आईओटी तकनीक से होगी खेतों की निगरानी, कृषि अनुसंधान परिसर पटना में नई प्रणाली का शुभारंभ

पटना। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में बुधवार को स्वदेशी आईओटी (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) आधारित मृदा निगरानी प्रणाली का उद्घाटन किया गया। बीआईटी मेसरा के सहयोग से विकसित यह तकनीक स्मार्ट एवं जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने तथा जल प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

यह प्रणाली अनियमित वर्षा, भूजल स्तर में गिरावट, सिंचाई की बढ़ती लागत तथा जल के असंतुलित उपयोग जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखकर विकसित की गई है। पूर्वी भारत में छोटे एवं बिखरे हुए खेतों में मृदा नमी की वास्तविक समय जानकारी उपलब्ध नहीं होने के कारण अक्सर आवश्यकता से अधिक सिंचाई की जाती है, जिससे जल की बर्बादी और मृदा क्षरण जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।परियोजना के अंतर्गत विकसित लोरा वैन तकनीक आधारित मृदा नमी निगरानी प्रणाली खेतों से वास्तविक समय में आंकड़े उपलब्ध कराती है। इससे किसान आवश्यकता के अनुसार सिंचाई कर सकेंगे, जिससे जल संरक्षण, ऊर्जा लागत में कमी तथा सिंचाई दक्षता में वृद्धि होगी।

संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने इस पहल को “स्मार्ट फार्म” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि यह तकनीक कृषि उत्पादन प्रणाली को अधिक टिकाऊ, आधुनिक और संसाधन-कुशल बनाने में सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने किसानों के लिए किफायती और क्षेत्र विशेष के अनुरूप तकनीकों के विकास की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभाग के प्रमुख डॉ. आशुतोष उपाध्याय ने बताया कि यह प्रणाली मृदा नमी की वास्तविक समय निगरानी कर सिंचाई को आवश्यकता आधारित बनाएगी, जिससे जल उपयोग दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा। यह तकनीक आईसीएआर पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना और बीआईटी मेसरा, पटना परिसर के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत विकसित की गई है। वर्तमान में इसका फील्ड परीक्षण, कैलिब्रेशन एवं प्रदर्शन मूल्यांकन किया जा रहा है।

कार्यक्रम में 50 से अधिक वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और आईएआरआई पटना हब के छात्रों ने भाग लिया। इस अवसर पर “कृषि में आईओटी : आधुनिक कृषि की तरफ बढ़ते कदम” तथा “किसानों के लिए ड्रोन संचालन मार्गदर्शिका” नामक दो हिंदी पुस्तकों का भी विमोचन किया गया।विशेषज्ञों के अनुसार यह पहल पूर्वी भारत में स्मार्ट सिंचाई, कुशल जल प्रबंधन और जलवायु-सहिष्णु कृषि को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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