
आरा (भोजपुर)। समाज के गरीब और वंचित लोगों को शिक्षा एवं अवसरों के माध्यम से मुख्यधारा से जोड़ना हर व्यक्ति का दायित्व है। गरीबों की न कोई जाति होती है और न कोई भौगोलिक सीमा। उनकी पीड़ा और संघर्ष अक्सर मुखर होकर सामने नहीं आ पाते। ऐसे लोगों की मदद कर समाज और राष्ट्र को मजबूत बनाने में योगदान दिया जा सकता है। यह बात इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वरीय अधिवक्ता अरविंद प्रबोध दूबे ने उदवंतनगर प्रखंड के विभिन्न महादलित टोलों में स्कूली बैग और पाठ्य सामग्री वितरण के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि किसी समाज या देश का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब उसके सभी वर्गों का समुचित विकास हो। यदि समाज का कोई वर्ग बहुत पीछे रह जाए और दूसरा वर्ग बहुत आगे निकल जाए, तो सामाजिक और राष्ट्रीय संतुलन कायम नहीं रह सकता। उन्होंने विकसित देशों का उदाहरण देते हुए शिक्षा को सामाजिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया।
अरविंद प्रबोध दूबे ने उदवंतनगर प्रखंड के चैराई स्थित श्रीराम शबरी सेंटर, सकड़ी मुसहर टोला और गीधा मुसहर टोला के बच्चों के बीच स्कूली बैग, पाठ्य सामग्री सहित अन्य सामग्री का वितरण किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों के साथ बैठकर संवाद किया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि मेहनत और अवसर मिलने पर ये बच्चे भी जहाज उड़ा सकते हैं तथा हीरो, पुलिस अधिकारी, डॉक्टर और वकील बन सकते हैं। बच्चों में प्रतिभा की कमी नहीं है, जरूरत उन्हें उचित प्रोत्साहन और अवसर देने की है।

उन्होंने गीधा स्थित अलका सिलाई सह पढ़ाई केंद्र की युवतियों से भी संवाद किया और उनके लिए सलवार-समीज के कपड़े सहित अन्य सहयोग की बात कही। केंद्र के संचालक राजीव भटनागर से भी उन्होंने वार्ता की और केंद्र की गतिविधियों के लिए धन्यवाद दिया।
इस अवसर पर नई आशा के संरक्षक डॉ. भीम सिंह भवेश, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वरीय अधिवक्ता अशोक गिरी, पुनीत मिश्रा, रवि सिंह, मनीष कुमार सिंह, कुंदन कुमार, मनीष वत्स, सूर्यमणि कुमार, सुमित पांडे और शिवशंकर सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित थे।





