
आरा (भोजपुर)। सर्जना ट्रस्ट द्वारा आयोजित ‘भोजपुरी कला यात्रा’ के तहत संभावना आवासीय उच्च विद्यालय, आरा में भोजपुर पीड़िया चित्रकारी से जुड़े कलाकारों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में नाबार्ड और आरबीआई की ओर से कलाकारों एवं प्रतिभागियों को जीआई टैग के महत्व, इसके व्यावहारिक लाभ, वित्तीय समावेशन और सुरक्षित बैंकिंग की जानकारी दी गई।
नाबार्ड की जिला विकास प्रबंधक ( डीडीएम) सुरभि ने भोजपुर पीड़िया चित्रकारी के कलाकारों को जीआई टैग के महत्व और इसके लाभों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि जीआई टैग इस पारंपरिक कला को उसकी विशिष्ट भौगोलिक पहचान और प्रामाणिकता प्रदान करता है। इससे कलाकारों को बड़े बाजार, नए खरीदारों और बेहतर विपणन अवसरों से जुड़ने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने कलाकारों को जीआई के अधिकृत उपयोगकर्ता के रूप में पंजीकरण कराने के महत्व की जानकारी देते हुए कहा कि इससे वास्तविक कलाकारों की पहचान स्थापित होगी और भोजपुर पीड़िया चित्रकारी के नाम के अनधिकृत अथवा नकली उपयोग पर रोक लगाने में सहायता मिलेगी।
डीडीएम सुरभि ने कलाकारों से जीआई टैग को केवल प्रमाणपत्र के रूप में न देखकर अपनी कला की पहचान मजबूत करने, बाजार का विस्तार करने और आय के नए अवसर सृजित करने के माध्यम के रूप में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने इस पारंपरिक कला के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक बाजार से जुड़ाव की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
उन्होंने कहा कि कलाकार अपनी पारंपरिक कला की मौलिकता बनाए रखते हुए उसे नई बाजार आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करें और इसके व्यावसायिक विस्तार की दिशा में आगे बढ़ें।
भोजपुर पीड़िया चित्रकारी भोजपुर जिले का पहला जीआई टैग प्राप्त उत्पाद है। इस उपलब्धि को नाबार्ड एवं सर्जना ट्रस्ट के सतत प्रयासों और सक्रिय सहयोग का परिणाम बताया गया। जीआई पंजीकरण प्रमाणपत्र में नाबार्ड, बिहार को फैसिलेटिंग एजेंसी के रूप में भी मान्यता प्राप्त है।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से वित्तीय समावेशन और सुरक्षित बैंकिंग के प्रति प्रतिभागियों को जागरूक किया गया। इस दौरान बैंकिंग सेवाओं के सुरक्षित उपयोग, बचत, डिजिटल बैंकिंग तथा साइबर धोखाधड़ी से बचाव के उपायों की जानकारी दी गई। प्रतिभागियों से ओटीपी, पिन, पासवर्ड और बैंक से संबंधित अन्य गोपनीय जानकारी किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने की अपील की गई।
‘भोजपुरी कला यात्रा’ के माध्यम से एक ही मंच पर भोजपुरी कला-संस्कृति के संरक्षण के साथ कलाकारों को उनके अधिकारों, जीआई टैग की उपयोगिता, अधिकृत उपयोगकर्ता पंजीकरण, बाजार की संभावनाओं और वित्तीय सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य भोजपुर पीड़िया चित्रकारी की समृद्ध परंपरा को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करते हुए कलाकारों को जीआई की पहचान, व्यापक बाजार से जुड़ाव और वित्तीय समावेशन के माध्यम से सशक्त बनाना रहा। कार्यक्रम का संचालन सर्जना न्यास के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ चित्रकार संजीव सिन्हा ने किया।
इस अवसर पर विद्यालय की प्राचार्या डॉ. अर्चना सिंह, निदेशक कुमार द्विजेंद्र, रंगकर्मी ओ. पांडेय, राजीव रंजन, मीरा, खुशबू, विष्णु शंकर, प्रिया पांडेय, सुनीता सिंह, अनीता पांडेय, निमा, शशि भूषण, दीपा श्रीवास्तव, मदुरई सहित कई कलाकार और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।





