जीएनएसयू : समाज से जो पाया, उसे लौटाना ही सबसे बड़ी सेवा

डेहरी-आन-सोन (बिहार)-विशेष प्रतिनिधि। मनुष्य अपने सामाजिक परिवेश से जो कुछ प्राप्त करता है, उसे लौटाना ही उसकी सबसे बड़ी समाज-सेवा है और यही मनुष्यता है, मानवता है। आदमी का विकास समाज से अलग होकर हो ही नहीं सकता, क्योंकि उसके निज चरित्र और क्षमता का निर्माण भी सामााजिक संसाधनों से ही संभव है। इसी सोच, इसी दृष्टि और इसी योजना को लेकर बिहार के सुदूर ग्राम्य अंचल और कैमूर पर्वत की  उपत्यका के पाश्र्ववर्ती गांव जमुहार में गोपालनारायणसिंह विश्वविद्यालय (जीएनएसयू) की परिकल्पना-संस्थापना की गई है। यह बात जीएनएसयू के कुलाधिपति एवं राज्यसभा सांसद गोपालनारायण सिंह ने जीएनएसयू परिसर में वार्षिक समारोह (सृजन-2018) के समापन-सत्र को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि आर्थिक तौर पर पिछड़े बिहार के युवाओं में भी डाक्टर, इंजीनियर, साइंसटिस्ट बनने की क्षमता है, मगर संसाधन के अभाव में वे बाहर पढऩे नहीं जा सकते थे। इसी खास ख्याल व नजरिये से संस्कारपूर्ण, संसाधनपूर्ण वातावरण में बिहार की युवा प्रतिभा को संवारने और आगे बढ़ाने का कार्य बिहार के ग्राम्यांचल में यह विश्वविद्यालय कर रहा है। यहां चिकित्सा, नर्सिंग, प्रबंधन, कानून, फार्मेसी सहित विभिन्न विषयों में सफलता के साथ पढ़ाई हो रही है और यहां से उत्तीर्ण विद्यार्थियों को नौकरी भी प्राप्त हो रही है।

बेहतर शिक्षण संस्थान की  बिहार जैसे प्रदेश में ही नही, देश में भी जरूरत
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के वरिष्ठ सदस्य प्रो. राज कुमार (पंजाब विश्वविद्यालय के कुलपित) और सचिव गोविन्दनारायण सिंह ने अपने विशेष संबोधन में कहा कि बिहार के सुदुर अंचल में जीएनएसयू का बीजारोपण जिस संकल्पना और जिस विशाल संरचना के साथ किया गया है, वह निश्चित ही समय के साथ ज्ञान के समृद्ध वटवृक्ष के रूप में उत्तरोत्तर पुष्पित-पल्लवित होकर राज्य और इससे भी आगे  बढ़कर देश में अपनी श्रेष्ठता की पहचान स्थापित करेगा। एक बेहतर शिक्षण संस्थान की विकास में पीछे रह गए बिहार जैसे प्रदेश में ही नही, देश में भी जरूरत है। उम्मीद है, जीएनएसयू संस्कारयुक्त ज्ञान-दान की राष्ट्रीय कसौटी पर खरा उतरने का अपना संकल्प पूरा करेगा।

विद्वानों को अंगवस्त्र भेंटकर विश्वविद्यालय की ओर से किया गया सम्मानित 

वार्षिक समारोह सृजन-2018 के समापन समारोह में जीएनएसयू के कुलपति डा. एमएल वर्मा ने मंच पर मौजूद प्रो. राज कुमार, प्रो. मुजाहिद बेग (अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के चेयरमैन), प्रो. डा. प्रीति सक्सेना (भीवराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय), प्रो. सचिन निकान्थ राव देशमुख, डा. चंदन गुप्ता (देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय), प्रो. सुशान्त कुमार श्रीवास्तव (आईआईटी, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय), प्रो. अशोक डे (दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी), प्रो. भोजचंद्र ठाकुर, डा. एनके विश्वास, प्रो. प्रमोद गोविन्द राव, डा. ज्योति सरीन, डा. अजय कुमार खंडूरी आदि विद्वानों को अंगवस्त्र भेंटकर विश्वविद्यालय की ओर से सम्मानित किया।

सृजन-2018 में खेलकूद, वाद-विवाद प्रतियोगिता, नृत्य, गायन-वादन, लघु नाटक भी

जीएनएसयू परिसर के एनएमसीएच (नारायण मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल)  में वार्षिक समारोह सृजन-2018  के अंतर्गत आउट-डोर, इन-डोर खेलकूद, हस्तकला आदि की अंतरमहाविद्यालयी स्पर्धा और समागम का आयोजन किया गया। दक्षिण बिहार के विश्वविश्रुत  सोन अंचल क्षेत्र के इस एकमात्र भव्य चिकित्सा महाविद्यालय परिसर में कालेज की छात्राओंं ने भी मैदान में हाथ आजमाया। सृजन-2018 के आयोजन सचिव डा. अशोक कुमार देव और अन्य खेल-कूद व सांस्कृतिक संयोजकों के नेतृत्व में एनएमसीएच परिसर का नजारा कोई महीने भर खेल-गांव में तब्दील रहा। वार्षिक समारोह सृजन-2018 में वाद-विवाद प्रतियोगिता, नृत्य, गायन-वादन, लघु नाटक आदि  कार्यक्रमों का भी संयोजन किया गया।

समापन समारोह में एमबीबीएस में पल्लवी (2013-14) को सर्वश्रेष्ठ अकादमिक अवार्ड और प्रज्ञा प्राची (2014-15), श्वेता रानी (2015-16) व पल्लवी हरलालका (2017-18) को शीर्ष अकादमिक अवार्ड प्रदान किया गया ।  खेल-कूद और सांस्कृतिक संयोजनों में अग्रणी स्थान रखने छात्र-छात्राओं को भी प्रशस्ति-पत्र दिया गया।

रिपोर्ट : कृष्ण किसलय,
साथ में भूपेंद्रनारायण सिंह (पीआरओ, जीएनएसयू),

तस्वीर : भूपेंद्रनारायण सिंह/उपेन्द्र कश्यप

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