जब मर्द-औरत में भेदभाव हुआ कम

हजरत मोहम्मद ने की ऐतिहासिक पहल : डा. कांति सिंह

डेहरी-आन-सोन (बिहार) – सोनमाटी समाचार। यह तथ्यपूर्ण हकीकत है कि हजरत मोहम्मद ने दुनिया में मर्द-औरत को लेकर समाज में मौजूद भेदभाव को खत्म करने की ऐतिहासिक पहल की थी। उनकी पहल से ही औरतें अपनी जिंदगी की जहालत की पूर्ववर्ती स्थिति से बहुत हद तक बाहर आ सकीं। यह बातें पूर्व केेंद्रीय मंत्री व राष्ट्रीय जनता दल की वरिष्ठ नेता डा. कांति सिंह ने डेहरी-आन-सोन में हजरत मोहम्मद के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित जुलूस मोहम्मदी के मौके पर कही।
शहर के जामा मस्जिदके इमाम मोहम्मद सोहराब ने इस मौके पर अपनी बात रखते हुए यह जानकारी दी कि मिस्र के अरबी विदन पाशा फलकी के अनुसार हजरत मोहम्मद का जन्म 1446 साल पहले 571 ईस्वी में हुआ था। वे 40 साल की उम्र में नवी बने थे और 63 साल की उम्र में उनकी मौत हुई थी। उस जमाने में नवजात लड़कियों को जिंदा दफन कर दिया जाता था। अन्य वक्ताओं ने हजर मोहम्मद के पैगाम के रास्ते पर चलकर इंसानियत के सामाजिक विस्तार पर जोर दिया।

जुलूस मोहम्मदी बारह पत्थर से शुरू होकर अंबेडकर चौक, इस्लामगंज, जक्की बिगहा, स्टेशन रोड, पाली रोड होते हुए शहर के मुख्य हिस्से की परिक्रमा कर थाना चौक पर खत्म हुई। जुलूस में राजद के वरिष्ठ नेता डा. राजेन्द्र प्रसाद सिंह, पूर्व बैंक अधिकारी व भाकपा नेता ब्रजमोहन सिंह, गोरखनाथ विमल, पत्रकार वारिस अली, रवि शर्मा, अनिल गुप्ता, रामअवतार चौधरी, संजय पासवान, असलम कुरैशी, आजाद हुसैन, अख्तर अंसारी, दानिश खान, अमरेन्द्र पाल आदि भी शामिल थे।
इस अवसर पर विभिन्न कमेटियों की ओर से मस्जिद परिसरों में कुर्रानखानी मिलाद (भंडारा) का आयोजन किया गया, शिरनी का वितरण किया गया और असहाय गरीबों के बीच कंबल बांटे गए।

(वेब रिपोर्टिंग : वारिस अली, फोटो : अनिल कुमार)

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