
- मार्च 2027 तक भी पुल चालू होने पर संशय, वैकल्पिक सड़क की मरम्मत और जल्द परिचालन शुरू करने की मांग
डेहरी-ऑन-सोन (रोहतास)। शहर के पाली स्थित रेलवे ओवरब्रिज को मरम्मत के बाद जल्द चालू करने की मांग को लेकर रविवार को स्थानीय लोगों ने पुल के समीप धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान रेलवे अधिकारियों और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारियों ने पुल की मरम्मत में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए चेतावनी दी कि जल्द परिचालन शुरू नहीं हुआ तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
धरना का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता राजन राज ने कहा कि पाली रेलवे ओवरब्रिज मई 2023 से बंद है। करीब साढ़े तीन वर्षों से आवागमन ठप रहने के कारण डेहरी, मकराइन और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को भारी परेशानी हो रही है। पटना सहित अन्य स्थानों की ओर आने-जाने वाले लोगों को मजबूरी में सोन नदी के किनारे बनी अस्थायी सड़क का सहारा लेना पड़ रहा है। जर्जर स्थिति में पहुंच चुकी इस सड़क पर पैदल चलना और वाहनों का परिचालन भी मुश्किल है। रेल लाइन पार करने के दौरान कई लोगों की जान जाने की घटनाएं भी सामने आई हैं।
उन्होंने कहा कि पुल बंद होने से शहर का व्यापार प्रभावित हो रहा है। आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल असर पड़ने के साथ किसानों को भी अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में कठिनाई हो रही है। स्थानीय प्रशासन और रेलवे अधिकारियों की उदासीनता के कारण लोगों की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।
प्रदर्शन में शामिल बबल कश्यप और शिव गांधी ने कहा कि स्थानीय लोगों के लगातार दबाव और आंदोलन के बाद रेलवे ने 13 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत कर मरम्मत कार्य के लिए टेंडर निकाला था। काम शुरू होने के बावजूद इसकी गति बेहद धीमी है। रेलवे की ओर से कई बार समयसीमा बढ़ाई जा चुकी है, लेकिन अब तक पुल चालू नहीं हो सका है। लोगों को आशंका है कि मार्च 2027 तक भी परिचालन शुरू होना मुश्किल है।
बार-बार बढ़ाई गई मरम्मत की समयसीमा
ओवरब्रिज की मरम्मत का कार्य पिछले वर्ष शुरू हुआ था। इसे सितंबर 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। इसके बाद पहली बार समयसीमा बढ़ाकर 31 मार्च 2026 और फिर अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई। अब चौथी बार समयसीमा बढ़ा दी गई है। इसके बावजूद काम पूरा होने की निश्चित तिथि स्पष्ट नहीं है।
फिलहाल पुल के बीच चार कर्सर बनाए जा रहे हैं। एक नया पाया खड़ा किया जा रहा है और करीब 50 मीटर लंबे गर्डर को हटाकर उसकी जगह नया गर्डर लगाया जा रहा है। यह कार्य कार्बन इंफ्राटेक नामक कंपनी कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि तकनीकी कार्यों के नाम पर लगातार देरी हो रही है और मरम्मत की मौजूदा रफ्तार से जल्द परिचालन शुरू होने की उम्मीद कम है।
वैकल्पिक सड़क को दुरुस्त करने की मांग
धरनार्थियों ने मांग की कि जब तक रेलवे ओवरब्रिज की मरम्मत पूरी नहीं हो जाती, तब तक सोन नदी के किनारे बनी वैकल्पिक सड़क को कंक्रीट और पिच से दुरुस्त किया जाए। इससे आवागमन सुरक्षित और सुविधाजनक हो सकेगा। राजन राज की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि परियोजना का लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस 1 अक्टूबर 2025 को जारी हुआ था और निर्माण कार्य पूरा करने की निर्धारित तिथि 11 अक्टूबर 2025 थी। इसके बावजूद अब तक पुल चालू नहीं किया जा सका है।
2013 में हुआ था पुल का उद्घाटन
डेहरी-नासरीगंज को जोड़ने वाले स्टेट हाईवे पर पाली रोड स्थित इस रेलवे ओवरब्रिज का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 4 सितंबर 2013 को रिमोट के माध्यम से किया था। करीब 31 करोड़ रुपये की लागत से बने इस डबल लेन पुल की लंबाई 525 मीटर और चौड़ाई 8.5 मीटर है। निर्माण के कुछ ही महीनों बाद पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद दो बार मरम्मत कराई गई। अब तीसरी बार क्षतिग्रस्त होने के बाद इसकी मरम्मत की जा रही है। पुल पर लाइट के खंभे तो लगाए गए हैं, लेकिन अब तक प्रकाश की व्यवस्था नहीं हो सकी है।
धरना-प्रदर्शन में सुरेंद्र तिवारी, कृष्णा राय, मोनू पांडेय, मुकेश कुमार, अभिषेक कुमार, अंबुज साहू, जुनैद, विक्की कुमार, सुल्तान मिर्जा, अंबुज कुमार सिंह, महेंद्र चौधरी, मुन्ना सिंह, रजनीश, अरुण गुप्ता, अराफात खां, राजेंद्र कुमार, सच्चिदानंद प्रसाद, अमित सिंह, मो. नियाज खां सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए।





