
डेहरी-आन-सोन (रोहतास)-कार्यालय प्रतिनिधि। बिहार के अगले पांच सालों की सियासत का फैसला हो चुका है। विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण के 18 जिलों में 121 सीटों पर 6 नवंबर को मतदान के बाद राज्य के मतदाता 11 नवम्बर के दूसरे चरण के 20 जिलों में 122 विधानसभा सीटों के लिए अपनी-अपनी पसंद-नापसंद तय कर चुके हैं। 17वीं विधानसभा की अवधि 22 नवम्बर को समाप्त हो रही है। तैयारी 18वीं विधानसभा के गठन की और सरकार बनाने की है। मतदाताओं ने जो फैसला दिया है, उसका परिणाम 14 नवम्बर की मतगणना में ईवीएम से बाहर आएगा। मतदाताओं ने किस आधार पर अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में विधायकों को चुना? इस बाबत कई-कई तरह से कयास लगाए जा रहे हैंं।
इसमें कोई शक नहीं कि 20 सालों में नौवीं बार मुख्यमंत्री बन चुके नीतीश कुमार की सरकार बनाने की यह आखिरी सियासी लड़ाई है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चमक की अग्निपरीक्षा भी। मतदाताओं ने अपना फैसला दे दिया है। मत-परिणाम यह तय करेगा कि नीतीश कुमार को आगे के लिए मौका मिलेगा या नहीं और यह भी नरेंद्र मोदी की चमक बिहार के संदर्भ में कितनी बरकरार रह गई है। साथ में यह भी कि बिहार की भावी राजनीति की दशा-दिशा क्या होगी?
क्या रहा मतदान का आधार ?
सभी दल लगातार रैलियाँ कर मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने में जुटे हैं। एनडीए की ओर से आयोजित सभाओं में नेताओं ने सरकार की उपलब्धियों को विस्तार से गिनाया। उन्होंने बताया कि जीविका समूह से जुड़ी महिलाओं को मुख्यमंत्री रोजगार योजना के तहत प्रत्येक परिवार की महिला को 10,000 रुपए दिए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके साथ ही लगभग दो करोड़ परिवारों को प्रति माह 125 यूनिट बिजली मुफ्त प्रदान किए जाने की घोषणा भी की गई है।
एनडीए नेताओं ने अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए इन योजनाओं को बड़े पैमाने पर जनता के बीच रखा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि उनके पास विकास और शासन का लंबा अनुभव है, जबकि दूसरी ओर अनुभवहीन नेता भी मुख्यमंत्री पद का दावा कर रहे हैं।
उधर, महागठबंधन की रैलियों में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य में रोजगार सृजन, उद्योग स्थापना और अवसर उपलब्ध कराने के मामले में पिछले 15 वर्षों में क्या ठोस काम हुआ? उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे इस बार परिवर्तन के लिए मतदान करें।
रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग
इस बार राज्य में मतदान का नया इतिहास बना है। कुल 66.91% मतदाताओं ने वोट डाला, जो 2020 की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक है। इससे पहले 2000 में 62.57% वोटिंग का रिकॉर्ड था, जिसे इस चुनाव में पीछे छोड़ दिया गया।
पहले चरण में 65.08% और दूसरे चरण में 69.66% मतदान दर्ज हुआ—यानी दूसरे चरण में 4.58% की बढ़त देखने को मिली।
मतदाता भागीदारी बढ़ने के तीन प्रमुख कारण माने जा रहे हैं-
प्रवासी मतदाताओं की बड़ी संख्या में वापसी। दिवाली और छठ के मद्देनज़र 13 हजार से अधिक विशेष ट्रेनों का संचालन किया गया, जिससे कई प्रवासी मतदाता समय पर लौटकर मतदान कर सके।
मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण, जिसके कारण नए एवं छूटे हुए मतदाताओं का नाम जोड़ा गया।
राजनीतिक दलों की ओर से दिए गए लाभ, घोषणाएँ और लगातार चलाए गए अभियान, जिसने मतदाताओं की भागीदारी को बढ़ाया।
रोहतास जिले के सात विधानसभा की स्थिति :
डेहरी विधानसभा
सासाराम विधानसभा
नोखा विधानसभा
दिनारा विधानसभा
काराकाट विधानसभा
कारागार विधानसभा
चेनारी विधानसभा






