डेहरी थाना चौक की दुकानें जलकर खाक / सासाराम में कठपुतली नाट्य प्रस्तुति / कृषि संस्थान में ओरिएंटेशन क्लास / प्रयागराज में साहित्यांजलि प्रभा का लोकार्पण

आग लगने से दो रेडीमेड दुकानें जलकर खाक

डेहरी-आन-सोन (रोहतास)-सोनमाटी टीम। थाना चौक पर सिनेमा रोड में स्थित प्रतिष्ठित रेडीमेड दुकानों देवांश फैशन और बाल गोपाल में आग लगने से दुकानें जलकर खा हो गईं। आग कैसे लगी, इसकी अंतिम पुष्टि नहीं हो सकी है। बुधवार को बाजार बंद होने के कारण दुकानें बंद थीं। मालिक सज्जन अग्रवाल सहित उनके दुकान संचालक बेटे आग लगने के समय मौजूद नहीं थे, बाहर थे। हालांकि दुकान वाले परिसर में ही ऊपरी तल पर उनका परिवार रहता है।  दुकान मालिक के परिवार की महिलाओं-बच्चों को बाहर से सीढ़ी लगाकर नीचे सुरक्षित उतारा गया। शटर को तोडऩे के बाद ही दुकान के भीतर लगी आग पर काबू पाया जा सका।

अनुमान लगाया जा रहा है कि आग बिजली के शार्ट सर्किट के कारण लगी। शाम 5-6 बजे लगी आग पर कई घंटों बाद काफी मशक्कत के बाद काबू पाया जा सका, मगर तब तक दोनों का सब कुछ जलकर राख में बदल चुका था। आग बुझाने में पास-पड़ोस के लोगों, थाना पुलिस कर्मी और दुकानदारों ने संभव सक्रिय सहयोग किया। मगर आग पर तुरंत काबू नहीं पाया जा सका। बार-बार फोन करने के बावजूद सरकारी दमकल विभाग का पानी भरा दमकल (अग्निशामक वाहन) के घंटों बाद पहुंचने तक दुकानें धू-धू कर जलती रहीं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अगर दमकल समय पर आ जाता तो नुकसान होने से बहुत कुछ बच सकता था। इससे पहले कुछ दिनों पूर्व जय हिंद सिनेमा के सामने ललित इन्फोटेक दुकान में भी देर रात बिजली के शार्ट-सर्किट होने से आग लगी थी और दुकान जलकर लगभग खाक हो गई थी। वहां भी दमकल देर से पहुंचा था।
(रिपोर्ट, तस्वीर : निशांत राज, वारिस अली)

150 कठपुतलियों के माध्यम से बताई गांधी की जीवनी

सासाराम (रोहतास)-सोनमाटी संवाददाता। मोहन दास से महात्मा गांधी बनने और राजघाट तक जीवन के अंतिम सफर तक की कहानी की कठपुतली नाटक के माध्यम से प्रभावपूर्ण प्रस्तुति की गई। संतपाल स्कूल के उमा सभागार में आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए कठपुतली नाटक वाराणसी के क्रिएटिव पपेट थियेटर ट्रस्ट के कलाकारों ने प्रस्तुत किया। कठपुतली प्रदर्शन के निदेशक मिथिलेश दूबे ने बताया कि कठपुतली कथा में काष्ठ मुद्रा संचालन के जरिये महात्मा गांधी की कहानी का बखूबी रोचक चित्रण किया गया है। इस कार्यक्रम के माध्यम से लुप्त हो रही इस लोककला को पुनर्जीवित करने के लिए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान का सहयोग लिया गया है। भारत के 15 राज्यों के विद्यालयों, महाविद्यालयों और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब दस हजार प्रदर्शन का आयोजन किया जा चुका है। कठपुतली प्रदर्शन में नकल नहीं करने, सच बोलने, डांडी मार्च, असहयोग आंदोलन, उपवास का महत्व, आजादी का संघर्ष से जुड़े महात्मा गांधी की भूमिका का जीवंत नाटकीय चित्रण किया गया है।

