प्रेम के दुश्मन : जज ने बेटी को किया नजरबंद, हाईकोर्ट ने कराया आजाद


दो चर्चित उदाहरण सवाल बनकर सामने आए हैं कि बिहार की पुलिस कैसी है? कितनी संवेदनशील है और कर्तव्यनिष्ठ है? थोड़े से लोभ के लिए अकारण प्रतिशोध का कैसा हथियार इस्तेमाल करती है? नीचले स्तर के पुलिस अधिकारी किस तरह की कार्रवाई करते हैं और ऊपर के पुलिस अधिकारी किस तरह का सुपरविजन और गढ़ी गई झूठ का प्रचार भी? राजधानी पटना की घटना इस बात का एक उदाहरण है कि क्या पुलिस की दुनिया में झूठ की जमीन पर हर रोज ऐसी कहानी गढ़ी जाती है? खगडिया का प्रकरण इस बात का नमूना है कि क्या  सच से टकराने का या सच को सामने लाने का साहस पुलिस के पास नहीं है?

क्या पुलिस नामक व्यवस्था की किताब ऐसे कारनामों से भरी पड़ी नहीं होती है? जाहिर है कि पुलिस-तंत्र अनुसंधान का कोरम किसी तरह पूरा कर यह कोर्ट पर छोड़ देता है कि वह साक्ष्यों के आलोक में फैसला दे। सवाल है कि क्या पुलिस आम तौर पर जिसके लिए ही कानून बना होता है, उस कमजोर के पक्ष में होती है? क्या वह आम जनता के लिए मित्र पुलिस बन पाएगी?          -संपादक
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-सुप्रीम कोर्ट के वकील से है जज की बेटी का प्रेम संबंध, उच्च न्यायालय ने तैनात किया न्यायमित्र और कहा न्यायमित्र रखेंगी लड़की का पक्ष, इस मामले में महिला थानाध्यक्ष और महिला एसपी ने भी ओढ़ ली चुप्पी, हाई कोर्ट के निर्देश पर अपने मां-बाप से अलग 15 दिन पटना में रहेगी लड़की
-मुफ्त में सब्जी नहीं देने पर नाबालिग सब्जी विक्रेता को घर से पकड़ा और बना दिया पिस्तौल वाला चोर, उच्चस्तरीय जांच में पुलिसिया झूठ का हुआ पर्दाफाश, जबकि पहले भी किया गया था सुपरविजन

पटना (विशेष प्रतिनिधि। प्यार का दुश्मन बनने का एक बहुचर्चित मामला बिहार के खगडिय़ा जिला से प्रकाश में आया है। सेशन कोर्ट के जज ने ही अपनी बेटी को घर में नजरबंद कर रखा है। इस मामले में लोगों की तरह-तरह की प्रतिक्रिया सामने आ रही है कि दूसरों को न्याय देने वाला ही उत्पीडऩ का सहारा लेकर अन्याय कर रहा है, कि जो खुद न्याय की राह पर न हो वह क्या न्याय करता होगा?
 
इंतजार लड़की के हाई कोर्ट में बयान का
मामले में पटना हाई कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट की अधिवक्ता अनुकृति जयपुरियार को इस मामले का कोर्ट मित्र नियुक्त कर कहा है वे लड़की (जज की बेटी) का पक्ष कोर्ट में रखेंगी। हाई कोर्ट ने कहा है कि यदि कानून के जानकार व रक्षक ने ही कानून तोड़ा है तो उस पर भी कानून के तहत कार्यवाही होगी। इस मामले में सूचना मिलने के बावजूद खगडिय़ा जिले की महिला पुलिस अधीक्षक और खगडिय़ा शहर की महिला थानाध्यक्ष ने लड़की के पक्ष में किसी भी प्रकार की आवश्यक परिणामपरक कार्रवाई करने से चुप्पी साध ली। हालांकि पुलिस की खामोशी की वजह जज पर कार्यवाही करने में ऊपर के अधिकारी की स्वीकृति प्राप्त करने की बाध्यता भी हो सकती है। मामले की सुनवाई पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन और जस्टिस राजीवरंजन प्रसाद की डिविजन बेंच कर रही है। मामले में इंतजार इस बात का है कि लड़की ने हाई कोर्ट के समक्ष उपस्थित होकर क्या कहा है और हाई कोर्ट ने क्या निर्देश दिया है?
 
