पटना। शिवराज सिंह चौहान ने बिहार के लीची किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए बड़ा कदम उठाया है। लीची स्टिंग बग के कारण फसलों को हो रहे भारी नुकसान की शिकायत मिलने के बाद केंद्रीय मंत्री के निर्देश पर तत्काल एक विशेषज्ञ कार्यबल (टास्क फोर्स) का गठन किया गया है, जो प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर समाधान संबंधी रिपोर्ट तैयार करेगा।
गुरुवार को केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ में आयोजित कृषक संवाद कार्यक्रम के दौरान किसानों ने लीची स्टिंग बग से फसल को हो रहे नुकसान का मुद्दा उठाया था। किसानों की समस्या सुनने के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री ने तुरंत संज्ञान लेते हुए विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश दिया।भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र द्वारा जारी आदेश के अनुसार गठित यह टास्क फोर्स बिहार के प्रभावित लीची उत्पादक क्षेत्रों का दौरा करेगी और फसल क्षति का वैज्ञानिक अध्ययन करेगी। समिति किसानों को राहत पहुंचाने के लिए तात्कालिक एवं दीर्घकालिक उपाय भी सुझाएगी।
विशेषज्ञ कार्यबल में विभिन्न कृषि एवं बागवानी संस्थानों के वैज्ञानिकों और अधिकारियों को शामिल किया गया है। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर के निदेशक को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा बिहार सरकार के उद्यान निदेशालय, पौधा संरक्षण विभाग, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, एकीकृत बागवानी विकास मिशन तथा अन्य अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञों को भी इसमें शामिल किया गया है।
कार्यबल में डॉ. जयपाल सिंह चौधरी, डॉ. एम. सम्पत कुमार, डॉ. इप्सिता सामल तथा डॉ. विनोद कुमार जैसे विशेषज्ञ भी शामिल हैं।
आदेश के अनुसार, समिति बिहार के लीची उत्पादक जिलों के प्रभावित प्रखंडों का जल्द दौरा करेगी और एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को सौंपेगी, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।किसानों का मानना है कि यह निर्णय लीची उत्पादकों के लिए राहत और भरोसे का संदेश है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय पर वैज्ञानिक सलाह और नियंत्रण उपाय लागू किए जाएं, तो लीची स्टिंग बग से होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।





