देश और समाज के विकास में महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान है। महिलाओं के बिना सृष्टि की कल्पना नहीं की जा सकती :अर्चना कुमारी

GNSU celebrated women's Day

डेहरी-आन-सोन  (रोहतास) विशेष संवाददाता । देश और समाज के विकास में महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान है। महिलाओं के बिना इस सृष्टि की कल्पना नहीं की जा सकती ।आज पूरे दुनिया में महिलाओं की आत्मनिर्भरता बढ़ी है जिसके कारण चारों ओर विकास का दौर जारी है। शनिवार को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के देव मंगल सभागार में मुख्य अतिथि पद से संबोधित करते हुए अनुमंडल न्यायालय डेहरी की न्यायिक पदाधिकारी अर्चना कुमारी ने उपरोक्त बातें कहीं।

उन्होंने अपने निजी जीवन की घटनाओं को साझा करते हुए कहा कि कम उम्र में विवाह हो जाने के बावजूद उन्होंने अपने सपने को टूटने नहीं दिया और उसके बाद विधि विज्ञान स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के उपरांत न्यायिक सेवा में आने का अवसर प्राप्त किया।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में अंकोढीगोला प्रखंड की अंचलाधिकारी निधि ज्योत्सना ने यहां उपस्थित महिलाओं एवं छात्राओं को संबोधित करते हुए जीवन में सारे संघर्षों के बावजूद अपने उड़ान को जारी रखने की अपील की। उन्होंने आह्वान किया यह जीवन ही संघर्ष है खासकर महिलाओं के लिए, लेकिन उससे डिगना नहीं चाहिए और अपने उद्देश्यों की प्राप्ति से कोई समझौता नहीं करनी चाहिए।

Women's Day celebration in GNSU

इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलाधिपति शैल सिंह ने की जबकि अतिथियों का स्वागत प्रतिकुलपति डा. प्रोफेसर जगदीश सिंह ने की तथा धन्यवाद ज्ञापन संस्थान के सचिव गोविंद नारायण सिंह ने की। इस अवसर पर गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं पूर्व सांसद गोपाल नारायण सिंह ने भी संबोधित किया एवं कहा कि अपने संस्कार और संस्कृति की रक्षा महिलाओं के हाथों में ही निहित है ।भारत अनादि काल से महिलाओं की पूजा करते आया है और महिलाओं का सम्मान करता रहा है। जहां महिलाओं का सम्मान होता है वहां देवता निवास करते हैं।

इस अवसर पर प्रबंध निदेशक त्रिविक्रम नारायण सिंह, सभी संकायों के अध्यक्ष, वरिष्ठ शिक्षक, छात्र छात्राएं, परीक्षा नियंत्रक डा. कुमार आलोक प्रताप, सहायक कुल सचिव मिथिलेश कुमार सिंह, शैक्षणिक निदेशक सुदीप कुमार सिंह, डा. संगीता कुमारी, डा. आकांक्षा, निरुपमा सिंह, डा. मोनिका सिंह आदि भी उपस्थित रहे।

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