जीएनएसयू में “लैंगिक संवेदीकरण एवं समाज निर्माण में इसकी भूमिका” विषयक कार्यशाला आयोजित

डेहरी-आन-सोन (रोहतास)-कार्यालय संवाददाता। गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के देव मंगल सभागार में “लैंगिक संवेदीकरण एवं समाज निर्माण में इसकी भूमिका” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारत के राष्ट्रपति सचिवालय की निदेशक एवं विशेष कार्य पदाधिकारी स्वाति शाही मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।

अपने संबोधन में श्रीमती शाही ने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि हमेशा ऊंचे उद्देश्य रखें और स्वयं पर विश्वास करें। उन्होंने भारतीय संस्कृति के प्राचीन मूल्यों और जीवन शैली पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारत में महिलाओं को अनादिकाल से सम्मान की दृष्टि से देखा जाता रहा है। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि सफलता पाने के लिए लगनशील होना जरूरी है और हमें दूसरों की नकारात्मक बातों पर ध्यान न देकर अभिभावकों और शुभचिंतकों के आशीर्वाद तथा अपनी ताकत पर विश्वास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों की बराबरी कर रही हैं और समाज में सकारात्मक वातावरण तेजी से बन रहा है। उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया कि वे अपने साथ-साथ समाज के विकास को भी प्राथमिकता दें क्योंकि राष्ट्र का विकास तभी संभव है जब महिलाएं समाज निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति गोपाल नारायण सिंह ने कहा कि भारत हमेशा से महिलाओं का सम्मान करता आया है और यह परंपरा आगे भी बनी रहनी चाहिए। उन्होंने श्रीमती शाही का स्वागत करते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) महेंद्र कुमार सिंह और प्रतिकुलपति प्रो. (डॉ.) जगदीश सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। आईसीसी की अध्यक्ष डॉ. श्वेता शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया और कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राध्यापक दीपाली ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉ. कुमार आलोक प्रताप, परीक्षा नियंत्रक सुदीप कुमार सिंह, सहायक कुल सचिव मिथिलेश कुमार सिंह, डॉ. संगीता कुमारी, प्रबंधन समिति की सदस्य डॉ. मोनिका सिंह और निरुपमा सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति, विभिन्न संकायों के अध्यक्ष, निदेशक, शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

(रिपोर्ट, तस्वीर : भूपेंद्रनारायण सिंह, पीआरओ, जीएनएसयू)

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