
पटना-/ पिपराकोठी (पूर्वी चंपारण)। समेकित कृषि प्रणाली एवं फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर ( आईसीएआर -आरसीइआर), पटना एवं डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के संयुक्त तत्वावधान में कृषि विज्ञान केंद्र, पिपराकोठी में दो दिवसीय कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया, जिसका समापन समारोह रविवार को हुआ।
लघु एवं सीमांत कृषक कार्यशाला–सह–मात्स्यिकी, यांत्रिकी, बागवानी एवं पशु मेला के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में पूर्वी चंपारण जिले के लगभग 4000 किसानों ने भाग लिया, जिनमें अनुसूचित जाति के करीब 250 किसान शामिल थे।कार्यशाला का शुभारम्भ बिहार के माननीय उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया। उन्होंने किसानों से नई एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि आधुनिक और टिकाऊ खेती ही आय वृद्धि का सशक्त माध्यम है।

समापन समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर रहे। उन्होंने कृषि संस्थानों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से खेती को अधिक लाभकारी और स्थायी बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्वी चंपारण के सांसद राधा मोहन सिंह ने की। उन्होंने समेकित कृषि प्रणाली को समय की आवश्यकता बताते हुए पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन एवं जैविक खाद निर्माण को एकीकृत कर आय बढ़ाने पर जोर दिया।
इस अवसर पर किसानों के बीच पावर स्प्रेयर, नैपसैक स्प्रेयर, फावड़ा एवं वर्मी बेड जैसे कृषि आदानों का वितरण किया गया। आयोजन सचिव एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि फसल विविधीकरण जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने का प्रभावी उपाय है। तकनीकी सत्रों के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों एवं वैज्ञानिक विधियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।


