एमबीबीएस चिकित्सकों पर ही देश की सेहत का दारोमदार

डेहरी-आन-सोन (बिहार)-कार्यालय प्रतिनिधि। जमुहार स्थित गोपालनारायण सिंह विश्वविद्यालय परिसर में मेडिकल कालेज सभागार में वर्ष 2018-19 के सत्र में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में नामांकित हुए विद्यार्थियों के लिए चिकित्सों के दायित्व, चिकित्सा प्रोफेशन से जुड़े कानून, चिकित्सक होने का सामाजिक अर्थ, अनुशासन, रैगिंग आदि विषयों से संबंधित ओरिएंटेशन कार्यशाला का आयोजन किया गया है।

मजूबत चिकित्सक से ही शोध और चिकित्सा शिक्षा की स्थिति होगी मजबूत
ओरिएंटेशन कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए विश्वविद्यालय (देवमंगल मेमोरियल ट्रस्ट) के सचिव गोविन्दनारायण सिंह ने कहा कि योग्य और दक्ष चिकित्सक ही देश को स्वस्थ बनाए रखने में कारगर हो सकते हैं। एमबीबीएस के स्तर पर यदि चिकित्सक मजूबत स्थिति में होंगे, तभी चिकित्सा स्वास्थ्य की दिशा में शोध और चिकित्सा शिक्षा की स्थिति मजबूत होगी। भारत में चिकित्सा प्रौद्योगिकी उद्योग भारी वृद्धि की ओर बढ़ रहा है। लेकिन, जमीनी स्तर पर हालत यह है कि डाक्टर-रोगी अनुपात तो बेहद कम है ही, जरूरी चिकित्सकीय उपकरणों पर व्यय भी दुनिया के कई देशों की तुलना में काफी कम है। भारत में प्रति हजार जनसंख्या पर चिकित्सकों के मामले में भारत कई देशों से बहुत पीछे है। आबादी के अनुपात में देश में अस्पतालों में बेड की उपलब्धता भी काफी कम है। बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए ही बनती है। अब 15 साल बाद नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति आ चुकी है।

बेहतर एमबीएस चिकित्सक बनाने का दायित्व संस्थान और व्यक्तित्व दोनों स्तरों पर गंभीर
गोपालनारायण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति डा. एमएल वर्मा ने चिकित्सा व्यवस्था में एमबीबीएस चिकित्सक ही सबसे बड़ा आधार हैं, क्योंकि इन पर देश की सवा सौ करोड़ आबादी की सेहत बड़ा दारोमदार है। देश में अति दक्षताप्राप्त चिकित्सिकों की ही नहीं, सामान्य चिकित्सकों की भी भारी कमी है। आबादी के अनुपात में चिकित्सक काफी कम संख्या में हैं। इसलिए मौजूदा समय और समाज की जरूरत के हिसाब एक बेहतर एमबीएस चिकित्सक तैयार होने का दायित्व संस्थान और व्यक्तित्व दोनों ही स्तरों पर ज्यादा गंभीर हो गया है।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा. आरएस जायसवाल ने चिकित्सा के प्रोफेशन में नियिमन और अधिकार से जुड़े विभिन्न तरह के प्रावधानों-कानून की चर्चा करते हुए यह कहा कि इलाज से अलग एक चिकित्सक के लिए यह जानना भी जरूरी है कि क्या गलत है, क्या सही है? और, उसी के अनुरूप एक चिकित्सक को कार्य करना चाहिए। उन्होंने रैगिंग की कुप्रथा के प्रति छात्र-छात्राओं को आगाह किया। चेतावनी दी कि रैगिंग अब अपराध है और इससे संबंधित कड़े कानून हैं।

चिकित्सकीय दायित्व, कानून, मेडिकल काउंसिल, चिकित्सकीय शपथ  की भी जानकारी
विश्वविद्यालय द्वारा संचालित नारायण मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल के प्राचार्य डा. विनोद कुमार ने ओरिएंटेशन कक्षा के प्रवर्तन सत्र का आरंभ करते हुए बताया कि इसमें चिकित्सा पाठ्यक्रम के अध्यार्थी-विद्यार्थी को और डिग्रीधारक चिकित्सक को क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, इससे संबंधित जानकारी दी जाएगी और विस्तृत चर्चा की होगी। बताया कि चिकित्सा के सामाजिक सरोकार और देश-समाज के प्रति चिकित्सकों के दायित्व के साथ देश में स्वास्थ्य बीमा, स्वास्थ्य कानून, मेडिकल काउंसिल, चिकित्सकीय शपथ आदि की भी जानकारी दी जाएगी।
विश्वविद्यालय के सूचना संभाग के संजीव कुमार ने उपस्थिति की संवेदनशीलता के बारे बताते हुए बायोमेट्रिक हाजिरी दर्ज कराने की जानकारी दी। विद्यार्थी प्रशाखा के विकास कुमार ने छात्र-छात्राओं को विश्वविद्यालय और कालेज परिसरों में अनुशासन के महत्व को बताते हुए हर हाल में अनुशासन कायम रखने पर बल दिया।
तीन दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम, परिचयसत्र भी है यह
कार्यक्रम का संचालन छात्र प्रशाखा के प्रभारी डा. अशोक कुमार देव ने किया। विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी भूपेन्द्रनारायण सिंह के अनुसार, नवागत एमबीबीएस छात्र-छात्राओं के लिए 6 सितम्बर को शुरू हुआ ओरिएंटेशन कार्यक्रम 8 सितम्बर को समाप्त होगा। यह छात्र-छात्राओं के लिए यह एक प्रकार से परिचयसत्र भी है। ओरिएंटेशन कार्यक्रम (कक्षा) का उद्देश्य छात्र-छात्राओं का एक-दूसरे से परिचित होना और अपने चिकित्सकीय प्राध्यापकों को भी जानना है।

(रिपोर्ट व तस्वीर : भूपेन्द्रनारायण सिंह, पीआरओ, जीएनएसयू)

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