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सोन अंचल : रोहतास और औरंगाबद में शिक्षक दिवस समारोह / पटना में नेपाली स्मृति काव्योत्सव

भूतपूर्व राष्ट्रपति और राष्ट्रीय दार्शनिक प्राध्यापक एसएस राधाकृष्णन की स्मृति में उनका जन्मदिन देश भर के शिक्षण संस्थानों में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया गया गया। इस अवसर पर सोन नद अंचल के जिलों रोहतास और औरंगाबाद के स्कूलों में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, शिक्षकों को विद्यार्थियों ने उपहार भेंट किए। सासाराम में दक्षिण बिहार के सबसे बड़े विद्यालय संतपाल सीनियर सेकेेंड्री स्कूल और दाउदनगर के विवेकानंद मिशन स्कूल में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम किए गए। जबकि डेहरी-आन-सोन में सनबीम पब्लिक स्कूल, नोखा (रोहतास) में सिद्धेश्वर कालेज आफ टीचर्स एजुकेशन, दाउदनगर मेें विद्या निकेतन, ज्ञान ज्योति शिक्षण केन्द्र, बीएड कालेज, बारून में पैरामाउंट पब्लिक स्कूल और मोहनिया (कैमूर) में नवदीप अकादमी में भी शिक्षक दिवस मनाया गया।

विद्यार्थियों के साथ अपना ज्ञान और अनुभव साझा करते हैं शिक्षक

सासाराम (रोहतास)-सोनमाटी संवाददाता। शिक्षक-शिक्षिकाओं पर फूलों की वर्षा कर, आरती उतार माथे पर तिलक लगाकर संतपाल स्कूल के सभागार में शिक्षक दिवस मनाया गया। विद्यालय के ट्रस्टी राहुल वर्मा, प्राचार्य आराधना वर्मा द्वारा राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। राहुल वर्मा ने संबोधन में कहा कि शिक्षक अपना ज्ञान और अनुभव विद्यार्थियों को उनके जीवन में अमल करने लिए हस्तांतरित करता है। इस अवसर 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों ने सरस, आकर्षक, मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया, जिसमें वंदना नृत्य पूनम, अयाना सिंह ने, भ्रूण हत्या पर रीया, मानसी, सोनी ने नृत्य नाटिका, भाव नृत्य आदित्य, आर्यन, अर्चना, प्रीति, सारिका, नंदिनी, ज्योति, सोनम, एंजल, अमन प्रताप ने प्रस्तुत किया।
(रिपोर्ट, तस्वीर : अर्जुन कुमार, मीडिया प्रभारी)

अटल इनोवेशन मिशन के तहत चुने गए दो स्कूल

दाउदनगर (औरंगाबाद)-विशेष संवाददाता। विवेकानंद मिशन स्कूल परिसर में शिक्षक दिवस पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ पुलिस निरीक्षक शम्भू प्रसाद, विवेकानंद मिशन स्कूल के निदेशक डा. शम्भूशरण सिंह, प्रबंधक सुनील कुमार सिंह, लेखक-पत्रकार उपेन्द्र कश्यप सामूहिक रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद स्वामी विवेकानन्द और राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण किया गया, केक काटा गया। कार्यक्रम को पुलिस निरीक्षक शंभू प्रसाद, अनुमंडल कृषि पदाधिकारी अनिल चौधरी, भाजपा नेता अश्विनी तिवारी ने संबोधित किया। डा. शंभूशरण सिंह ने अपने संबोधन में बताया कि विवेकानंद मिशन स्कूल और विवेकानंद आइडियल पब्लिक स्कूल का चयन अटल इनोवेशन मिशन के तहत टिंकरिंग लैब के लिए किया गया है। स्मार्ट क्लास, डिजिटल क्लास का कान्सेप्ट गांवों तक पहुंचने वाले कान्सपेट का लाभ उठाए जाने की दिशा में कदम उठाया जाना चाहिए। उन्होंने कक्षा नौ की छात्रा विट्टू रानी और कक्षा सात की छात्रा काजल कुमारी को नि:शुल्क शिक्षा देने की घोषणा की। गोविंदा राज और मनोज मुस्कान के निर्देशन में छात्र-छात्राओं ने इस अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। छात्र दिव्यांशु कुमार, अरमान अशोक, अंकित कुमार, मनीष कुमार, कृष कुमार ने कार्यक्रम का संचालन किया।

