सोनमाटी के न्यूज पोर्टल पर आपका स्वागत है   Click to listen highlighted text! सोनमाटी के न्यूज पोर्टल पर आपका स्वागत है
कहानी /कवितासोनमाटी टुडे

डा. रूबी भूषण की दो कविताएं

     अब गूंजेगा आदिम राग

प्रेम की कोमल अनुभूतियों को
आदिम राग की मधुर रागिनियों को
मन में गुनगुनाते
तन में कुलबुलाते
प्रीत के ताप को
प्रीत के उत्ताप को
तुम बूझ ना सके
नेह के गेह को
तुमने सहज तोड़ डाले
स्नेह रिक्त कटु शब्दों के आघात से
प्रेम ही देवता
प्रेम ही ईश्वर
प्रिय तुम इसे समझ ना सके
अनुत्तरित से प्रश्न जंजीरों से बंधे पड़े रहते हैं अंत:स्थल में
पर अब उन्हें मुखर होना हो गया है नितांत अनिवार्य
अब जरूरत है परत दर परत
हिया में ग्रंथि की बंधी अदृश्य गांठ को खोलने की
अब चुप नहीं रहेगा मन
अब और ना सहेगा मन
अब हृदय में गूंजेगा आदिम प्रेम राग
अब हृदय के तार छेड़ेंगे राग मल्हार

इसे भी पढ़े : 👉🏻 ब्रह्मांड और जीवन की खोज पर प्रमाणित पुस्तक : सुनो मैं समय हूं

     ओ मेरी बिटिया

      ओ मेरी बिटिया !
      कर रहे थे वो हर फैसला
      तोड़ कर रख दिया हर हौसला
      मैं गिरी
      फिर उठी
      उठकर फिर गिरी
     हर बार फिर भी उठी
     मैं तिल- तिल जली
     ताने सुने
    उलाहने सुने
    उससे क्यों बोली- बतियाई
    क्यों सांझ ढलने पर घर आई
   घर का सारा काम कौन करेगा
   यह दारुण दुख सहा मैंने
  उफ्फ तक नहीं किया मैंने
   मगर ओ मेरी बिटिया रानी
   मगर ओ मेरी प्रिय बहू रानी
  तुम ना सहना यह दुख- संताप
  जीवन का यह ताप- उत्ताप
  तू अबला नहीं नारी नहीं बनेगी
  तू हर अन्याय का प्रतिरोध करेगी
  तू झुकेगी नहीं, तू टूटेगी नहीं
  दृढ़ संकल्प से कभी डिगेगी नहीं
  एक दिन जय तेरी होगी
  एक दिन जीत तेरी होगी
  तू अपनी पसंद की दुनिया बनाना बहू
  तू प्रीत की ऐसी बगिया सजाना बेटी
  जिसकी खुशबू से महके हर दिल का दामन
  जिसकी खुशबू से महके हर जीवन का आंगन
  तुम सुन रही हो न बहू
  तुम गुन रही हो न बिटिया

इसे भी पढ़े : 👉🏻अज्ञानता अंधकार से बाहर निकाल कर ज्ञान अर्जन की प्रेरणा दी थी स्वामी विवेकानंद : आलोक कुमार रंजन

इसे भी पढ़े : 👉🏻 कुमार बिंदु की कविता : जादूगरनी रात और जादुई सपने

इसे भी पढ़े : 👉🏻स्वामी विवेकानंद की जयंती पर जीएनएसयू में प्रतियोगिता का आयोजन

इसे भी पढ़े : 👉🏻चमनलाल पीजी कालेज की सात छात्राएं यूनिवर्सिटी मेरिट में, दो बनी टॉपर

इसे भी पढ़े : 👉🏻भारत की पहली पन-चक्की

इसे भी पढ़े : 👉🏻सोन-घाटी में जीवंत हैं नेताजी की स्मृतिया

2 thoughts on “डा. रूबी भूषण की दो कविताएं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Click to listen highlighted text!