भारतभूमि के महान दार्शनिक थे स्वामी विवेकानंद : प्रो. तिवारी

सासाराम (रोहतास)-सोनमाटी संवाददाता। बाल विद्या मंदिर परिवार द्वारा मंगलम् उत्सव वाटिका सभागार में स्वामी विवेकानंद की 156वीं जयंती के अवसर पर उनके दार्शनिक विचार पर विर्मश के लिए गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का प्रवर्तन प्रख्यात शिक्षाविद् प्रो. डा. नन्दकिशोर तिवारी, बाल विद्या मंदिर के संरक्षक डा. बुद्धनाथ प्रसाद श्रीवास्तव और अध्यक्ष इ. नवीन सिन्हा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्ज्वलन कर किया।
संगोष्ठी में मुख्य वक्ता प्रो. नंदकिशोर तिवारी ने कहा कि धर्म, अध्यात्म और दर्शन के नाम पर सिर्फ भाषण देने, व्याख्यान करने से समाज और आदमी के जीवन मेें बदलवा नहींआएगा। स्वामी विवेकानंद ने वेदांत को भारतीय ज्ञान की जननी बताया है। जब आदमी आत्मा की ज्योति को जान जाता है, तब उसके अंदर से भय खत्म हो जाता है और परम ज्ञान से साक्षात्कार कर लेता है। स्वामी विवेकानंद साधारण पुरुष नहीं थे, वह महज एक संन्यासी भर नहींथे। वह संपूर्ण राष्ट्र के प्रेरणास्त्रोत थे। भारत भूमि के महान दार्शनिक और महान विचारक थे। उन्होंने विश्व को शून्य बताया था। आज वैज्ञानिक भी बता रहे हैं कि विश्व शून्य ऊर्जा से उत्पन्न हुआ है। पूरे विश्व में, ब्रह्म्ïाांड में समान मात्रा में धनात्मक और ऋणात्मक ऊर्जा बिखरी हुई है, जिनका योग शून्य है।
विचारगोष्ठी में दर्शनशास्त्र के प्राध्यापक डा. विनोद सिंह (उज्जैन), डा. अनिल कुमार सिंह. प्रो. तारकेश्वर सिंह, डा. प्रवीण सिन्हा, रामानंद प्रसाद श्रीवास्तव आदि ने स्वामी विवेकानंद के संदर्भ में अपनी बातें रखीं। इस अवसर पर विद्या मंदिर परिवार की ओर से महत्वपूर्ण अतिथियों को अंगवस्त्र और कलम भेंटकर सम्मानित किया गया। बाल विद्या मंदिर परिवार के प्रवक्ता अर्जुन कुमार, प्रभुनारायण सिंहए, काशीनाथ सहाय, एस. लाल, डा. राकेश बघेल आदि ने आगत अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया।
( रिपोर्ट और तस्वीर : अर्जुन कुमार, प्रवक्ता, बाल विद्या मंदिर परिवार)

 

डा. विजय प्रकाश को हिन्दी साहित्य सम्मलेन सम्मान

पटना (विशेष प्रतिनिधि)। साहित्यकार डा. विजय प्रकाश को बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन की ओर से अंगवस्त्र और प्रमाणपत्र भेंटकर सम्मानित किया गया। डा. विजय प्रकाश को बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के कदमकुआं स्थित सभागार में सम्मेलन के शताब्दी वर्ष (1919-2019) के अवसर पर आयोजित एक समारोह में हिन्दी में विशेष साहित्यिक योगदान के लिए सम्मान प्रदान किया गया। डा. विजय प्रकाश रोहतास जिला के मोकर गांव के निवासी हैं और पटना सचिवालय में अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।
(व्हाट्सएप सूचना)

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