पद्मावती विवाद

पद्मावती विवाद : इतिहास और राजनीति को समझने की दरकार,  महारानी पद्मावती की की बहादुरी की कहानी है फिल्म पद्मावती,  फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ का आरोप
उत्तर प्रदेश के बरेली में एक उपद्रवी समूह ने घोषणा की है कि अभिनेत्री दीपिका पादुकोण को जिंदा जलाने वाले को ०1 करोड़ का इनाम दिया जाएगा। इसके पहले करणी सेना की ओर से दीपिका पादुकोण की नाक काटने की धमकी दी जा चुकी है। फिल्म पद्मावती को लेकर देश भर में लंबे समय से विरोध जारी है। आरोप है कि फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ की गई है। उधर, भारत सरकार के मंत्री रामविलास पासवान का भी कहना है कि पद्मावती के इतिहास के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहींहोगा। जाहिर है कि फिल्म पद्मावती के विवाद के मद्देनजर गुजरे इतिहास और मौजूदा राजनीति को समझने की जरूरत है।

करणी सेना द्वारा नाक काटने की धमकी दिए जाने के बाद संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती की किरदार दीपिका पादुकोण ज्यादा चर्चा में आ गई हैं। संजय लीला भंसाली की फिल्मों में लीला, मस्तानी और अब पद्मावती का किरदार निभाने वालीदीपिका पादुकोण का कहना है कि तीनों किरदार बहादुरी और आत्मविश्वास की दृष्टि से एक समान चरित्र हैं। लीला के किरदार में बच्चों वाली चंचलता है। मस्तानी में योद्धा के गुण है और वह युद्धभूमि में उतरती भी है। पद्मावती भी एक योद्धा है जो बिना हथियार के अपने तरीके से युद्ध में माहिर है। उसकी शक्ति उसकी अक्लमंदी और बहादुरी भी है, जो नेतृत्वकारी तरीके से लोगों के सामने आती है। दीपिका पादुकोण का कहना है कि हमारे इतिहास में पद्मावती एक ऐसा किरदार है, जिसके बारे में केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को जानने-समझने की जरूरत है, क्योंकि फिल्म पद्मावती महारानी पद्मावती की की बहादुरी की कहानी है।

पद्मावती या पद्मिनी चित्तौड़ के राजा रत्नसिंह या रतनसेन (1302-1303 ई.) की रानी थी। इस रानी का ऐतिहासिक अस्तित्व तो प्राय: स्वीकार कर लिया गया है, पर नाम का ऐतिहासिक अस्तित्व संदिग्ध है। रानी पद्मिनी, राजा रत्नसिंह तथा अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण को लेकर इतिहासकारों के बीच काफी पहले से मंथन होता रहा है।
पद्मावती नाम का मुख्य स्रोत मलिक मुहम्मद जायसी कृत पद्मावत नामक महाकाव्य है। जायसी के वर्णन से स्पष्ट होता है कि पद्मिनी से उनका तात्पर्य स्त्रियों की उच्चतम कोटि से ही है। राजा गंधर्वसेन की सोलह हजार पद्मिनी रानियाँ थीं, जिनमें सर्वश्रेष्ठ रानी चंपावती थी। चंपावती के गर्भ से पद्मावती का जन्म हुआ था। वह अद्वितीय सुन्दरी थी।

खिलजी ने किया चित्तौडग़ढ़ पर आक्रमण, मांगा पद्मावती को 

रतनसेन के द्वारा निरादृत ज्योतिषी राघव चेतन द्वारा उसके रूप का वर्णन सुनकर दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौडग़ढ़ पर आक्रमण कर दिया था। उसने छल से राजा रतनसेन को बंदी बनाया और उसे लौटाने की शर्त के रूप में पद्मावती को मांगा। तब पद्मावती की ओर से भी छल का सहारा लिया गया और गोरा-बादल की सहायता से अनेक वीरों के साथ वेश बदलकर पालकियों में पद्मावती की सखियों के रूप में जाकर राजा रतनसेन को मुक्त कराया गया। कुंभलनेर के शासक देवपाल के साथ युद्ध में घायल होकर चित्तौड़ लौटने के बाद रतन सेन की मौत हो गई। इसके बाद अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के बाद रानी पद्मावती अन्य सोलह सौ स्त्रियों के साथ जौहर कर भस्म हो गयी। किले का द्वार खोल कर लड़ते हुए सारे राजपूत योद्धा मारे गये। अलाउद्दीन खिलजी को राख के सिवा और कुछ नहीं मिला।

रायबहादुर गौरीशंकर हीराचंद ओझा के अनुसार, इतिहास के अभाव में लोगों ने पद्मावत को ऐतिहासिक पुस्तक मान लिया। जबकि वास्तव में वह आजकल के ऐतिहासिक उपन्यासों जैसी कविताबद्ध कथा है, जिसे ऐतिहासिक बातों के आधार पर ही रचा गया है। अलाउद्दीन दिल्ली का सुल्तान था, जिसने रतनसेन (रत्नसिंह) से लड़कर चित्तौड़ का किला छीना था।

कहानी में कई तथ्यों की संगति इतिहास से नहीं
पद्ममनी की प्रचारित और जनमानस में रची-बसी कहानी में कई तथ्यों की संगति इतिहास से नहींहै। जब रत्नसिंह एक बरस भी राज्य कर नहीं पाया, तब उसके सिंहलद्वीप (श्रीलंका) जाने और वहाँ की राजकुमारी को ब्याह कर लाने की बात कैसे संभव है? सिंहलद्वीप में गंधर्वसेन नाम का कोई राजा ही नहीं हुआ। उस समय तक कुंभलनेर (कुंभलगढ़) आबाद भी नहीं हुआ था। तब देवपाल को वहाँ का राजा कैसे माना जाय? अलाउद्दीन खिलजी ने 8 बरस तक नहीं, एक ही बार में चित्तौड़ पर आक्रमण कर चितौड़ को छिन लिया था।

जौहर का अहसास  चितौडग़ढ़ में

बहरहाल, पद्मावती ऐतिहासिक पात्र है। समय गुजरने के साथ इसकी कहानी में प्रशंसा और वीर रस का अतिरेक जरूर जुड़ गया है। फिल्म पद्मावती के विवाद ने रानी पद्मावती को जानने और अपने देश के अतीत को इतिहास-दृष्टि से समझने की जिज्ञासा बढ़ी है। मौजूदा विवाद के संबंध में न्यूज वल्र्ड इंडिया की एंकर ने चितौडग़ढ़ स्थित पद्मनी महल से की गई रिपोर्टिंग में कहा है कि रानी पद्ममिनी को कल्पना मानने वाले अपनी अज्ञानता स्वीकार कर लें और या फिर जौहर की ताकत का अहसास करने के लिए चितौडग़ढ़ आना चाहिए। फिलहाल इस विवाद को लेकर फिल्म इंडस्ट्री इस फिल्म के समर्थन में आ गई है और कई कलाकारों ने विवाद को क्रिएटिव फ्रीडम पर हमला करार दिया है। फिलहाल इस विवाद को लेकर फिल्म इंडस्ट्री इस फिल्म के समर्थन में आ गई है और कई कलाकारों ने विवाद को क्रिएटिव फ्रीडम पर हमला करार दिया है।

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