
डेहरी -आन-सोन (रोहतास) -कार्यालय प्रतिनिधि। क्षेत्र में विकास कार्यों और सरकारी सेवाओं की वास्तविक स्थिति का जायजा लेने के उद्देश्य से डेहरी के विधायक राजीव रंजन सिंह उर्फ़ सोनू सिंह ने सोमवार देर शाम अचानक क्षेत्र भ्रमण शुरू किया। कार्यक्रम के तहत वे सबसे पहले ऐनीकट स्थित झारखंडी महादेव मंदिर पहुँचे, जहाँ पूजा-अर्चना करने के बाद उन्होंने मंदिर परिसर में प्रस्तावित सौन्दर्यीकरण और सुविधाओं के विस्तार को लेकर अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया।
इसी क्रम में नगर परिषद द्वारा लगाए गए आई लव यू डिहरी–डालमियानगर डिजिटल बोर्ड की भी समीक्षा की गई, जिसमें तकनीकी खामियाँ मिलने पर विधायक ने नाराज़गी व्यक्त की और नगर परिषद ईओ से तत्काल जांच की मांग की।
क्षेत्र भ्रमण के दौरान स्थानीय लोगों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए विधायक देर रात अनायास ही डेहरी अनुमंडलीय अस्पताल पहुँच गए। अस्पताल के केबिन में पहुँचते ही पहली बड़ी खामी दिखी—ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर नदारद थे। आपातकालीन सेवाओं में डॉक्टर की अनुपस्थिति को विधायक ने बेहद चिंताजनक बताया और कहा कि यह स्थिति सीधे-सीधे मरीजों की सुरक्षा से खिलवाड़ है।
स्टाफ ने बताया कि डॉक्टर को फोन कर घर से बुलाया जा रहा है। लगभग 10 मिनट बाद डॉ. आशीष रंजन अस्पताल पहुंचे। इसके बाद विधायक ने नसबंदी कराई महिलाओं के वार्ड का निरीक्षण किया, जहाँ मरीजों ने बताया कि बेड पर एक ही चादर लगा रहता है तथा ठंड के मौसम में अस्पताल की ओर से कंबल नहीं दिया गया है। मजबूरी में वे अपने घर से कंबल लेकर आईं हैं।

निरीक्षण आगे बढ़ा तो ऑक्सीजन आपूर्ति की स्थिति ने सभी को चौंका दिया। अस्पताल की ऑक्सीजन पाइपलाइन पूरी तरह बंद पड़ी पाई गई, जबकि गंभीर मरीजों के इलाज में यह सुविधा 24 घंटे चालू रहना अनिवार्य होती है। यह लापरवाही अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
इसके बाद विधायक जब ओटी (ऑपरेशन थियेटर) पहुँचे तो वहां की अवस्था और भी खराब मिली। सफाई, उपकरणों की स्थिति और मानक अनुपालन—हर स्तर पर भारी कमी दिखाई दी। अस्पताल की अन्य मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाएँ भी अपेक्षा से कम और अव्यवस्थित पाई गईं।
इसी क्रम में ड्यूटी में तैनात आशा ममता ने भी विधायक को बताया कि वे तीन शिफ्ट में काम करती हैं, लेकिन पिछले तीन महीनों से उन्हें वेतन नहीं मिला है।
निरीक्षण के बाद विधायक सोनू सिंह ने कहा कि अस्पताल में अव्यवस्था चिंताजनक है। डॉक्टर अपने कक्ष में मौजूद नहीं थे, ऑक्सीजन और गैस पाइपलाइन की स्थिति खराब थी, बेड गंदे थे और मरीजों को बुनियादी सुविधाएँ नहीं मिल रहीं। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं, लेकिन अस्पताल प्रबंधन और कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही से स्थिति नहीं सुधर रही है। उन्होंने अस्पताल परिसर में सफाई व्यवस्था को भी दयनीय बताते हुए तुरंत सुधार का निर्देश दिया।






