“प्रशांत किशोर की सक्रिय चुनावी पारी, भाजपा की प्रतिष्ठा और राजद की चुनौती ने बांकीपुर उपचुनाव को त्रिकोणीय मुकाबले में बदल दिया है। अब यह चुनाव केवल एक सीट का नहीं, बल्कि बिहार की बदलती राजनीतिक दिशा का संकेत भी माना जा रहा है।”
- चितरंजन भारती
बिहार की राजधानी पटना का बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र लंबे समय से राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। कभी ‘बांकीपुर’ के नाम से पहचाना जाने वाला यह इलाका आज भी प्रशासनिक और राजनीतिक पहचान बनाए हुए है। पटना के कई सरकारी कार्यालयों के पते में आज भी बांकीपुर का उल्लेख मिलता है। यही कारण है कि इस विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक महत्व केवल एक शहरी सीट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की राजनीति की नब्ज भी माना जाता है।
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन के पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद यह सीट रिक्त हुई और उपचुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं।
प्रारंभिक तौर पर यह माना जा रहा था कि भाजपा अपने पारंपरिक गढ़ में सहज जीत दर्ज कर लेगी, क्योंकि 1995 से यह सीट लगातार भाजपा के प्रभाव में रही है। लेकिन जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के स्वयं चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा ने पूरे चुनावी समीकरण को बदल दिया।
यह पहला अवसर है जब प्रशांत किशोर स्वयं किसी विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बने हैं। वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने बड़ी संख्या में उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन उन्होंने स्वयं चुनाव नहीं लड़ा था। इस बार उनका चुनाव मैदान में उतरना केवल एक सीट जीतने का प्रयास नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता को स्थापित करने की रणनीति भी माना जा रहा है।
प्रशांत किशोर ने पिछले कुछ वर्षों में बिहार के विभिन्न जिलों में व्यापक जनसंपर्क अभियान और पदयात्रा के माध्यम से अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाने का प्रयास किया है। शहरी शिक्षित वर्ग, युवा मतदाता और पारंपरिक राजनीति से असंतुष्ट वर्ग के बीच उनकी स्वीकार्यता बढ़ी है। बांकीपुर जैसा शहरी क्षेत्र उनके लिए राजनीतिक प्रयोग की दृष्टि से भी उपयुक्त माना जा रहा है।
दूसरी ओर, भाजपा इस उपचुनाव को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़कर देख रही है। बांकीपुर केवल एक विधानसभा सीट नहीं, बल्कि भाजपा के मजबूत शहरी आधार का प्रतीक रही है। ऐसे में पार्टी ने स्थानीय संगठन से जुड़े कार्यकर्ता अभिषेक कुमार सिन्हा ‘बंटी’ को उम्मीदवार बनाकर यह संदेश देने का प्रयास किया है कि संगठन और जमीनी कार्यकर्ताओं पर उसका भरोसा कायम है।
उधर राष्ट्रीय जनता दल ने रेखा कुमारी गुप्ता को उम्मीदवार बनाकर मुकाबले को त्रिकोणीय स्वरूप दे दिया है। राजद का प्रयास अपने पारंपरिक सामाजिक आधार को एकजुट रखने के साथ-साथ शहरी मतदाताओं तक भी पहुंच बनाने का है। यदि महागठबंधन का वोट बैंक संगठित रहता है तो मुकाबला और रोचक हो सकता है।
हालांकि बांकीपुर की चुनावी राजनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू कम मतदान प्रतिशत भी रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में यहां लगभग 41 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस बार यदि मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय वृद्धि होती है तो उसका लाभ किस दल को मिलेगा, यह चुनाव परिणाम तय करने वाला महत्वपूर्ण कारक हो सकता है।
इस चुनाव के दौरान राज्य और केंद्र सरकार से जुड़े कई राजनीतिक तथा प्रशासनिक मुद्दे भी चर्चा में हैं। विभिन्न दल इन मुद्दों को अपने-अपने ढंग से जनता के बीच उठा रहे हैं। हालांकि इनका वास्तविक चुनावी प्रभाव मतगणना के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय संगठन, उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि और मतदाताओं की अंतिम प्राथमिकता इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र का इतिहास भी कम रोचक नहीं है। वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आए इस क्षेत्र को पहले पटना पश्चिम के नाम से जाना जाता था। यह क्षेत्र लंबे समय से शिक्षित, मध्यमवर्गीय और राजनीतिक रूप से जागरूक मतदाताओं का केंद्र रहा है। यहां जातीय समीकरणों के साथ-साथ उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि और संगठनात्मक क्षमता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है।
अतीत में इस सीट पर कई बड़े नेताओं ने चुनाव लड़ा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के पिता ठाकुर प्रसाद, रामकृपाल यादव तथा कांग्रेस प्रत्याशी लव सिन्हा जैसे नाम इस सीट से जुड़े रहे हैं। इससे स्पष्ट होता है कि बांकीपुर केवल चुनावी आंकड़ों की नहीं, बल्कि बिहार की राजनीतिक विरासत की भी महत्वपूर्ण सीट है।
इस बार का उपचुनाव इसलिए भी विशेष है क्योंकि भाजपा अपनी परंपरागत पकड़ बनाए रखने की चुनौती का सामना कर रही है, जन सुराज अपनी राजनीतिक ताकत साबित करना चाहती है और राजद अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के प्रयास में है। परिणाम चाहे जो हो, इतना स्पष्ट है कि बांकीपुर का यह उपचुनाव बिहार की भविष्य की राजनीति के लिए कई महत्वपूर्ण संकेत छोड़ जाएगा।
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