कृषि में तकनीक का बढ़ता कदम: उर्वरक संतुलन से आईओटी सिंचाई तक पहल

पटना। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में शुक्रवार को किसानों के बीच संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने हेतु एक महत्वपूर्ण संवाद बैठक आयोजित की गई। बैठक में कृषि विशेषज्ञों ने मृदा स्वास्थ्य सुधार और खेती की लागत कम करने के लिए कई ठोस कार्ययोजनाओं को अंतिम रूप दिया।

संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने कहा कि असंतुलित उर्वरक उपयोग के कारण मृदा की उर्वरता लगातार घट रही है और किसानों की लागत बढ़ रही है। उन्होंने मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन तथा जैविक एवं रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर विशेष जोर दिया।

बैठक में विशेषज्ञों ने हरी खाद के महत्व पर विस्तार से चर्चा की और धैंचा एवं सनई जैसी फसलों के उपयोग की सिफारिश की। इससे मृदा में जैविक कार्बन और पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को अपनाने पर भी बल दिया गया।निर्णय लिया गया कि गांव स्तर पर साप्ताहिक प्रशिक्षण, खेतों में प्रदर्शन (डेमो) और जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। किसानों के लिए हिंदी में तकनीकी लेख और प्रसार पुस्तिकाएं भी तैयार कर वितरित की जाएंगी। इसके अलावा, सटीक नाइट्रोजन उपयोग के लिए लीफ कलर चार्ट को बढ़ावा देने और फसल चक्र में दलहनी फसलों को शामिल करने पर सहमति बनी।

संस्थान द्वारा बिहार सरकार के सहयोग से जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रमों के तहत धान-गेहूं प्रणाली में हरी खाद के बीज उत्पादन और प्रदर्शन कार्य किए जाएंगे। फसल विविधीकरण के तहत दलहन और मोटे अनाजों को बढ़ावा देने के साथ खेत की मेड़ों पर अरहर की खेती को प्रोत्साहित करने की योजना बनाई गई है।

डिजिटल माध्यमों का उपयोग बढ़ाते हुए मोबाइल संदेश, व्हाट्सएप समूह और अन्य प्लेटफॉर्म के जरिए किसानों तक जानकारी पहुंचाने की रणनीति भी तैयार की गई। विशेषज्ञों ने विश्वास जताया कि इन प्रयासों से इनपुट लागत में कमी, मृदा स्वास्थ्य में सुधार और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा।

कार्यक्रम के दौरान निदेशक डॉ. अनुप दास ने किसानों के साथ दलहन प्रक्षेत्र का भ्रमण किया और उन्हें इसके लाभों के बारे में जागरूक किया।इस बैठक में डॉ. आशुतोष उपाध्याय, डॉ. कमल शर्मा, डॉ. उज्ज्वल कुमार एवं डॉ. संजीव कुमार सहित कई वैज्ञानिक उपस्थित रहे, जबकि बक्सर और रामगढ़ के कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रमुख ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना ने बीआईटी मेसरा, पटना के सहयोग सेइंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) आधारित स्मार्ट सिंचाई प्रणाली का पायलट प्रोजेक्ट प्रारंभ किया है। यह पहल अनियमित वर्षा, गिरते भूजल स्तर, बढ़ती सिंचाई लागत और जल के असंतुलित उपयोग जैसी चुनौतियों से निपटने के उद्देश्य से शुरू की गई है।इस परियोजना के अंतर्गत लोरा (एलपीडब्ल्यूएएन ) तकनीक पर आधारित मृदा नमी निगरानी प्रणाली विकसित की जा रही है। इस प्रणाली के माध्यम से किसानों को वास्तविक समय डेटा उपलब्ध होगा, जिससे वे आवश्यकता अनुसार ही सिंचाई कर सकेंगे। इससे जल की बचत, लागत में कमी और मृदा संरक्षण सुनिश्चित होगा।

संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने इस पहल को “स्मार्ट फार्म” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि यह तकनीक जल उपयोग दक्षता में सुधार के साथ कृषि प्रणाली को अधिक आधुनिक और टिकाऊ बनाएगी।

वहीं भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष उपाध्याय ने कहा कि मृदा नमी की वास्तविक समय जानकारी मिलने से सिंचाई की सटीकता बढ़ेगी और फसलों की उत्पादकता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार यह पहल जलवायु अनुकूल कृषि और सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे भविष्य में किसानों को तकनीक आधारित खेती की ओर प्रोत्साहन मिलेगा।

Share
  • Related Posts

    बिहार में औद्योगिक निवेश को बड़ी रफ्तार, 23 नई परियोजनाओं को मिली मंजूरी

    पटना। बिहार में औद्योगिक विकास और निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (बियाडा) की परियोजना समाशोधन समिति (पीसीसी) ने 23…

    Share

    पुस्तक समीक्षा: युद्ध, पीड़ा और मनुष्य होने की कहानी- “इंसान का नसीबा”

    एक समय ऐसा था जब सोवियत रूस की क्रांति से हमारे स्वाधीनता सेनानी, खासकर साहित्यकार, गहरे रूप से प्रेरित होते थे। यह परंपरा लंबे समय तक फलती-फूलती रही। लेकिन 1992…

    Share

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

    You Missed

    बिहार में औद्योगिक निवेश को बड़ी रफ्तार, 23 नई परियोजनाओं को मिली मंजूरी

    बिहार में औद्योगिक निवेश को बड़ी रफ्तार, 23 नई परियोजनाओं को मिली मंजूरी

    पुस्तक समीक्षा: युद्ध, पीड़ा और मनुष्य होने की कहानी- “इंसान का नसीबा”

    पुस्तक समीक्षा: युद्ध, पीड़ा और मनुष्य होने की कहानी- “इंसान का नसीबा”

    खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों को वैज्ञानिक कृषि तकनीकों की जानकारी

    खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों को वैज्ञानिक कृषि तकनीकों की जानकारी

    मंगोलिया में बुद्ध के प्रमुख शिष्यों के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी संपन्न

    मंगोलिया में बुद्ध के प्रमुख शिष्यों के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी संपन्न

    पीएनसी लापरवाही पर भीम आर्मी का प्रदर्शन, डीएम को ज्ञापन

    पीएनसी लापरवाही पर भीम आर्मी का प्रदर्शन, डीएम को ज्ञापन

    अंतरराष्ट्रीय साहित्य सम्मान से सम्मानित हुए अरविंद चित्रांश, कायस्थ महासभा ने किया अभिनंदन

    अंतरराष्ट्रीय साहित्य सम्मान से सम्मानित हुए अरविंद चित्रांश, कायस्थ महासभा ने किया अभिनंदन