राजभाषा नीति के उत्कृष्ट क्रियान्वयन पर आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना को नराकास का विशेष पुरस्कार

  • हिंदी में वैज्ञानिक एवं कृषि तकनीकी जानकारी के प्रसार को मिली राष्ट्रीय स्तर पर पहचान, अधिकारियों ने बताया सामूहिक प्रयासों का परिणाम

पटना। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना को भारत सरकार की राजभाषा नीति के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिए नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (केंद्रीय कार्यालय), पटना (नराकास) द्वारा विशेष राजभाषा पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान 22 जुलाई 2026 को आयोजित नराकास, पटना की वर्ष 2026 की प्रथम छमाही बैठक के दौरान नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (केंद्रीय), पटना के अध्यक्ष एवं बिहार-झारखंड के प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त द्वारा प्रदान किया गया।


इस उपलब्धि पर संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान पूरे संस्थान के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल भारत की राजभाषा ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता, सुशासन और प्रभावी संवाद का सशक्त माध्यम भी है। संस्थान में राजभाषा हिंदी के अधिकतम प्रयोग और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं तथा भविष्य में भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ यह अभियान जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि राजभाषा संबंधी प्रावधानों का पालन केवल संवैधानिक दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी की नैतिक जिम्मेदारी भी है।


संस्थान के भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष उपाध्याय ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि संस्थान मुख्यालय, पटना तथा कृषि प्रणाली का पहाड़ी एवं पठारी अनुसंधान केंद्र, रांची भारत सरकार के राजपत्र में अधिसूचित कार्यालय हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी में प्रवीण सभी कर्मचारियों का दायित्व है कि वे अपने अधिकतम सरकारी कार्य हिंदी में करें। उन्होंने वैज्ञानिकों से अनुसंधान, तकनीकी लेखन, वैज्ञानिक प्रतिवेदनों तथा कृषि प्रौद्योगिकी संबंधी साहित्य में हिंदी के अधिकाधिक उपयोग का आह्वान किया। उनके अनुसार, विज्ञान और कृषि तकनीक को सरल एवं सहज हिंदी में प्रस्तुत करने से किसानों और अन्य हितधारकों तक वैज्ञानिक जानकारी अधिक प्रभावी ढंग से पहुँचाई जा सकती है।


मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (वरिष्ठ श्रेणी) पुष्पनायक ने कहा कि संस्थान राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 3(3) तथा राजभाषा नियम, 1976 के नियम 5 का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राजभाषा हिंदी का प्रभावी क्रियान्वयन केवल प्रशासनिक अनुभाग का दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक अधिकारी एवं कर्मचारी की सामूहिक जिम्मेदारी है।


इस अवसर पर वरिष्ठ तकनीकी सहायक (हिंदी अनुवादक)-सह-सदस्य सचिव, संस्थान राजभाषा कार्यान्वयन समिति उमेश कुमार मिश्र ने कहा कि यह सम्मान संस्थान के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयास, समर्पण और उत्कृष्ट टीम वर्क का परिणाम है। उन्होंने बताया कि निदेशक के मार्गदर्शन में संस्थान प्रेस एवं मीडिया के माध्यम से किसानों और अन्य हितधारकों तक कृषि संबंधी वैज्ञानिक एवं तकनीकी जानकारियाँ सरल और सहज हिंदी में निरंतर पहुँचा रहा है।


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