
पटना। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – पूर्वी क्षेत्र अनुसंधान परिसर द्वारा शुक्रवार को पटना जिले के दुल्हिन बाजार प्रखंड अंतर्गत सिल्हौरी गांव में “संतुलित उर्वरक उपयोग” विषय पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक एवं टिकाऊ पोषक तत्व प्रबंधन के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक एवं अंधाधुंध उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों जैसे मृदा क्षरण, फसल गुणवत्ता में गिरावट तथा पर्यावरण प्रदूषण पर विस्तार से चर्चा की। किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर मिट्टी की जांच कर आवश्यकतानुसार संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी गई।
विशेषज्ञों ने दीर्घकालिक मृदा उर्वरता बनाए रखने के लिए गोबर की खाद (एफवाईएम), वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद, जैव उर्वरक तथा फसल चक्र जैसी जैविक विधियों को रासायनिक उर्वरकों के साथ समन्वित रूप से अपनाने पर बल दिया। वैज्ञानिकों ने बताया कि इससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है तथा कृषि उत्पादन अधिक टिकाऊ बनता है।
कार्यक्रम में कुल 35 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 7 महिला किसान भी शामिल थीं। किसानों ने वैज्ञानिकों के साथ संवाद कर खेत स्तर की समस्याओं एवं पोषक तत्व प्रबंधन से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा की।
इस कार्यक्रम का संचालन डॉ. आरती कुमारी, डॉ. रचना दुबे, डॉ. अभिषेक दुबे तथा संस्थान के तकनीकी अधिकारी प्रेम पाल कुमार द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के अंत में किसानों से अपील की गई कि वे संतुलित उर्वरक उपयोग की वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर अधिक उत्पादन प्राप्त करें तथा मृदा स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करें।





