कृषि अनुसंधान परिसर, पटना में सतत् कृषि पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित

  • संतुलित एवं पर्यावरण-अनुकूल पोषक तत्व प्रबंधन पर किसानों को दी गई व्यवहारिक जानकारी

पटना। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में गुरुवार को “सतत् कृषि हेतु संतुलित एवं पर्यावरण-अनुकूल पोषक तत्व प्रबंधन” विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य किसानों के बीच संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा समेकित पोषक तत्व प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. संजीव चौरसिया ने कहा कि “मिट्टी हमारी माँ है” और इसका संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य को सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने किसानों से जैविक एवं हरित खाद के उपयोग, मृदा परीक्षण आधारित खेती तथा संतुलित उर्वरकों के प्रयोग को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास जताया कि टिकाऊ कृषि तकनीकें “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने कहा कि वर्तमान समय में कृषि में समेकित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाना अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने किसानों को नियमित मृदा परीक्षण कराने तथा जैविक खाद, हरित खाद, वर्मी कम्पोस्ट एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों के समुचित उपयोग पर जोर दिया।

कार्यक्रम के आयोजन सचिव एवं फसल अनुसंधान प्रभाग के प्रमुख डॉ. संजीव कुमार ने उर्वरक उपयोग के “4आर सिद्धांत” — सही स्रोत, सही मात्रा, सही समय और सही स्थान — की जानकारी देते हुए कहा कि समेकित पोषक तत्त्व प्रबंधन से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम की जा सकती है तथा उत्पादन लागत घटाने के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।

इस अवसर पर डॉ. बिकास दास, डॉ. राघवेंद्र सिंह, डॉ. मो. मोनोबुल्लाह, डॉ. के. एम. सिंह तथा डॉ. शिव प्रताप सिंह ने भी संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और टिकाऊ कृषि प्रणाली पर अपने विचार साझा किए।

विशेषज्ञों ने बताया कि अत्यधिक डीएपी एवं रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है। किसानों को मृदा परीक्षण आधारित खेती अपनाने, जैव उर्वरकों के उपयोग तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की सलाह दी गई।

कार्यशाला में पटना, बक्सर एवं पूर्णिया से आए किसानों ने उर्वरकों की बढ़ती कीमत, गुणवत्तायुक्त जैविक खाद की सीमित उपलब्धता तथा जानकारी के अभाव में असंतुलित उर्वरक उपयोग जैसी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। किसानों ने कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों से उन्हें व्यवहारिक जानकारी प्राप्त होती है, जिससे खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है।

तकनीकी सत्र में वैज्ञानिकों ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड, लीफ कलर चार्ट, संतुलित एनपीके अनुप्रयोग एवं जैविक संसाधनों के उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान किसानों के बीच ढैंचा बीज का वितरण किया गया तथा प्रक्षेत्र भ्रमण के माध्यम से व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। कार्यशाला में लगभग 100 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

Share
  • Related Posts

    सासाराम की ऐतिहासिक धरती गुरु वाणी से गूंजी, श्री गुरु ग्रंथ साहिब का 422वां प्रथम प्रकाश उत्सव मनाया गया

    सासाराम (रोहतास)। शहर की ऐतिहासिक धरती एक बार फिर गुरु वाणी से गूंज उठी। ऐतिहासिक गुरुद्वारा चाचा फग्गुमल साहिब जी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 422वें प्रथम प्रकाश…

    Share

    हिंदी दिवस पर कविता पाठ के साथ हिंदी की उपलब्धि और चुनौतियों पर चर्चा

    डेहरी-ऑन-सोन (रोहतास)। नगर के कवियों, साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने हिंदी दिवस के अवसर पर ज़क्की बिगहा स्थित लाइट रेलवे कॉलोनी में डॉ. प्रदीप दुबे के आवास पर साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित…

    Share

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

    You Missed

    सासाराम की ऐतिहासिक धरती गुरु वाणी से गूंजी, श्री गुरु ग्रंथ साहिब का 422वां प्रथम प्रकाश उत्सव मनाया गया

    सासाराम की ऐतिहासिक धरती गुरु वाणी से गूंजी, श्री गुरु ग्रंथ साहिब का 422वां प्रथम प्रकाश उत्सव मनाया गया

    हिंदी दिवस पर कविता पाठ के साथ हिंदी की उपलब्धि और चुनौतियों पर चर्चा

    हिंदी दिवस पर कविता पाठ के साथ हिंदी की उपलब्धि और चुनौतियों पर चर्चा

    केंद्रीय विद्यालय सासाराम में हिंदी दिवस पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन

    केंद्रीय विद्यालय सासाराम में हिंदी दिवस पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन

    Weekly E_paper

    कैनवास छोड़ा, पत्तल चुनी; मधुरेंद्र ने उकेरी ब्रिक्स की तस्वीर

    कैनवास छोड़ा, पत्तल चुनी; मधुरेंद्र ने उकेरी ब्रिक्स की तस्वीर

    रबी योजना-2026 को लेकर कृषि वैज्ञानिकों और किसानों का संवाद, समय पर खेती पर जोर

    रबी योजना-2026 को लेकर कृषि वैज्ञानिकों और किसानों का संवाद, समय पर खेती पर जोर