जल प्रबंधन प्रशिक्षण से किसानों को मिली वैज्ञानिक खेती की नई दिशा


पटना/समस्तीपुर- कार्यालय प्रतिनिधि। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभाग द्वारा आत्मा, समस्तीपुर के प्रायोजन से आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम “भूमि एवं जल उत्पादकता बढ़ाने हेतु ऑन-फार्म जल प्रबंधन रणनीतियाँ” का सफल समापन शुक्रवार को हुआ। इस प्रशिक्षण में समस्तीपुर जिले से आए 31 प्रगतिशील किसानों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए आधुनिक कृषि जल प्रबंधन तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने कहा कि बदलती जलवायु और घटते जल संसाधनों के दौर में टिकाऊ कृषि के लिए वैज्ञानिक जल प्रबंधन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने किसानों से प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई तकनीकों को अपने खेतों में अपनाने तथा अन्य किसानों तक इसका प्रसार करने का आह्वान किया।
भूमि एवं जल प्रबंधन विभाग के अध्यक्ष डॉ. आशुतोष उपाध्याय ने प्रशिक्षण की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि एकीकृत भूमि-जल प्रबंधन, सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली, सेंसर आधारित तकनीक, प्राकृतिक खेती एवं मौसम आधारित निर्णय प्रणाली किसानों को संसाधनों के कुशल उपयोग में सक्षम बनाती है। उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर खेती करने के लिए प्रेरित किया।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान किसानों को प्राकृतिक खेती, एकीकृत कृषि प्रणाली, उन्नत भूमि एवं जल प्रबंधन तकनीकें, कृषि में आईओटी तथा एआई/एमएल का उपयोग, फसल विविधीकरण एवं मौसम आधारित कृषि जल प्रबंधन पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही प्रतिभागियों ने अनुसंधान प्रक्षेत्रों एवं मृदा प्रयोगशालाओं का भ्रमण कर तकनीकों का प्रत्यक्ष अनुभव भी प्राप्त किया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम डॉ. पवन जीत, डॉ. आरती कुमारी, डॉ. आशुतोष उपाध्याय, डॉ. पी. के. सुंदरम, डॉ. राकेश कुमार एवं डॉ. कीर्ति सौरभ के तकनीकी सहयोग तथा डॉ. सुमीत सौरभ (परियोजना निदेशक, आत्मा, समस्तीपुर) के प्रायोजन में संचालित किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. मणिभूषण, डॉ. अजय कुमार, डॉ. विकास कुमार एवं डॉ. शिवानी का भी उल्लेखनीय योगदान रहा।

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