बिहार में अल नीनो का असर: किसानों के लिए आईसीएआर ने जारी की कृषि एडवाइजरी

पटना। बिहार में जुलाई के पहले 15 दिन बीत जाने के बावजूद सामान्य से करीब 43 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज होने के कारण खरीफ फसलों पर संकट गहराने लगा है। इसे देखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के वैज्ञानिकों ने अल नीनो से उत्पन्न मौसमीय चुनौतियों से निपटने के लिए किसानों के लिए विस्तृत कृषि परामर्श जारी किया है।


वैज्ञानिकों के अनुसार, भारत मौसम विज्ञान विभाग ( आईएमडी) ने 18 से 20 जुलाई के बीच राज्य के कई हिस्सों में मध्यम से भारी वर्षा की संभावना जताई है। इस दौरान अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है, लेकिन पूरे जुलाई माह में बिहार के अधिकांश क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा और सामान्य से अधिक तापमान रहने का अनुमान है।


आईसीएआर ने किसानों को पानी की कमी वाले क्षेत्रों में धान के स्थान पर अरहर, मक्का और रागी जैसी वैकल्पिक फसलों को अपनाने की सलाह दी है। अरहर की उन्नत किस्मों के साथ मेड़-नाली पद्धति और मिश्रित खेती को प्रोत्साहित करने की सिफारिश की गई है। बुवाई से पहले बीजों का राइजोबियम, पीएसबी और ट्राइकोडरमा से उपचार करने की भी सलाह दी गई है।


धान की खेती करने वाले किसानों को लेजर लैंड लेवलर से खेत समतल करने, 18 से 25 दिन पुराने पौधों की रोपाई करने तथा पौधों की दूरी 15×15 सेंटीमीटर रखने की सलाह दी गई है। वैज्ञानिकों ने लगातार खेत में पानी भरकर रखने के बजाय ‘वैकल्पिक गिला और सूखा’ सिंचाई पद्धति अपनाने पर जोर दिया है, जिससे पानी की उल्लेखनीय बचत संभव है।


परामर्श में वर्षा जल संचयन, खेत की मजबूत मेड़बंदी, मल्चिंग, गोबर की खाद और वर्मीकंपोस्ट के उपयोग, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा सूखे के तनाव से उबरने के लिए 2 प्रतिशत यूरिया या एनपीके घोल के पर्णीय छिड़काव की भी सिफारिश की गई है। साथ ही धान में खरपतवार नियंत्रण के लिए समय पर पेंडिमेथालिन, प्रेटिलाक्लोर तथा बिस्पायरीबैक सोडियम के उपयोग की सलाह दी गई है।


वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि किसान इन वैज्ञानिक उपायों को अपनाते हैं तो अल नीनो के कारण होने वाले संभावित नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है और खरीफ फसलों की उत्पादकता सुरक्षित रखी जा सकती है।

Share
  • Related Posts

    “भौतिक सुख-सुविधाओं की दौड़ में खोता मानसिक सुकून”

    भौतिक सुख-सुविधाओं की अंधी दौड़, बढ़ती अपेक्षाएँ और सामाजिक दबाव किस तरह मानसिक सुकून को प्रभावित करते हैं, यह आलेख इसी विषय पर केंद्रित है। इसमें मानसिक शांति, आत्मसंतोष, तनाव…

    Share

    जिला स्तरीय कुश्ती में निहाल हुसैन बने विजेता, प्रमंडल प्रतियोगिता के लिए चयन

    डेहरी ऑन सोन (रोहतास)। शहर के कचौड़ी गली निवासी आजाद हुसैन के पुत्र और नारायण वर्ल्ड स्कूल, जमुहार के छात्र निहाल हुसैन ने जिला स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन…

    Share

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

    You Missed

    “भौतिक सुख-सुविधाओं की दौड़ में खोता मानसिक सुकून”

    “भौतिक सुख-सुविधाओं की दौड़ में खोता मानसिक सुकून”

    जिला स्तरीय कुश्ती में निहाल हुसैन बने विजेता, प्रमंडल प्रतियोगिता के लिए चयन

    जिला स्तरीय कुश्ती में निहाल हुसैन बने विजेता, प्रमंडल प्रतियोगिता के लिए चयन

    मौसम की चुनौती से निपटने को युवाओं को स्मार्ट कृषि का प्रशिक्षण, पटना में तीन दिवसीय कार्यक्रम शुरू

    मौसम की चुनौती से निपटने को युवाओं को स्मार्ट कृषि का प्रशिक्षण, पटना में तीन दिवसीय कार्यक्रम शुरू

    ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ के नारों से गूंजा डेहरी, महागठबंधन ने किया आक्रोश प्रदर्शन

    ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ के नारों से गूंजा डेहरी, महागठबंधन ने किया आक्रोश प्रदर्शन

    रोहतास के विकास को मिली रफ्तार, बाइपास से जाम से राहत; सोन का पानी और नई टाउनशिप की सौगात

    रोहतास के विकास को मिली रफ्तार, बाइपास से जाम से राहत; सोन का पानी और नई टाउनशिप की सौगात

    2030 तक आत्मनिर्भर बिहार का लक्ष्य, युवाओं को रोजगार के लिए बाहर जाने से रोकने पर जोर

    2030 तक आत्मनिर्भर बिहार का लक्ष्य, युवाओं को रोजगार के लिए बाहर जाने से रोकने पर जोर