हम सभी को अपनी जीवन शैली में सुधार कर के बच्चों एवं वृद्ध व्यक्ति को दिव्यांगता से बचाव के निरंतर प्रयास करना चाहिए : गोपाल नारायण सिंह

डेहरी-आन-सोन  (रोहतास) विशेष संवाददाता।

हमारी व्यस्त जीवन शैली के कारण बच्चों एवं वृद्धजनों में विकसित हो रही दिव्यांगता एक गंभीर समस्या उत्पन्न कर रही है तथा इसके रोक थाम के लिए हम सभी को सामूहिक प्रयास करना चाहिए, यह बात आज जमुहार स्थित नारायण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के सभागार में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांगता दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के कुलाधिपति पूर्व सांसद गोपाल नारायण सिंह ने अपने शुभकामना सन्देश में कही। उन्होंने बताया कि माता-पिता के व्यस्ततम दिनचर्या के कारण उनके बच्चे एकाकी जीवन जीने को मजबूर होते हैं जिसके परिणामस्वरूप बच्चे या तो मोबाइल-टेलीविज़न देखते रहते हैं या फिर घर में अकेले किसी देख भाल सहायक पर आश्रित होते हैं जिससे बच्चे उपेक्षित हो जातें है। इसके कारण बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास में देरी और बाधा होने की संभावना बढ़ जाती है साथ ही बच्चों का सामाजिकरण भी ठीक से नहीं हो पाता है। अपने सन्देश में उन्होंने कहा कि वृद्धजनों की देख भाल हेतु हमें हमेशा सजग रहना चाहिए ताकि उनका स्वास्थ्य और शारीरिक गतिविधि बेहतर हो सके, उन्हें किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचाव के भी उपाए करने चाहिए। उन्होंने आमजनों से अपील किया कि बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए उनमे जीवन कौशल एवं सामाजिक कौशल विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए साथ ही अपने घर के बुजुर्गों की देख भाल में प्राथमिकता देनी चाहिए।

उक्त कार्यक्रम में अपने संबोधन में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. महेद्र कुमार सिंह ने बताया कि नारायण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल द्वारा संचालित नारायण केयर बाल पुनर्वास केंद्र के माध्यम से विशेष चुनौतियों का सामना कर रहे बच्चों के पुनर्वास एवं विशेष शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण सेवा प्रदान के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है तथा हमारा मुख्य उदेश्य है कि व्यापक पुनर्वास सेवाओं के माध्यम से बच्चों को उनकी पूर्ण क्षमता तक पहुंचने के लिए सशक्त बनाया जाए।

इस अवसर पर बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी के ऑक्यूपेशनल थेरेपी विभाग की अकादमिक प्रभारी डॉ. जया दीक्षित ने वृद्धजनों की जीवन शैली में छोटे छोटे प्रयास करके उन्हें दिव्यांग होने से किस प्रकार से बचाया जा सकता है इस सम्बन्ध में अपनी प्रस्तुति दी। अपने प्रस्तुति के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य, खान-पान, शारीरिक गतिविधि और सामाजिक मेल-जोल को बढ़ावा देने पर विस्तृत जानकारी दी। अपनी प्रस्तुति के दौरान शोर्या फाउंडेशन, वाराणसी के वरिष्ट ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट डॉ. अनिमेष कुमार ने बताया कि बच्चों में कुछ असामान्य आदतों के कारण मानसिक और शारीरिक विकास में बाधा की गंभीर समस्या विकसित हो रही है जो भविष्य में बच्चों को मानसिक दिव्यांगता के रूप में परिलक्षित होने लगती है। उन्होंने इसके मुख्य कारण बच्चों का अकेलापन, मोबाइल-टी वी देखने की आदत, माता-पिता की व्यस्तता के कारण बच्चों को सही से समय नहीं दे पाना एवं सामाजिकरण का अभाव मुख्य कारण है। उन्होंने छोटे-छोटे टिप्स के माध्यम से इसके बचाव एवं सुधार की जानकारी दी।

कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. जगदीश सिंह, कुलसचिव डॉ. धर्मेश श्रीवास्तव, प्रबंध निदेशक त्रिविक्रम सिंह, नारायण वर्ल्ड स्कूल की निदेशक मोनिका सिंह, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पुनीत कुमार सिंह, नारायण पारामेडिकल एवं अलाइड साइंस के निदेशक डॉ. यतीन्द्र मोहन सिंह तथा अस्पताल के महाप्रबंधक उपेन्द्र कुमार सिंह ने भी अपने-अपने विचार रखे। इस अवसर पर नारायण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के मेडिकल विभाग एवं पैरामेडिकल-अलाइड साइंस विभाग के चिकित्सकगण, शिक्षकगण, बाल पुनर्वास केंद्र के पुनर्वास विशेषज्ञगण तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

कार्यक्रम के अंत में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 अंतर्गत चिन्हित 21प्रकार की दिव्यांगताओं से प्रभावित लोगों द्वारा प्रस्तुत रास्ट्रीय गान का वीडियो प्रसारित किया गया। इस वीडियो के प्रसारण के दौरान सभी गणमान्य लोगों एवं प्रतिभागियों द्वारा भी साथ-साथ रास्ट्रीय गान गाया गया। धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।

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