उर्दू भाषा की मिठास और गंगा-जमुनी तहजीब ने बढ़ाया सांस्कृतिक महत्व


सासाराम (रोहतास)। उर्दू भाषा अपनी मिठास, गंगा-जमुनी तहजीब, समृद्ध साहित्य और गहरी भावनात्मक अभिव्यक्ति के कारण ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। ये बातें उप विकास आयुक्त आकांक्षा आनंद ने बुधवार को उर्दूभाषी विद्यार्थी प्रोत्साहन राज्य योजना 2025-26 के तहत जिला उर्दू भाषा कोषांग द्वारा आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता के उद्घाटन के दौरान कहीं।


उन्होंने कहा कि उर्दू केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सामाजिक सौहार्द की समृद्ध विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सासाराम की अनुमंडल पदाधिकारी प्रिया रानी ने कहा कि उर्दू भाषा में संवेदनाओं, भावनाओं और विचारों को शालीनता, पारदर्शिता और खूबसूरती के साथ व्यक्त करने की अद्भुत क्षमता है।


विशिष्ट अतिथि सामाजिक सुरक्षा के निदेशक निजू कुमार राम तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के उप निदेशक किशोर आनंद ने भी उर्दू भाषा के महत्व पर अपने विचार रखे।


प्रतियोगिता में जिले के विभिन्न महाविद्यालयों के 15, इंटरस्तरीय विद्यालयों के 15 तथा उच्च विद्यालयों के 23 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। जिला उर्दू भाषा कोषांग के प्रभारी पदाधिकारी इजहार आलम ने बताया कि स्नातक, इंटर एवं मैट्रिक स्तर के प्रतिभागियों के लिए उर्दू भाषा से संबंधित अलग-अलग विषय निर्धारित किए गए थे। प्रतिभागियों ने उर्दू भाषा की महत्ता और उपयोगिता पर प्रभावशाली ढंग से अपने विचार प्रस्तुत किए।
प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में शेरशाह कॉलेज के उर्दू विभाग के व्याख्याता डॉ. नदीम, रोहतास महिला कॉलेज के डॉ. शमशेर आलम, नेहरू कॉलेज, डेहरी के डॉ. इख्तियार अहमद अंसारी, उच्च माध्यमिक विद्यालय, लहेरी, कोचस की डॉ. तब्बसुम निगार तथा सीनियर सेकेंडरी विद्यालय, बिक्रमगंज के डॉ. रजा खान शामिल रहे।
इस अवसर पर जिला उर्दू भाषा कोषांग की ओर से प्रकाशित पत्रिका एवं मोमेंटो आगत अतिथियों को भेंट किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में कोषांगकर्मी मोहन कुमार कर्ण एवं मो. शाकिब आलम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संचालन जमशेद आलम ने किया।

  • रिपोर्ट, तस्वीर : टिपु सुलतान
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