शिक्षा सामाजिक बदलाव में सहायक : डा. अजय

उधर, हमारे विशेष प्रतिनिधि के अनुसार, शिक्षक दिवस के अवसर पर भगवान प्रसाद शिवनाथ प्रसाद बीएड कालेज में प्राचार्य डा. अजय कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति को समर्थ बनाने, सामाजिक बदलाव के लिए मार्ग-प्रशस्त करने के साथ मानवीय मूल्यों के विकास में सहायक होती है। इसमें शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। व्याख्याता डा. अमित कुमार ने कहा कि शिक्षकों को सम्मान दिवस विशेष पर ही नहीं मिलना चाहिए, बल्कि समाज में यह स्थिति हमेशा बनी रहनी चाहिए। बेशक इसके लिए शिक्षकों की ओर से भी निरंतर समुचित प्रयास की दरकार है। व्याख्याता पंकज कुमार ने कहा, सामाजिक मूल्यों में क्षरण के कारण शिक्षकों का सम्मान औसत तौर पर कम हुआ है, मगर सच यही है कि शिक्षक देश-समाज के भविष्य के निर्माता हैं। शिक्षक दिवस पर केक काटने के आयोजन के मौके पर कालेज के स्टाफ परिवार के रामचंद्र यादव, अनूप कनौजिया, अखिलेश सिंघल, राजकुमार यादव, निशांत कुमार, विकास कुमार, संजय शर्मा आदि मौजूद थे।
(रिपोर्ट, तस्वीर : उपेन्द्र कश्यप, निशांत कुमार राज)

हम तो कवि हैं, इतिहास बदलने वाले हैं…

पटना (सोनमाटी प्रतिनिधि)। साहित्य परिक्रमा, भारतीय युवा साहित्यकार परिषद और राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक मंच के संयुक्त तत्वावधान में संयोजित गोपाल सिंह नेपाली स्मृति काव्योत्सव में अध्यक्षीय उद्बोधन में वरिष्ठ साहित्यकार भगवती प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि जनप्रिय कविवर गोपाल सिंह नेपाली के इस काव्य आह्वान को कौन भूला सकता है- हम कलम चलाकर त्रास बदलने वाले हैं, हम तो कवि हैं इतिहास बदलने वाले हैं! कवि गोष्ठी का संचालन करते हुए कवि-कथाकार सिद्धेश्वर ने कहा कि जब कविगण छायावाद के रेस में दौड़ लगा रहे थे, तब राष्ट्रचेतना के प्रखर कवि गोपाल सिंह नेपाली यथार्थ की जमीन पर विचारशील कविता का बीज बो रहे थे। बतौर मुख्य अतिथि नेपाली जी के आवास के नजदीक रहने वाले हिन्दी-भोजपुरी के यशस्वी कवि डा. गोरख प्रसाद मस्ताना ने कहा कि नेपाली ने फिल्मों में गीत लिखकर धन तो कमाया, मगर फिल्म निर्माण के जोश में अधिक धन गंवा दिया। काव्योत्सव में राजधानी पटना के अनेक प्रतिनिधि कवियों ने हिस्सा लिया। गोष्ठी के संयोजक विश्वनाथ वर्मा ने अंत में धन्यावाद ज्ञापन किया।
गोष्ठी में पढ़ी गई कुछ रचनाएं इस प्रकार थीं। कवि घनश्याम : गुलशन-गुलशन खार दिखाई देता है, मौसम कुछ बीमार दिखाई देता है! जाने कैसी हवा चली है जहरीली, जीना अब दुश्वार दिखाई देता है!
डा. निखिलेश्वर प्रसाद वर्मा : तुम तो बस प्यादे थे, पांव तुम्हारा था, कंधे तुम्हारे थे, शह और मात की चाल हमारी थी, तुम तो बसए जमूरे थे!
सिद्धेश्वर : मंजिल तो थी मगर रास्ता न था, जिंदगी को मुझसे कोई वास्ता न था, जीने की दुआएं किनसे मांगती मैं, मेरे लिए कोई भी खुदा न था!
मधुरेश शरण : दूसरा जन्म हो साईं मुझे मानव नही बनाना, पेड़-पौधा पशु-पक्षी चाहे जो भी बनाना…।
डा. गोरख प्रसाद मस्ताना : मन के उदास अंगना में भोर बन के आई, छपलस अन्हार सगरो, अंजोर बन के आई।
भगवती प्रसाद द्विवेदी : औपचारिक शहर में विश्वास खंजर हो गया है…।
(रिपोर्ट, तस्वीर : सिद्धेश्वर/घनश्याम)

 

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