत्र, गुणवत्ता प्रबंधन में मिली बड़ी पहचान

डेहरी -आन-सोन (रोहतास)। गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय (जीएनएसयू) एवं नारायण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एनएमसीएच) को गुरुवार को विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित गरिमामय सम्मान समारोह के दौरान तीन महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय आईएसओ (आईएसओ) प्रमाणपत्र औपचारिक रूप से प्रदान किए गए। संस्थानों को आईएसओ 9001:2015 (गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली), आईएसओ 14001:2015 (पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली) तथा आईएसओ 50001:2018 (ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली) के लिए प्रमाणित किया गया।


समारोह का शुभारंभ आईएसओ प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रो. डॉ. विवेक शर्मा के स्वागत उद्बोधन से हुआ। इसके बाद करेक्ट सर्टिफिकेशन के प्रतिनिधि मनीष श्रीवास्तव ने आईएसओ प्रमाणन प्रक्रिया के महत्व और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप संस्थागत व्यवस्थाओं पर प्रकाश डाला।


कुलपति प्रो. डॉ. जगदीश सिंह ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था में गुणवत्ता आश्वासन, संस्थागत उत्कृष्टता और सतत सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके उपरांत अतिथियों ने जीएनएसयू और एनएमसीएच को औपचारिक रूप से आईएसओ प्रमाणपत्र प्रदान किए।


प्रति-कुलाधिपति गोविंद नारायण सिंह ने कहा कि उत्कृष्टता, गुणवत्ता और निरंतर सुधार की संस्कृति को बनाए रखना संस्थान की प्राथमिकता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप शैक्षणिक गुणवत्ता, प्रभावी प्रशासन, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और ऊर्जा दक्षता के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई।


समारोह में प्रबंधन बोर्ड की सदस्य डॉ. संगीता सिंह, डॉ. मोनिका सिंह, श्रीमती निरूपमा सिंह, कुलसचिव प्रो. डॉ. कुमार आलोक प्रताप, परीक्षा नियंत्रक सुदीप कुमार सिंह सहित विभिन्न संकायों के डीन, निदेशक, प्राचार्य, विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय के अधिकारी, आईएसओ टीम के सदस्य एवं बड़ी संख्या में शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति रही।


विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह आईएसओ प्रमाणन अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप सुदृढ़ व्यवस्थाओं और प्रक्रियाओं की औपचारिक मान्यता है, जो संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता, सुशासन, पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा प्रबंधन और हितधारकों की संतुष्टि के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। कार्यक्रम का समापन आईएसओ प्रकोष्ठ की उपाध्यक्ष प्रो. डॉ. श्वेता शर्मा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।



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