
डेहरी -आन-सोन (रोहतास)। उच्च शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और संस्थागत विकास को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय जमुहार और वाईबीएन विश्वविद्यालय, रांची, झारखंड के बीच शैक्षणिक सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस समझौते का उद्देश्य दोनों विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान, नवाचार, प्रशिक्षण, कौशल विकास, पुस्तकालय एवं सूचना सेवाओं तथा संस्थागत सहयोग को व्यापक और सशक्त बनाना है। एमओयू पर जीएनएसयू की ओर से रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) कुमार आलोक प्रताप सिंह तथा वाईबीएन विश्वविद्यालय की ओर से डिप्टी रजिस्ट्रार संजय तिवारी ने हस्ताक्षर किए।
इस अवसर पर दोनों विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक दूरदर्शी और ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार आधारित सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी तथा राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर अकादमिक उत्कृष्टता को मजबूत करेगी।
एमओयू के तहत दोनों विश्वविद्यालय संयुक्त रूप से अनुसंधान परियोजनाएं, संकाय एवं छात्र आदान-प्रदान, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियां, सेमिनार, कार्यशालाएं, फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम, प्रशिक्षण कार्यक्रम, नवाचार गतिविधियां, स्टार्टअप एवं उद्यमिता विकास तथा संयुक्त प्रकाशनों को बढ़ावा देंगे। साथ ही पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के क्षेत्र में ई-जर्नल, डिजिटल रिपॉजिटरी, शोध प्रबंधों और अन्य ज्ञान संसाधनों के साझा उपयोग पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इस शैक्षणिक सहयोग को मूर्त रूप देने में जीएनएसयू के डॉ. अवधेश सिंह गौतम तथा वाईबीएन विश्वविद्यालय के डॉ. सोमनाथ रॉय चौधरी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। दोनों शिक्षाविदों के प्रयासों से यह समझौता सफलतापूर्वक संपन्न हो सका।
दोनों अधिकारियों ने संयुक्त रूप से कहा कि यह समझौता केवल औपचारिक सहयोग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विभिन्न विषयों में संयुक्त अनुसंधान, नवाचार गतिविधियों, कौशल विकास कार्यक्रमों और ज्ञान संसाधनों के साझा उपयोग को नई गति देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह साझेदारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के उद्देश्यों की पूर्ति में सहायक सिद्ध होगी और दोनों विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगी।
वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि यह एमओयू विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और उद्योग-अकादमिक सहयोग के नए अवसर सृजित करेगा तथा गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा और उत्कृष्ट अनुसंधान संस्कृति को बढ़ावा देगा।



