कृषि अनुसंधान परिसर, पटना में एक दिवसीय सहभागी बीज उत्पादन कार्यशाला आयोजित

  • छह जिलों से आए किसानों व प्रसार कर्मियों ने लिया प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण बीज पर दिया गया जोर

पटना -कार्यालय प्रतिनिधि। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में मंगलवार को एक दिवसीय सहभागी बीज उत्पादन कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का प्रायोजन बामेती, पटना द्वारा किया गया। कार्यक्रम में बिहार के गया, पटना, वैशाली, नालंदा, भोजपुर एवं जहानाबाद जिलों से आए किसानों एवं प्रसार कर्मियों सहित कुल 24 प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता की।

कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ हुआ। इसके पश्चात दीप प्रज्वलन एवं आईसीएआर गीत का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने की। उन्होंने कृषि में गुणवत्तापूर्ण बीज की निर्णायक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए सहभागी बीज उत्पादन को बीज प्रणाली को सुदृढ़ करने का प्रभावी माध्यम बताया। साथ ही, उन्होंने किसानों को समय पर प्रमाणिक एवं उच्च गुणवत्ता वाला बीज उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे फसल उत्पादन एवं किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित हो सके। उन्होंने किसानों से संस्थान के तकनीकी सहयोग से बीज उत्पादन को अपनाने का आह्वान किया।

इससे पूर्व कार्यक्रम के आयोजन सचिव एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संतोष कुमार ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्यों एवं विषयवस्तु की जानकारी दी। उन्होंने बीज उत्पादन में सहभागी दृष्टिकोण को किसानों के लिए लाभकारी बताया।कार्यशाला में विभिन्न विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। डॉ. आशुतोष उपाध्याय, प्रभागाध्यक्ष (भूमि एवं जल प्रबंधन) ने गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन के लिए प्रभावी भूमि एवं जल प्रबंधन को आवश्यक बताया। वहीं डॉ. संजीव कुमार, प्रभागाध्यक्ष (फसल अनुसंधान) ने “आत्मनिर्भर किसान” की अवधारणा पर जोर देते हुए सतत कृषि एवं उत्पादकता वृद्धि के लिए उच्च गुणवत्ता वाले बीज की अनिवार्यता बताई।

डॉ. उज्ज्वल कुमार, प्रभागाध्यक्ष (सामाजिक-आर्थिक एवं प्रसार) ने बीज विपणन एवं प्रभावी वितरण प्रणाली के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता से किसान उन्नत कृषि तकनीकों को आसानी से अपना सकते हैं।

कार्यशाला का समापन संवादात्मक चर्चा एवं प्रक्षेत्र भ्रमण के साथ हुआ, जिससे प्रतिभागियों की सहभागी बीज उत्पादन प्रक्रिया एवं कृषि विकास में इसकी भूमिका को लेकर समझ और अधिक सुदृढ़ हुई।

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