
डेहरी-ऑन-सोन (रोहतास)। पुत्र की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना से किया जाने वाला जीवित्पुत्रिका (जितिया) व्रत इस वर्ष 3 अक्टूबर, शनिवार को रखा जाएगा। आचार्य पं. लालमोहन शास्त्री के अनुसार बिहार और उत्तर प्रदेश के पंचांगों में 3 अक्टूबर को जितिया व्रत निर्धारित है। इस दिन माताएं अखंड उपवास रखेंगी।
उन्होंने बताया कि 2 अक्टूबर, शुक्रवार को नहाय-खाय होगा। सप्तमी तिथि शुक्रवार को मध्याह्न के बाद शुरू होगी। इसी दिन शेष रात्रि में करीब 4 बजे ओठगन देने की परंपरा है। इसके बाद व्रती अल्पाहार (सरगही) और जल ग्रहण कर सकती हैं।
3 अक्टूबर को प्रातः 9:53 बजे के बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी, जो 4 अक्टूबर को सुबह तक रहेगी। इस दौरान अखंड उपवास किया जाएगा। 4 अक्टूबर, रविवार को सुबह 7:37 बजे के बाद नवमी के प्रथम चरण में पारण करने की परंपरा बताई गई है।
आचार्य शास्त्री ने बताया कि जितिया के संबंध में सप्तमी-अष्टमी के संयोग को लेकर पंचांग और परंपरा में विचार किया जाता है। मिथिला में ओठगन तथा दाउदनगर क्षेत्र में पारण का विशेष महत्व माना जाता है। पारण के संबंध में सूर्योदय के बाद तथा नवमी तिथि के प्रथम चरण में पारण करने की परंपरा प्रचलित है। इस वर्ष नवमी क्षय तिथि होने के कारण पारण का समय विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है।





