
पटना। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में बुधवार से तीन दिवसीय संस्थान अनुसंधान परिषद (आईआरसी) की बैठक शुरू हुई। निदेशक डॉ. अनुप दास की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक का उद्देश्य संस्थान में संचालित अनुसंधान परियोजनाओं की समीक्षा, नए शोध प्रस्तावों का मूल्यांकन तथा पूर्वी भारत के लिए सतत एवं जलवायु-अनुकूल कृषि की भावी अनुसंधान प्राथमिकताओं का निर्धारण करना है।
बैठक को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के सहायक महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) डॉ. राकेश कुमार ने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप बहुविषयक अनुसंधान कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर बल दिया। उन्होंने किसानों की जरूरतों के अनुरूप जलवायु-अनुकूल, प्रभावी और किसान-केंद्रित कृषि प्रौद्योगिकियों के विकास की आवश्यकता बताई।
निदेशक डॉ. अनुप दास ने वैज्ञानिकों से किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए नवीन तकनीकों एवं उपयोगी उत्पादों के विकास का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अनुसंधान केवल प्रयोगशाला तक सीमित न रहकर खेतों तक पहुंचे और किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए। उन्होंने वैज्ञानिकों से आपसी संवाद, अनुभवों के आदान-प्रदान और सहयोग की भावना को मजबूत करने की भी अपील की।
बैठक में राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर के निदेशक डॉ. बिकास दास, बामेती, पटना के निदेशक डॉ. पी. के. मिश्रा, महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान, मोतिहारी के निदेशक डॉ. राघवेंद्र सिंह, केंद्रीय अंतर्देशीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, कोलकाता के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अरुण पंडित तथा भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान केंद्र, कोलकाता के प्रभारी डॉ. अर्नब सेन ने विषय-विशेषज्ञ के रूप में भाग लिया। विशेषज्ञों ने विभिन्न अनुसंधान परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए उनकी गुणवत्ता और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

बैठक में उद्यानिकी फसलों के आनुवंशिक संसाधन प्रबंधन, पुनर्योजी एवं समेकित कृषि प्रणाली, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, सतत पशुधन एवं मत्स्य उत्पादन प्रणाली तथा सामाजिक-आर्थिक, प्रसार एवं नीति अनुसंधान सहित पाँच प्रमुख विषयगत क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। वैज्ञानिक अपनी परियोजनाओं की प्रगति प्रस्तुत करेंगे, जिनकी विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी समीक्षा की जाएगी।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. अनुप दास एवं अन्य अतिथियों द्वारा वृक्षारोपण के साथ हुई। स्वागत भाषण डॉ. कमल शर्मा ने दिया तथा पिछली बैठक की अनुशंसाओं पर की गई कार्रवाई का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर बेंगलुरु स्थित गैर-सरकारी संस्थान डेवलपमेंट फोकस के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत रांची स्थित कृषि प्रणाली का पहाड़ी एवं पठारी अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित टमाटर, नेनुआ, लौकी, करेला, लोबिया और सेम की उन्नत किस्मों के सब्जी बीज उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा।
बैठक में रांची, रामगढ़ और बक्सर के कृषि विज्ञान केंद्रों सहित संस्थान के लगभग 100 वैज्ञानिकों एवं तकनीकी अधिकारियों ने भाग लिया। सात अगस्त तक चलने वाली इस बैठक में भविष्य की कृषि चुनौतियों और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप अनुसंधान की दिशा तय करने पर विस्तृत मंथन किया जाएगा।




