कोरोनाकाल में सादगीपूर्ण सरस्वतीपूजन/ पटना में आनलाइन कथा पाठ/ वाराणसी में भोजपुरी सम्मेलन

सादगी के साथ संपन्न हुई सरस्वती पूजा

(संतपाल स्कूल में सरस्वती पूजा)

सासाराम/डेहरी-आन-सोन (रोहतास)/दाउदनगर (औरंगाबाद)-कार्यालय प्रतिनिधि। स्कूलों-कालेजों और विभिन्न शिक्षण संस्थानों के साथ गली-मुहल्लों में इस बार सरस्वती पूजा कोविड-19 के प्रावधान के कारण सादगी के साथ संपन्न की गई। अबीर-गुलाल का भी सार्वजनिक इस्तेमाल नहीं हुआ और बिना डीजे वाला शोर-शराबा के प्रतिमाओं का नदी-तालाबों में विसर्जन किया गया। स्कूलों में मास्क का और सेनेटाइजर का उपयोग कर भरसक एहतियात बरता गया। सासाराम में रोहतास जिला के अग्रणी विद्यालय संतपाल पब्लिक स्कूल के अध्यक्ष डा. एसपी वर्मा, वर्मा एजुकेशनल ट्रस्ट की सचिव वीणा वर्मा, ट्रस्टी राहुल वर्मा, प्राचार्य अराधना वर्मा, प्रबंधक रोहित वर्मा के साथ शिक्षक-शिक्षिकाओं, अभिभावकों और विद्यार्थियों ने पूजा कार्यक्रम में भाग लिया। नोखा (रोहतास) में भी सिद्धेश्वर पब्लिक स्कूल और सिद्धेश्वर कालेज आफ टीचर्स एजुकेशन में विद्या की देवी सरस्वती की पूजा-अर्चना की गई।
डेहरी-आन-सोन में भी पूजा-अर्चना :
डेहरी-आन-सोन में अग्रणी विद्यालय सनबीम पब्लिक स्कूल के प्रबंध निदेशक राजीव रंजन सिन्हा, प्राचार्य अनुभा सिन्हा ने विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं, विद्यालय के छात्र-छात्राओं और जनता बालिका विद्यालय में प्राचार्य जगनारायण पांडेय ने विद्यालय परिवार के साथ पूजन कार्यक्रम संपन्न किया। महिला कालेज डालमियानगर परिसरर में भी पारंपरिक धार्मिक विधान से विद्या की देवी सरस्वती की पूजा-अर्चना की गई।
दाउदनगर में विद्यार्थियों को शुभकामनाएं :
दाउदनगर (औरंगाबाद) में विद्या की अधिष्ठात्री देवी मां शारदा की सादगी के साथ पूजा-अर्चना के बाद भगवान प्रसाद शिवनाथ प्रसाद बीएड कालेज के प्राचार्य डा. अमित कुमार सिंह ने, विद्या निकेतन विद्यालय समूह के अध्यक्ष सुरेश कुमार गुप्ता, सीईओ आनंद प्रकाश, डिप्टी सीईओ विद्या सागर ने और अन्य शिक्षण संस्थानों के संचालकों, शिक्षा प्रमुखों ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं।

‘रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी लेखन की लोकप्रिय विधा है कहानी

पटना (सोनमाटी समाचार नेटवर्क)। भारतीय युवा साहित्यकार परिषद के तत्वावधान में आयोजित हेलो फेसबुक कथा सम्मेलन में हिन्दी के नए-पुराने कथाकारों ने अपनी-अपनी कहानियों का आनलाइन पाठ किया। आनलाइन कथा सम्मेलन में कई कहानियों तूलिका (डा. लवलेश दत्त), देवदूत (विजयानंद विजय), दूर की नाव (डा. संगीता तोमर), प्रकृति का हाहाकार (अजय), शांति का रहस्योद्घाटन (प्रियंका श्रीवास्तव शुभ्र), हंसुली (अलका वर्मा), क्या कर लेगा पंडित (डा. सविता मिश्रा), बंधन (पूनम आनंद), एक और बलि (नरेंद्र कौर छाबड़ा), बैंड का चबुतरा (जयंत), सुखिया काकी (राज रानी) आदि का उसके कहानीकारों ने पाठ किया।
सामयिक प्रासंगिकता और उपादेयता पर हुई चर्चा :
सोशल मीडिया फेसबुक पर इस आयोजन को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए वरिष्ठ कथाकार डा. लवलेश दत्त ने कहा कि चूंकि कहानी आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी होती है, इसीलिए लेखन की यह विधा सर्वाधिक ग्राह्यï, लोकप्रिय रही है और इस विधा की प्रासंगिकता सदाबहार बनी रही है। आनलाइन कथा सम्मेलन में अपूर्व कुमार, पुष्परंजन कुमार, घनश्याम कलयुगी, प्रणय कुमार, अंकेश कुमार ने भी कहानी विधा पर अपनी-अपनी बातें रखीं। कथा सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कथाकार जयंत ने प्रस्तुत की गई कहानियों की सामयकिता, प्रासंगिकता और सामाजिक उपादेयता पर प्रकाश डाला। साथ ही कथातत्व और शिल्प क्षमता को भी रेखांकित किया। कथा सम्मेलन का संचालन इस सोशल मीडिया संयोजन के संचालक सिद्धेश्वर ने किया। सिद्धेश्वर ने आरंभ में विषय-प्रवर्तन करते हुए कथाकारों के बारे में जानकारी दी। (प्रस्तुति : ऋर्चा वर्मा, सचिव, भारतीय युवा साहित्यकार परिषद)

राष्ट्रीय सम्मेलन में भोजपुरी की दशा-दिशा पर चर्चा

वाराणसी (उत्तर प्रदेश)-सोनमाटी समाचार नेटवर्क। विश्व भोजपुरी सम्मेलन के तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय भोजपुरी सम्मेलन का आयोजन 21 और 22 फरवरी को यहां किया गया है। विश्व भोजपुरी सम्मेलन, वाराणसी के मुख्य संयोजक डा. अजय ओझा और राष्ट्रीय महासचिव डा. अशोक कुमार सिंह के अनुसार, सम्मेलन के लिए फिजी के राजदूत नीलेश रोहित कुमार, मारीशस की राजदूत शांतिबाई हनुमानजी, सूरीनाम की राजदूत आशना कन्हाई और भारत से राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र, जम्मू एंड कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडेय को बतौर अतिथि आमंत्रित किया गया है। पहले दिन मातृभाषा का महत्व विषय पर गोष्ठी होगी और सांस्कृतिक कार्यक्रम लोकसंध्या, धोबिया नाच, कहरवा नाच, आल्हा गायन, लोकवाद्य वादन, कठपुतली नाच, भोजपुरी गीत-संगीत होंगे। दूसरे दिन 22 फरवरी को गंगा दर्शन, गिरमिटिया मजदूर : एक इतिहास, 21 वीं सदी में भोजपुरी भाषा की दशा-दिशा, भोजपुरी लोक संस्कृति कल और आज पर चर्चाएं होंगी।

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