आचार्य लाल मोहन शास्त्री ने बताया: कब करें लक्ष्मी-कुबेर व माँ काली की पूजा, जानें संपूर्ण शुभ मुहूर्त

आचार्य पं. लाल मोहन शास्त्री ने कहा कि सनातन धर्म के पर्वों पर अनेक विद्वान भ्रम उत्पन्न कर रहे हैं, धनतेरस, श्री हनुमान जन्मोत्सव और दीपावली को लेकर कई विद्वान भिन्न मत रख रहे हैं, जिससे जनमानस भ्रमित हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी निर्णय प्रमाणिक पंचांग के अनुसार होने चाहिए। पं. शास्त्री ने इन तीनों पर्वों की तिथि, महत्व और पूजा के शुभ मुहूर्तों की जानकारी दी।

तिथि : शनिवार, 18 अक्टूबर
महत्व : इस दिन समुद्र मंथन से निकले आयुर्वेद के अधिष्ठाता देव भगवान धन्वंतरी की जयंती मनाई जाएगी।
विशेष सुझाव : शनिवार के दिन लोहे का सामान नहीं लेना चाहिए। घर की सफाई व पूजा सामग्री धन त्रयोदशी को ही लेनी चाहिए।
पूजन विधि : शाम के 6:59 से 8:56 बजे तक प्रदोष काल में भगवान धन्वंतरी, लक्ष्मी और कुबेरजी की विधिवत पूजा की जानी चाहिए।
पारम्परिक विधि : शाम को यम दीपक जलाने से यमराज की कृपा मिलती है और अकाल मृत्यु का भय मिटता है।

तिथि : रविवार, 19 अक्टूबर। महत्व : इस दिन सन्ध्या 5:16 से 6:55 बजे के बीच श्री हनुमान जन्मोत्सव का पर्व मनाया जाएगा। विधि : नरक चतुर्दशी की रात्रि में चौदह दीपदान श्मशान में कर पितरों की तृप्ति का विधान है। मगध परम्परा अनुसार : रात्रि भोजन के बाद यम दियरी की परम्परागत पूजा निकाली जाएगी, जो अकाल मृत्यु निवारण और कल्याण का प्रतीक है।

तिथि : सोमवार, 20 अक्टूबर। अमावस्या प्रारंभ : दोपहर 2:32 बजे के बाद। महत्व : यही वह दिन है जब पूरे भारत में सनातन धर्म का सबसे बड़ा पर्व दीपावली हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। लक्ष्मी-गणेश पूजन मुहूर्त:

  • प्रथम मुहूर्त (कुंभ लग्न) : दोपहर 2:32 से 3:44 बजे तक — व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के लिए शुभ।
  • द्वितीय मुहूर्त (वृष लग्न) : सन्ध्या 6:51 से 8:48 बजे तक — प्रेम, व्यवसाय और समृद्धि हेतु श्रेष्ठ।
  • तृतीय मुहूर्त (सिंह लग्न) : रात्रि 1:19 से 3:33 बजे तक — गुप्त धन और लक्ष्मी प्राप्ति के लिए विशेष।
  • मध्यरात्रि पूजा : 11:30 बजे से माँ काली की तांत्रिक विधि से महापूजा की परम्परा, जहाँ श्मशान में अघोरियों द्वारा पंचमकार अनुष्ठान सम्पादित किए जाते हैं।

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