
पटना/ कोइलवर (भोजपुर)। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना तथा कृषि विज्ञान केंद्र, भोजपुर के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को कोइलवर प्रखंड के कुल्हरजी एवं कुलहटिया गांवों में “खेत बचाओ अभियान” का सफल आयोजन किया गया। अभियान का उद्देश्य किसानों की कृषि संबंधी समस्याओं को समझना, उन्हें वैज्ञानिक परामर्श प्रदान करना तथा सतत एवं लाभकारी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना था।
अभियान के दौरान आईसीएआर-आरसीईआर, पटना के वैज्ञानिक डॉ. कमल शर्मा एवं डॉ. ए. डे तथा कृषि विज्ञान केंद्र, भोजपुर के उद्यानिकी विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह ने किसानों के साथ संवाद स्थापित किया। वैज्ञानिकों ने कुल्हरजी गांव के 34 तथा कुलहटिया गांव के 51 किसानों से मिलकर उनकी कृषि संबंधी समस्याओं, चुनौतियों और आवश्यकताओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
किसानों ने फसलों में बढ़ते कीट एवं रोग प्रकोप, कृषि आदानों की समय पर उपलब्धता तथा सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। किसानों ने कृषि उत्पादन को प्रभावित करने वाली इन चुनौतियों के समाधान हेतु वैज्ञानिक एवं संस्थागत सहयोग की आवश्यकता जताई।
वैज्ञानिकों ने किसानों को हरी खाद, वर्मीकम्पोस्ट एवं अन्य जैविक स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा देने की सलाह दी। साथ ही यूरिया के अत्यधिक प्रयोग से बचने तथा संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। उन्होंने बताया कि जैविक संसाधनों के उपयोग से खेती की लागत कम होती है, मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और कृषि अधिक टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल बनती है।
इस अवसर पर किसानों को आधुनिक कृषि नवाचारों, उन्नत तकनीकों एवं वैज्ञानिक खेती पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। वैज्ञानिकों ने आश्वस्त किया कि कृषि आदानों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए संबंधित विभागों एवं बैंकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।
विशेषज्ञों ने कहा कि “खेत बचाओ अभियान” किसानों की समस्याओं को जमीनी स्तर पर समझने, उनके समाधान के लिए वैज्ञानिक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने तथा कृषि क्षेत्र में सतत, समावेशी और किसान-केंद्रित विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।





