पीपराकोठी में कृषि प्रसार कर्मियों का प्रशिक्षण शुरू, फसल विविधीकरण पर जोर

पीपराकोठी (पूर्वी चंपारण)। कृषि प्रसार कर्मियों के लिए “फसल विविधीकरण के माध्यम से जीविकोपार्जन में वृद्धि” विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। यह कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना एवं कृषि विज्ञान केंद्र, पीपराकोठी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में जिले के 20 प्रसार कर्मियों ने भाग लिया, जिनमें 5 महिला प्रतिभागी भी शामिल रहीं।

कार्यक्रम के दौरान परियोजना के प्रधान अन्वेषक एवं फसल अनुसंधान प्रभाग के अध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार ने फसल विविधीकरण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए इसे किसानों की आय वृद्धि का प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक खेती में विविध फसलों के समावेश से उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ जोखिम भी कम होता है।

मुख्य अतिथि जिला कृषि पदाधिकारी मनीष कुमार सिंह ने प्रसार कर्मियों को आधुनिक कृषि तकनीकों को सीखकर उन्हें किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया। कृषि विज्ञान केंद्र, पीपराकोठी के अध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार सिंह ने उन्नत फसल उत्पादन एवं प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा कीं। वहीं आत्मा के उप-परियोजना निदेशक डी.पी. धीर ने फसल विविधीकरण को ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ करने का अहम साधन बताया।

प्रशिक्षण के दौरान पंडित दीनदयाल उपाध्याय उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय के डॉ. पंकज सिंह ने मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता प्रबंधन की भूमिका पर प्रकाश डाला, जबकि डॉ. के. प्रसाद ने उद्यानिकी फसलों के समावेश से आय बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की। डॉ. अभिषेक कुमार ने जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में फसल विविधीकरण एवं कृषिवानिकी की उपयोगिता बताई।

कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र की विषय-वस्तु विशेषज्ञ डॉ. गायत्री कुमारी पाढ़ी ने समेकित कीट प्रबंधन तथा श्रीमती सविता कुमारी ने श्री अन्न के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन पर जानकारी दी। वहीं विशेषज्ञ मनीष कुमार ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कृषिवानिकी के लिए उपयुक्त पौध चयन पर मार्गदर्शन दिया।

पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के निदेशक डॉ. अनुप दास ने अपने संदेश में कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य में फसल विविधीकरण किसानों की आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम बन सकता है।

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