कर्नाटक (पार्ट-2) : शुरू हुआ हाई वोल्टेज ड्रामा, येदियुरप्पा ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ

बेंगलुरु (सोनमाटी समाचार)। कर्नाटक के त्रिशंकु चुनााव परिणाम के बाद सियासत का हाई वोल्टेज ड्रामा शुरू हो चुका है। भाजपा के बीएस येदियुरप्पा ने कर्नाटक के सीएम पद की शपथ ले ली है। राज्यपाल वजुभाई आरवाला ने येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। मुंबई बम धमाके के आरोपी याकूब के मामले में आधी रात सुप्रीम कोर्ट खुलने के बाद यह दूसरा मौका था, जब सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष देर रात हाई प्रोफाइल राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला। राज्यपाल की ओर से भाजपा के येदियुरप्पा को बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को माना है कि विश्वास मत साबित करने के लिए दिए गए 15 दिन के समय पर सुनवाई हो सकती है। अब येदियुरप्पा के सामने सबसे बड़ी चुनौती विधायकों के हस्ताक्षर जुटाकर बहुमत साबित करना है।

सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा विवाद
कांग्रेस-जेडीएस ने येदियुरप्पा के शपथग्रहण के खिलाफ याचिका दायर की, जिस पर सुप्रीम कोर्ट में रात 1.45 बजे सुनवाई शुरू हुई और सुबह साढ़े पांच बजे तक चली। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल के फैसले पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि शपथग्रहण पर रोक नहीं लगाई जा सकती। सर्वोच्च अदालत की में जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस सीकरी और जस्टिस बोबडे शामिल थे। केंद्र सरकार की ओर से अडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, भाजपा की ओर से पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी और कांग्रेस की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी कोर्ट में पेश हुए।

अटॉर्नी जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि कृपया इस याचिका को खारिज करे दें। वे एक उच्च स्तरीय संवैधानिक सिस्टम के कार्य को रोकने के लिए यह फैसला चाहते हैं। यह राज्यपाल का काम है कि वह शपथ के लिए बुलाएं। राज्यपाल और राष्ट्रपति किसी भी कोर्ट के प्रति उत्तरदायी नहीं हैं। ऐसे में कोर्ट को चाहिए कि वह संवैधानिक कार्यप्रणाली को न रोके। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कांग्रेस की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि जेडीएस, कांग्रेस के  पास 117 सीटें और भाजपा के पास 104 हैं तो वह बहुमत कैसे साबित करेगी? जेडीएस ने सबूत के साथ दावा रखा था और कुमारस्वामी ने विधायकों के समर्थन की चिट्ठी भी राज्यपाल को दी थी।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को माना है कि विश्वास मत साबित करने के लिए दिए गए 15 दिन के समय पर सुनवाई हो सकती है। न्यायालय ने दोनों पक्षों समेत येदियुरप्पा को जवाब दाखिल करने का नोटिस जारी किया है। कर्नाटक मसले पर 18 को फिर सुनवाई होगी।

तीसरी बार मुख्यमंत्री बने येदियुरप्पा
शपथग्रहण के दौरान केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार, प्रकाश जावड़ेकर और जेपी नड्डा समेत भाजपा के कई बड़े नेता मौजूद थे। 75 साल के येदियुरप्पा ने विधानसभा चुनाव में शिकारीपुरा से जीत हासिल की है। वह तीसरी बार कर्नाटक राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं और राज्य के 25वें मुख्यमंत्री हैं। इससे पहले वे दो बार मुख्यमंत्री बने, पर अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके थे। 2006 में पहली बार जेडीएस के साथ मिलकर सरकार बनाई। 2008 में अकेले दम पर भाजपा राज्य में जीती, पर 2011 में खनन घोटाले के आरोप के चलते येदियुरप्पा को कुर्सी छोडऩी पड़ी। इसके बाद येदियुरप्पा भाजपा से अलग हो गए थे। 2013 में भाजपा को राज्य में हार का सामना करना पड़ा था। 2014 में येदियुरप्पा वापस भाजपा में शामिल हुए।
दूसरी ओर, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शपथग्रहण का विरोध करते हुए कहा है कि भले ही भाजपा आज खुश है लेकिन भारत लोकतंत्र की हार का शोक मनाएगा। बहुमत न होने के बाद भी भाजपा की सरकार बनाना संविधान का मजाक उड़ाना है। राहुल गांधी की कथन की प्रतिक्रिया में केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार ने कहा है कि कांग्रेस को राहुल गांधी, सोनिया गांधी और सिद्धारमैया का विरोध करना चाहिए, जिन्होंने कांग्रेस को बर्बाद किया।