संतपाल विद्यालय के चेयरमैन डा. एसपी वर्मा ने इस अवसर पर कहा कि लुप्त होती संस्कृति और लोककला को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से कठपुतली नाटक प्रदर्शन का आयोजन अपना महत्व रखता है। विद्यालय के प्रबंधक रोहित वर्मा, सचिव वीणा वर्मा, प्राचार्य आराधना वर्मा, रूपेश कुमार श्रीवास्तव, मीडिया प्रभारी अर्जुन कुमार आदि ने कठपुतली प्रदर्शन में सहयोग किया। कठपुतली के संचालक कलाकारों में अनिल कुमार, सूरज कुमार, पंकज कुमार, विशाल कुमार, गोविंद कुमार और अन्य शामिल थे।
(रिपोर्ट, तस्वीर : अर्जुन कुमार)

कृषि क्षेत्र में रोजगार की सर्वाधिक संभावना

डेहरी-आन-सोन (रोहतास)-कार्यालय प्रतिनिधि। देश की अर्थ-व्यवस्था आज भी प्रमुख तौर पर कृषि आधारित है। देश की 75 फीसदी आबादी गांवों में बसती है। कृषि ऐसा क्षेत्र हैं, जहां रोजगार की सर्वाधिक संभावना है। यह बातें गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सांसद गोपाल नारायण सिंह ने विश्वविद्यालय परिसर में स्थित नारायण कृषि विज्ञान संस्थान में कृषि स्नातक प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि संस्थान का उद्देश्य डिग्री प्रदान करना ही नहीं, बल्कि कृषि तकनीक संपन्न कुशल और वैश्विक जानकारी रखने वाला बनाना है। उन्होंने भारतीय जनमानस में सदियों से चली एक लोकोक्ति दोहराई- उत्तम खेती मध्यम बान, नीच चाकरी भीख निदान। इस उक्ति से जाहिर है कि कृषि प्रधान देश भारत में खेती सबसे उत्तम और आय वाला पेशा थी। कारोबार का स्थान बाद में था और नौकरी करना निचले दर्जा का काम माना जाता था। इन तीनों की स्थिति नहीं होने के कारण भींख अंतिम निदान था। आरंभ में नारायण कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक डा. आरपी सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया।
(रिपोर्ट, तस्वीर : भूपेंद्रनारायण सिंह)

साहित्यांजलि प्रभा का नया अंक लोकार्पित

प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)-सोनमाटी प्रतिनिधि। हिंदी के विख्यात साहित्यकार भगवतीचरण वर्मा और महिला कथाकार अमृता प्रीतम की स्मृति के समर्पित भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ की मासिक पत्रिका साहित्यांजलि प्रभा के सितंबर अंक का लोकार्पण महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय वर्धा के प्रयागराज केंद्र के सभागार में महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुनेश्वर मिश्रा ने किया। लोकार्पण समारोह का संचालन महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक एवं पत्रिका के संपादक डा. भगवान प्रसाद उपाध्याय ने किया। समारोह के मुख्य अतिथि महासंघ के राष्ट्रीय संरक्षक डा. बालकृष्ण पांडेय, साहित्य प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय प्रभारी श्यामनारायण श्रीवास्तव, जांच प्रकोष्ठ राष्ट्रीय प्रभारी जगदम्बा प्रसाद शुक्ला थे। चाकघाट (मध्य प्रदेश) के वरिष्ठ पत्रकार रामलखन गुप्ता और शिवा शंकर पांडेय ने भी समारोह को विशेष रूप से संबोधित किया। आरंभ में राष्ट्रीय महासचिव श्यामसुंदर सिंह पटेल, प्रयागराज शाखा के साहित्य प्रकोष्ठ प्रभारी डा. रामलखन चौरसिया और प्रयागराज जिलाध्यक्ष अखिलेश मिश्र ने अतिथियों का स्वागत किया।
(रिपोर्ट, तस्वीर : डा. भगवान प्रसाद उपाध्याय)

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