
डेहरी -आन-सोन (रोहतास) -कार्यालय प्रतिनिधि। पाली स्थित रामकृष्ण आश्रम और डालमियानगर बंगाली क्लब में षष्ठी (रविवार) को मां दुर्गा पंडाल का पट खुलते ही पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। ढाक की थाप और धुनुची नृत्य पर भक्त मां की आराधना में लीन दिखे। पंडालों में बंगाल की संस्कृति जीवंत हो उठी।
पाली रोड स्थित रामकृष्ण आश्रम में पिछले आठ दशक से शारदीय नवरात्र परंपरागत रूप से दुर्गा पूजा का आयोजन होता रहा है। आश्रम के अध्यक्ष प्रदीप दास उर्फ गोरा दादा ने बताया कि षष्ठी के अवसर पर कल्पारंभ पूजा के तहत देवी को आमंत्रण व अधिवास के साथ पट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले गए।
उन्होंने बताया कि सोमवार को नववर्ष पत्रिका प्रवेश, स्थापना व सप्तमी पूजा, 30 सितंबर को देवी का आह्वान, महाअष्टमी, संधि पूजा एवं बलिदान, 1 अक्टूबर को महानवमी पूजा तथा 2 अक्टूबर को दशमी पूजा प्रारंभ होगी। अपराजिता पूजन उपरांत मूर्ति विसर्जन संपन्न होगा। सप्तमी से नवमी तक प्रतिदिन भोग वितरण दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक किया जाएगा।
बताया कि पूजा कार्यक्रम का संचालन पश्चिम बंगाल के पुरोहित चंचल राय, दिलीप चक्रवर्ती और देव कुमार बनर्जी के निर्देशन में कराया जा रहा है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि रामकृष्ण आश्रम में माता की प्रतिमा के सामने जो भी सच्चे मन से प्रार्थना करता है, उसकी मुराद पूरी होती है। बंगालोर से आए श्रद्धालु रितिका ने बताया कि वे हर साल परिवार सहित इसी आश्रम में माता की पूजा करने आते हैं।
आश्रम के उपाध्यक्ष दुलाल भट्टाचार्य ने बताया कि वर्ष 1957 में स्थापित रामकृष्ण आश्रम की स्थापना स्वामी प्रगनानंद ने की थी।
पूजन में कार्तिक मजूमदार, अजय अधिकारी, गोपाल चक्रवर्ती, अमर भटाचार्य, डॉ. पंकज कुमार दास, धीरज कुमार दास, काजोल घोष, पल्लव मित्रा, सुशांतो दास सहित कई श्रद्धालु सहयोग कर रहे हैं।