विधायक बचाने की जद्दोजहद
कर्नाटक में सरकार बनाने की खींचतान के बीच कांग्रेस और जेडीएस ने अपने विधायकों को बचाने के लिए एक रेजॉर्ट में दिया है। हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने इस आरोप को खारिज किया है कि विधायकों को भाजपा ने 100 करोड़ रुपये का ऑफर दिया है। भाजपा के कर्नाटक के प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर की ओर से कहा गया है कि कांग्रेस और जेडीएस के कई विधायक भाजपा के संपर्क में हैं।
गुजरात में राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के संकटमोचक बने डीके शिवकुमार को इस बार फिर कांग्रेस आलाकमान ने एमएलए की हार्स ट्रेडिंग रोकने की जिम्मेदारी सौंपी है। कांग्रेस विधायकों को ईगलटन रिजॉर्ट भेजा गया है। यहां पिछले साल राज्यसभा चुनाव के दौरान भी कांग्रेस के विधायकों को रखा गया था। कांग्रेस ने ईगलटन रिजॉर्ट में अपने विधायकों को रखने के लिए 100 से ज्यादा कमरे बुक कराए हैं। यहीं जेडीएस के विधायकों को भी भेजा जा सकता है। यह कदम कर्नाटक में सरकार बनने तक के लिए उठाया गया है। कांग्रेस ने अपने हर विधायक से कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनाने के लिए लिखित सहमति ली है।

नहीं बची विपक्षियों की जमानत
कर्नाटक का जो चुनाव परिणाम सामने आया है, उसमें अनेक प्रमुख विपक्षी दल अपनी जमानत नहीं बचा सके हैं। आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार कर्नाटक विधानसभा चुनाव ़में जमानत नहीं बचा पाए। दक्षिण भारत में पार्टी का चेहरा माने जाने वाले पृथ्वी रेड्डी को महज 1861 वोट ही मिल पार्टी के इस खराब प्रदर्शन का असर इसी साल होने वाले दूसरे राज्यों के चुनाव में भी पड़ सकता है। जदयू, समाजवादी पार्टी और शिवसेना के भी उम्मीदवार जमानत नहीं बचा पाए। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, प्रत्याशी को कुल मतदान का 1.6 फीसदी मत हासिल नहीं होने पर जमानत राशि जब्त हो जाती है।

भाजपा  को लिंगायत विधायकों से उम्मीद

भारतीय जनता पार्टी के 222 सीटों (2 सीटों पर चुनाव बाकी हैं) में से 104 सीटें है। उसे अपना बहुमत साबित करने के लिए 8 विधायकों की जरूरत है। भाजपा तर्क दे रही है कि लोगों ने कांग्रेस के खिलाफ वोट किया है और जेडीएस काफी अंतर से तीसरे स्थान पर है। इस विधानसभा चुनाव में 60 प्लस सीटों का फायदा होने के बाद भाजपा ने साफ कर दिया है कि वह सरकार बनाने में पीछ नहीं हटेगी। भाजपा को विपक्षी दलों के उन लिंगायत विधायकों से उम्मीद है, जो कांग्रेस-जेडीएस के पोस्ट पोल गठबंधन से नाराज बताए जा रहे है, इसका मुखिया वोकलिंगा समुदाय के कुमारस्वामी को बनाया गया है । कर्नाटक में वोकलिंगा और लिंगायत समुदाय के तबसे अदावत चली आ रही है, जब 2007 में बीजेपी के साथ कार्यकाल बंटवारे के गठबंधन के बावजूद सीएम की कुर्सी छोड़ने से इनकार कर दिया था।

येदियुरप्पा ने की किसानों का एक लाख रुपये तक कर्ज माफ करने की घोषणा

कभी सरकारी क्लर्क के तौर पर साधारण सी पहचान रखने वाले और एक हार्डवेयर की दुकान के मालिक बीएस येदियुरप्पा आज तीसरी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री बन गए हैं। कर्नाटक में चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने किसानों की कर्ज माफ करने को सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे के तौर पर पेश किया था। येदियुरप्पा ने चुनाव प्रचार के दौरान खुद कहा था कि सरकार बनने के बाद वह जल्द से जल्द कर्जमाफी की घोषणा करेंगे। येदियुरप्पा ने ईश्वर के ससाथ किसानों के नाम पर भी मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

भारतीय लोकतंत्र फिर खतरे में
बहरहाल, एक बार फिर भारतीय लोकतंत्र पर सवाल खड़ा हो चुका है। कर्नाटक प्रसंग से जाहिर है कि ऐन केन प्रकारेण सत्ता के लिए लोकतंत्र को खतरे में डाल दिया गया है। जरा पीछे पलटकर देखें तो गोवा, मणिपुर और मेघालय में सबसे अधिक विधायकों वाली पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था। तब क्या कर्नाटक में कहीं से बहुमत में नहीं दिखाई दे रही सबसे अधिक विधायकों की पार्टी को सरकार बनाने का न्यौता देना सही कहा जा सकता है? क्या नहीं कहा जा सकता कि भाजपा को विधायक जुटाने की खुली छूट दी गई है? जब कांग्रेस और जेडीएस ने  117 विधायकों के समर्थन का पत्र राज्यपाल को सौंपा, तब फिर 15 दिन बाद क्यों, दूसरे-तीसरे दिन ही बहुमत साबित करने का फैसला क्यों नहीं?

विश्लेषण//समाचार संयोजन : कृष्ण किसलय
(सोनमाटी समाचार के लिए इनपुट : डेहरी-आन-सोन, बिहार में निशांत राज, दिल्ली में संजय सिन्हा, बेंगलुरू में राहुल अभिषेक )

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