बार एंड बेंच पर प्रसारित रिपोर्ट
लीगल न्यूज वेबसाइट बार एंड बेंच पर 22 मार्च को मीरा इमानुल (संवाददाता, चेन्नई डेस्क) की प्रसारित रिपोर्ट के मुताबिक, जज की बेटी सुप्रीम कोर्ट के वकील के साथ रिलेशनशिप (प्रेम संबंध) में है। इससे नाराज जज ने 24 वर्षीय ला ग्रेजुएट बेटी को घर में बंधक बना दिया है। लड़की चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (पटना) से लॉ ग्रेजुएट है, जिसके सुप्रीम कोर्ट के वकील के साथ प्रेम संबंध है। लड़की के पिता और परिवार के अन्य सदस्य प्रेम संबंध के पक्ष में नहीं हैं।
बार एंड बेंच की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि लड़की की सुप्रीम कोर्ट के वकील से पहली बार मुलाकात 2012 में साकेत कोर्ट काम्प्लेक्स में इंटर्नशिप के दौरान हुई थी। इसके बाद लड़की अपनी मां के साथ 6 मई को जुडिशिएल सर्विस की परीक्षा देने दिल्ली गई थी। तब वह जिस होटल में ठहरी थी, उस होटल के बाहर सुप्रीम कोर्ट के वकील से मिली थी। तब दिल्ली में लड़की की मां को अपनी बेटी यशस्विनी और सुप्रीम कोर्ट के वकील के अफेयर के बारे में मालूम हुआ। मां बेटी को परीक्षा दिलाए बिना ही खगडिय़ा चली आई।
 
जज ने रखी बेटी से शादी करने की शर्त
वेबसाइट (बार एंड बेंच) में प्रसारित रिपोर्ट के अनुसार, खगडिय़ा पहुंचने पर लड़की के परिवार वालों ने उसके मोबाइल से सुप्रीम कोर्ट के वकील को कॉल कर उसकी रोने की आवाज सुनाई। सुप्रीम कोर्ट के वकील अपने वरिष्ठ साथियों के साथ पिछले महीने खगडिय़ा आकर लड़की के पिता से मुलाकात की। मुलाकात में जज ने सुप्रीम कोर्ट के वकील से कहा सिविल सर्वेंट या जज बनने पर ही वे लड़की की उनसे शादी करेंगे।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के वकील ने खगडिय़ा शहर थाना की महिला पुलिस थानाध्यक्ष किरण कुमारी को लड़की से संबंधित लिखित शिकायत दी। थानाध्यक्ष किरण कुमारी जज के आवास पर लड़की से मिली भी थीं।
फिर सुप्रीम कोर्ट के वकील बेगूसराय जाकर पुलिस अधिकारियों की समीक्षा बैठक के दौरान बिहार के पुलिस महानिदेशक केएस द्विवेदी से मिले। तब पुलिस महानिदेशक ने खगडिय़ा की पुलिस अधीक्षक मीनू कुमारी से मामले को देखने के लिए कहा था।
 
27.06.2018   अपने मां-बाप से अलग 15 दिन पटना में रहेगी लड़की
 
खगडिय़ा के जज की बेटी ने पटना हाई कोर्ट को बताया है कि वह अपने मां-बाप के घर सहज नहीं है। वह अलग रहना चाहती है और अपने प्रेमी से विवाह करना चाहती है। हाई कोर्ट ने लड़की को 15 दिनों के लिए पटना के चाणक्य ला यूनिवर्सिटी के अतिथिगृह में रखने का निर्देश दिया है। इस अवधि में लड़की को सुरक्षा के मद्देनजर रात-दिन एक महिला सुरक्षा गार्ड (संभव हो तो महिला पुलिस अधिकारी) मुहैया कराने का निर्देश दिया है। हाई कोर्ट ने पटना के एसएसपी को लड़की और उसके अभिभावकों को एस्कार्ट कर मुख्य न्यायाधीश के कक्ष में 26 जून को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। (जैसी जानकारी लीगल वेबसाइट बार एंड बेंच में, हाई कोर्ट की कार्यवाही की, प्रसारित की गई है)
दरअसल, प्रेम संबंध के इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के वकील के सजातीय नहीं होने के कारण भी खगडिय़ा के जज अपनी बेटी की शादी करने को तैयार नहीं हैं। फिलहाल बेटी अपनी जिद पर कायम है और उसे अपनी मां-बाप की ओर से की गई उसकी परवरिश व भावनाओं की उसे परवाह नहीं है। हाई कोर्ट ने देश के मौजूदा प्रावधान के तहत ही निर्णय दिया है और लड़की को बिहार के एक सीमांत जिले खगडिय़ा से दूर राजधानी पटना में मां-बाप व परिवार से अलग 15 दिनों तक रहने, किसी से मिलने-जुलने की आजादी दी है। देखना है कि आने वाले चंद दिनों में लड़की क्या अपने पूर्व के फैसले पर कायम रहती है या सोच-विचार के बाद कोई नया फैसला लेती है? व्यक्ति स्वतंत्रता पर परंपरागत सामाजिक दबाव और आधुनिक कानून के प्रावधान के मद्देनजर ही इस मामले में लड़की के परिवार को प्रेम का दुश्मन माना जा रहा है। इंतजार है इस प्रेम कहानी की खुशनुमा परिणति का, जिसमें कोई प्यार का दुश्मन नहीं हो।
 
