किसानों को सिखाया गया टिकाऊ खेती का तरीका, मृदा उर्वरता बचाने पर जोर

पटना / पूर्णिया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना एवं कृषि विज्ञान केंद्र, पूर्णिया के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को जलालगढ़ प्रखंड के कथैली ग्राम में “संतुलित उर्वरक उपयोग” विषय पर किसान–वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में लगभग 100 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 30 महिलाएँ भी शामिल रहीं।

पूर्णिया की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी में धान, मक्का और गेहूँ की सघन खेती होती है, लेकिन अधिक उत्पादन की प्रतिस्पर्धा में रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग से मृदा उर्वरता में गिरावट और लागत वृद्धि की समस्या सामने आ रही है। इसी चुनौती से निपटने के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में टिकाऊ कृषि के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ गोबर खाद, कम्पोस्ट और हरी खाद के संतुलित उपयोग की सलाह दी। संवाद सत्र में किसानों ने मृदा उर्वरता में कमी, बढ़ती लागत और उर्वरकों पर निर्भरता जैसी समस्याएँ साझा कीं, जिनके समाधान हेतु वैज्ञानिकों ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप व्यावहारिक सुझाव दिए।

हरी खाद के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि ढैंचा जैसी फसलों को ग्रीष्म ऋतु में उगाकर धान की बुआई से पहले मिट्टी में पलट देने से जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है। इससे मृदा संरचना मजबूत होती है और नाइट्रोजन सहित आवश्यक पोषक तत्वों की उपलब्धता में वृद्धि होती है। कार्यक्रम के दौरान किसानों को ढैंचा के बीज भी वितरित किए गए, ताकि वे इस तकनीक को अपने खेतों में अपनाएं।

किसानों को मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक प्रबंधन अपनाने की सलाह दी गई तथा “मृदा स्वास्थ्य कार्ड” के अनुसार ही उर्वरकों के उपयोग पर जोर दिया गया। साथ ही उर्वरकों की सही मात्रा, समय और विधि के पालन से लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा की गई।

पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के निदेशक डॉ. अनुप दास ने अपने संदेश में किसानों से मृदा स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और संतुलित उर्वरक उपयोग अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि फसल अवशेष पुनर्चक्रण और हरी खाद के प्रयोग से दीर्घकालीन रूप से उत्पादन और आय में स्थिरता लाई जा सकती है।

कार्यक्रम में डॉ. संतोष कुमार, डॉ. गौस अली, कृषि विज्ञान केंद्र पूर्णिया के डॉ. के.एम. सिंह, जिला कृषि पदाधिकारी श्री हरिद्वार चौरेसिया तथा प्रखंड कृषि पदाधिकारी श्री कमलेश मिश्रा सहित कई विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

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