
गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)। श्री दीप साहित्यिक सेवा संस्थान, गोरखपुर द्वारा संचालित श्री दीप साहित्य संगम, गोरखपुर की मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन श्री विश्वकर्मा मंदिर, मानसरोवर, गोरखनाथ में भव्य एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार नन्दलाल मणि त्रिपाठी ‘पीताम्बर’ ने की।
गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार कुमार शैल सत्यार्थी तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी गायक सम्राट राकेश श्रीवास्तव की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया। संस्था के राष्ट्रीय संरक्षक नन्दलाल मणि त्रिपाठी ‘पीताम्बर’, मुख्य ट्रस्टी दिनेश गोरखपुरी, अभय श्रीवास्तव तथा भारतेन्द्र सिंह ने दोनों अतिथियों का अंगवस्त्र, माल्यार्पण एवं संस्था का बैज प्रदान कर सम्मान किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीमती शशि पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। इसके उपरांत देश के विभिन्न अंचलों से पधारे कवि-कवयित्रियों—निर्मल गुप्त ‘परदेशी’, शशि पाण्डेय, डॉ. भारतेन्द्र सिंह, आर.एन. दुबे, बिंदु चौहान, दिनेश गोरखपुरी, वंदना सूर्यवंशी, प्रेमचंद्र निगम, राघवेंद्र मिश्र, निशा भारती, प्रेमलता ‘रसबिंदु’, अनुरिता अवध तथा अन्य रचनाकारों ने ओज, श्रृंगार और करुण रस से परिपूर्ण अपनी रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन अभय कुमार श्रीवास्तव ‘जिज्ञासु’ ने किया। उन्होंने मंच से विशिष्ट अतिथि राकेश श्रीवास्तव को गीत प्रस्तुति के लिए आमंत्रित किया। राकेश श्रीवास्तव ने जैसे ही अपने सुमधुर भोजपुरी लोकगीतों की प्रस्तुति आरंभ की, पूरा सभागार झूम उठा और देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से वातावरण गुंजायमान रहा।
इस अवसर पर मुख्य ट्रस्टी दिनेश गोरखपुरी ने सभी अतिथियों, कवियों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, “श्री दीप साहित्य संगम का संकल्प भोजपुरी और हिंदी साहित्य की मशाल को नई पीढ़ी तक पहुँचाना है। आज दूर-दराज से आए कवियों और श्रोताओं ने यह सिद्ध कर दिया कि जब तक एक भी दीप जल रहा है, साहित्य की लौ बुझ नहीं सकती। राकेश श्रीवास्तव जी जैसी विभूतियों का सान्निध्य हमारी ऊर्जा को दोगुना कर देता है।”कार्यक्रम का समापन साहित्य और लोकसंस्कृति के संरक्षण के संकल्प के साथ हुआ।