(लड़की द्वारा लिखा गया पत्र, हाई कोर्ट के आदेश की प्रतिलिपि की तस्वीरें बार एंड बेंच से साभार)

 

दो इंस्पेक्टर व 9 सदस्यीय रेड पार्टी निलंबित,  पूर थाना स्टाफ लाइन हाजिर

पटना (विशेष प्रतिनिधि)। राजधानी पटना में एक नाबालिग सब्जी विक्रेता को झूठे आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजने के मामले में दो पुलिस इंस्पेक्टर और 9 सदस्यीय रेड पार्टी को निलंबित कर दिया गया है। राजधानी पटना के अगमकुआं पुलिस थाना (ओपी) के पूरे स्टाफ को जिला पुलिस लाइन भेज दिया गया है। नाबालिग को बेउर जेल से रिमांड होम में शिफ्ट कर दिया गया है। इस मामले में विभागीय जांच का आदेश दिया गया है और अनुसंधानकर्ता व पर्यवेक्षणकर्ता को कारण बताओ नोटिस दिया गया है।

मुख्यमंत्री के आदेश पर कार्रवाई, जबकि एसएसपी ने जारी की प्रेस रिलीज

यह जानकारी मामला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संज्ञान में आया और उन्होंने  जांच का आदेश दिया। यह घटना मार्च की है।
जबकि 21 मार्च को पटना पुलिस (एसएसपी मनु महाराज) की ओर से जारी प्रेस रिलीज में बताया गया था कि बेउर पुलिस स्टेशन के तहत आने वाले एक ऑटोमोबाइल शोरूम से बाइक लूटने वाले गैंग के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है, जिनके पास से चोरी की चार बाइक और एक देशी बंदूक, 8 कारतूस और 1100 रुपये बरामद हुए हैं। गिरफ्तार युवकों की पहचान नीतीश कुमार, विशाल कुमार और सब्जी विक्रेता के रूप में की गई है।

पिता को नहींदी गई गिरफ्तारी की सूचना,

थानों की खाक छानता रहा नाबालिग का बाप
नाबालिग सब्जी विक्रेता के पिता सुखान पासवान का कहना है कि 19 मार्च को पुलिस अधिकारी को मुफ्त में सब्जी देने से इनकार करने पर पुलिस ने उनके बेटे को चित्रगुप्त नगर स्थित उनके घर (पत्रकार नगर पुलिस स्टेशन) से गिरफ्तार किया। बेटे को बाइक चोरी का आरोप लगाकर और बालिग बताकर जेल भेजा गया था। सुखान पासवान का कहना है कि पुलिसकर्मी बेटे को कॉलर पकड़ कर घसीटते हुए ले गए थे। वह और उनका बेटा कांति फैक्ट्री रोड स्थित महात्मा गांधी नगर में सब्जी की दुकान लगाते हैं। दो दिनों तक मैंने इलाके के पुलिस थाना छान मारा, लेकिन बेटे का पता नहीं चला। बाद में पता चला कि उसे बेउर जेल भेजा गया है। उसके बेटे को इसलिए फंसाया गया कि उसने एक पुलिस अधिकारी को मुफ्त में सब्जी देने से मना कर दिया था।

नाबालिग सब्जी विक्रेता तीन महीने से अकारण झूठे आरोप में जेल में हैं और अब जाकर आरक्षी महानिरीक्षक ने उसके पिता का बयान रिकार्ड किया है।

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