
गया जी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना की ओर से सोमवार को गया जी के गजाधरपुर गांव में पशु स्वास्थ्य शिविर-सह-किसान-वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। धान-परती भूमि प्रबंधन परियोजना के अंतर्गत आयोजित इस शिविर में 110 किसानों को लाभ मिला। इनमें 34 महिला किसान शामिल थीं। शिविर के दौरान 134 पशुओं को पशु चिकित्सा सेवाएं प्रदान की गईं।
संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन परियोजना के प्रधान अन्वेषक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राकेश कुमार के नेतृत्व में किया गया। शिविर में 83 बकरियों और 51 गाय एवं बैलों का उपचार किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार, पशुपालकों को वैज्ञानिक तरीके से पशुओं की देखभाल के प्रति जागरूक करना तथा पशुधन आधारित आजीविका को बढ़ावा देना था।

पशुओं के उपचार और पोषण पर जोर
शिविर में पशु चिकित्सा दल ने पशुओं की विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार और प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया। पशुओं को कृमिनाशक दवाएं दी गईं तथा बाह्य परजीवियों के उपचार एवं नियंत्रण के लिए आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। इसके अलावा लम्पी स्किन डिजीज से प्रभावित अथवा संदिग्ध गोवंशीय पशुओं के प्रबंधन संबंधी जानकारी और सेवाएं भी प्रदान की गईं।पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण को बढ़ावा देने के लिए किसानों को खनिज मिश्रण, विटामिन तथा अन्य आहार पूरक उपलब्ध कराए गए। पशुपालकों को पशुओं के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी, रोगों की समय पर पहचान और उचित देखभाल के महत्त्व से भी अवगत कराया गया।
वैज्ञानिकों ने किसानों को दी उपयोगी जानकारी
कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना की ओर से वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार राय, वैज्ञानिक डॉ. सुरेंद्र कुमार अहिरवाल तथा मुख्य तकनीकी अधिकारी डॉ. काशीनाथ उपस्थित रहे।इस पहल के माध्यम से किसानों को पशुधन के वैज्ञानिक प्रबंधन, रोगों की रोकथाम और संतुलित पोषण के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया। पशु स्वास्थ्य सेवाओं को गांव स्तर तक पहुंचाने की दिशा में आयोजित इस शिविर से पशुपालकों को अपने पशुओं की देखभाल संबंधी व्यावहारिक जानकारी मिली। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को आजीविका के बेहतर साधन के रूप में विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।





