
गयाजी। कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की सेहत को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से चलाए जा रहे “खेत बचाओ अभियान” के तहत गया जिले के टेकारी प्रखंड स्थित सिमुआरा पंचायत के गुलरियाचक गांव में संतुलित उर्वरक उपयोग पर एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 120 किसानों, जिनमें 80 पुरुष और 40 महिला किसान शामिल थीं, ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
मिट्टी की सेहत बचाने पर दिया गया विशेष जोरकार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि अनियंत्रित रासायनिक उर्वरक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है। इसलिए संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक खाद और हरी खाद जैसी तकनीकों को अपनाकर भूमि की उत्पादकता को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है।
4R सिद्धांत से बढ़ेगी उर्वरकों की दक्षतावरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राकेश कुमार ने किसानों को उर्वरकों के 4R सिद्धांत—सही स्रोत, सही मात्रा, सही समय और सही स्थान—की जानकारी दी। उन्होंने ढैंचा, कम्पोस्ट और वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग से पोषक तत्व प्रबंधन को बेहतर बनाने के उपाय बताए। साथ ही संरक्षण कृषि एवं धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) जैसी तकनीकों के लाभों पर भी विस्तार से चर्चा की।
हरी खाद और समेकित कृषि प्रणाली पर चर्चासहायक प्राध्यापक सह कनिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. देवेन्द्र मंडल ने कहा कि ढैंचा, एजोला और वर्मी कम्पोस्ट जैसी जैविक विधियां मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने किसानों को समेकित कृषि प्रणाली (आईएफएस) अपनाने की भी सलाह दी।
खरपतवार प्रबंधन के व्यावहारिक उपाय बताएकेवीके मानपुर, गया के प्रमुख ई. मनोज कुमार ने किसानों को प्रभावी खरपतवार नियंत्रण तथा संसाधन-संरक्षण आधारित मृदा प्रबंधन के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उचित खरपतवार प्रबंधन से फसलों की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
किसानों को वितरित किए गए ढैंचा बीजकार्यक्रम के दौरान हरी खाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किसानों के बीच ढैंचा बीज का वितरण किया गया। इसके बाद आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में किसानों ने अपनी कृषि संबंधी समस्याएं विशेषज्ञों के समक्ष रखीं, जिनका समाधान मौके पर ही किया गया।
वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में हुआ आयोजनयह कार्यक्रम कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन एवं तकनीकी सहयोग से आयोजित किया गया। अंत में स्थानीय किसान आशीष कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और किसानों से वैज्ञानिक खेती की तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया।



