बिहार का अकेला शहर: दाउदनगर, जहां दिखते हैं लोकयान के सभी आयाम

दाउदनगर -(औरंगाबाद) उपेंद्र कश्यप। देश के हिंदी पट्टी का प्रख्यात पर्व जिउतिया बिहार के औरंगाबाद जिले के दाउदनगर में अनूठे लोक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह प्रदेश का अकेला शहर है जहां तीन दिनों तक लोकयान के सभी तत्व—लोक साहित्य, लोक व्यवहार, लोक कला और लोक विज्ञान—एक साथ जीवंत हो उठते हैं।

माता द्वारा सन्तान के दीर्घायु होने की कामना के लिए किया जाने वाला प्रख्यात पर्व है जिउतिया। आश्विन मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी को मनाए जाने वाले इस व्रत का दाउदनगर में अद्भुत रूप देखने को मिलता है। ऐसी प्रस्तुतियां आपको अन्यत्र किसी शहर में नहीं मिलेंगे। संयुक्त बिहार की प्रतिनिधि संस्कृति थी छऊ नृत्य। झारखंड विभाजन के बाद बिहार को प्रतिनिधि संस्कृति की तलाश है, जिसे छठ व्रत तक जाकर पूरी मान ली जाती है। लेकिन लोक संस्कृति के जो सभी तत्व हैं, अगर वह कहीं एक साथ, किसी एक शहर में, किसी एक आयोजन में लगातार तीन दिन तक देखने को उपलब्ध होता है तो उसका नाम है दाउदनगर का जिउतिया लोकोत्सव। जिउतिया प्रत्येक वर्ष आश्विन कृष्ण पक्ष अष्टमी को मनाया जाता है। लेकिन दाउदनगर में कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि अर्थात नहाए खाए, व्रत और फिर पारण यानी लगातार तीन दिन तक यह अपने चरम पर होता है।

हालांकि पूर्व में आश्विन कृष्ण पक्ष की पहली तिथि अर्थात अनंत चतुर्दशी के दूसरे दिन से कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि तक निरन्तर नौ दिन तक यहां लोक उत्सव मनता था। लोक संस्कृति के सभी आयामों के प्रदर्शन हुआ करते थे। जो सिमट कर अब तीन दिन की सीमा में बंध गए हैं। इस दौरान पूरा शहर बौराया हुआ सा लगता है। लगता है जैसे पूरा शहर ही लोक संस्कृति का प्रस्तोता बन गया है। महत्वपूर्ण है कि लोकयान के जो चार प्रमुख तत्व हैं- लोक साहित्य, लोक व्यवहार, लोक कला और लोक विज्ञान इन सभी की प्रचुरता में यहां प्रस्तुति होती है। जिसे देखने दूर दराज से लोग आते हैं। कहते हैं कि कोई घर ऐसा नहीं जहां कोई एक अतिथि इसे देखने ना आता रहा हो इस शहर में।

जिस जीमूतवाहन की पूजा करते हैं वास्तव में वे राजा थे। उनके पिता शालीवाहन हैं और माता शैब्या। सूर्यवंशीय राजा शालीवाहन ने ही शक संवत चलाया था। इसका प्रयोग आज भी ज्योतिष शास्त्री करते हैं। इस्वी सन के प्रथम शताब्दी में 78 वें वर्ष में वे राज सिंहासन पर बैठे थे। वे समुद्र तटीय संयुक्त प्रांत (उडीसा) के राजा थे। उसी समय उनके पुत्र जीमूतवाहन की पत्नी से भगवान जगन्नाथ जी एवं इनके वाहन गरुण से आशीर्वाद स्वरुप जीवित्पुत्रिका की उत्पत्ति हुई। इसी का धारण महिलायें अपने गले में करती हैं।

Share
  • Related Posts

    डब्ल्यूजेएआई ने झारखंड प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा की

    पटना/रांची। वेब जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (डब्ल्यूजेएआई) के संगठनात्मक विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए झारखंड प्रदेश की नई कार्यकारिणी की घोषणा कर दी गई है। संगठन…

    Share

    करोड़ों के लिए कौड़ियों की लड़ाई

    अभी मीडिया बनाम कोचिंग विवाद थमा भी नहीं था कि पटना में कोचिंग संस्थानों का आपसी द्वंद्व सामने आ गया। यह वही पटना है, जिसे लंबे समय तक कोचिंग का…

    Share

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

    You Missed

    डब्ल्यूजेएआई ने झारखंड प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा की

    करोड़ों के लिए कौड़ियों की लड़ाई

    डब्ल्यूजेएआई बिहार प्रदेश कार्यकारिणी का गठन, अक्षय आनंद बने अध्यक्ष, सागर कुमार महासचिव

    डब्ल्यूजेएआई बिहार प्रदेश कार्यकारिणी का गठन, अक्षय आनंद बने अध्यक्ष, सागर कुमार महासचिव

    मधुरेंद्र कुमार को AIU हॉलीवुड ने दी मानद डॉक्टरेट, रेत कला को मिला वैश्विक सम्मान

    मधुरेंद्र कुमार को AIU हॉलीवुड ने दी मानद डॉक्टरेट, रेत कला को मिला वैश्विक सम्मान

    weekly_Epaper

    weekly_Epaper

    नई आशा का नशा मुक्ति अभियान: आरा में जागरूकता कार्यक्रम, बच्चों की शिक्षा पर जोर

    नई आशा का नशा मुक्ति अभियान: आरा में जागरूकता कार्यक्रम, बच्चों की शिक्षा पर जोर