एनएमसीएच में बीआर माइक्रोकोन 2025 शुरू, माइक्रोबायोलॉजी पर मंथन

gopal narayan singh

डेहरी-आन-सोन (रोहतास)- विषेश संवादाता। नारायण मेडिकल कॉलेज, जमुहार में माइक्रोबायोलॉजी जैसे चिकित्सा शिक्षा जगत के अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर राज्य स्तरीय सम्मेलन बीआर माइक्रोकोन 2025 की मेजबानी गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय है। बिहार एवं आसपास के राज्यों से आए विशेषज्ञों के दो दिवसीय मंथन से चिकित्सा जगत को व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है।

यह बातें गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं पूर्व राज्यसभा सांसद गोपाल नारायण सिंह ने शनिवार को जमुहार स्थित देव मंगल सभागार में आयोजित बीआर माइक्रोकोन 2025 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि माइक्रोबायोलॉजी चिकित्सा विज्ञान की एक अत्यंत महत्वपूर्ण विधा है, जिसकी उपयोगिता और आवश्यकता कोरोना काल में पूरे विश्व ने महसूस की।

उन्होंने कहा कि बिना वैज्ञानिक जांच के चिकित्सकों के लिए भी प्रभावी उपचार संभव नहीं है। ऐसे में नित्य हो रहे नए अनुसंधान और खोजों से अद्यतन रहने के लिए इस प्रकार के शैक्षणिक आयोजनों की भूमिका अत्यंत आवश्यक है। कुलाधिपति ने इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट, बिहार चैप्टर द्वारा नारायण मेडिकल कॉलेज को आयोजन स्थल के रूप में चुने जाने पर आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम के आरंभ में सभी अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर सम्मेलन का उद्घाटन किया तथा अंगवस्त्र एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. जगदीश सिंह, कुलाधिपति के सलाहकार डॉ. महेंद्र कुमार सिंह, प्रति कुलाधिपति गोविंद नारायण सिंह, नारायण मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. हीरालाल महतो, एवं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पुनीत कुमार सिंह ने भी अपने विचार रखे।

NMCH

सम्मेलन में बिहार चैप्टर की अध्यक्ष प्रो. डॉ. नम्रता कुमारी (आईजीआईएमएस, पटना), सचिव प्रो. डॉ. प्रियंका नारायण (पीएमसीएच, पटना), डॉ. अश्विनी कुमार, डॉ. वर्णवाल, तथा माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. आर. के. श्रीवास्तव सहित विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञ एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने सम्मेलन के मुख्य विषय “माइक्रोस्कॉपी से जीनोमिक्स तक: आधुनिक युग की चुनौतियों का सामना करने के लिए माइक्रोबायोलॉजी को आगे बढ़ाना” पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने पारंपरिक माइक्रोस्कोपिक एवं कल्चर आधारित विधियों के साथ आधुनिक आणविक और जीनोमिक तकनीकों के एकीकरण पर विशेष जोर दिया।

उन्होंने कहा कि पीसीआर एवं संपूर्ण जीनोम सीक्वेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीकें रोगजनकों और एंटीबायोटिक प्रतिरोध जीन की त्वरित और सटीक पहचान में क्रांतिकारी भूमिका निभा रही हैं, जो आधुनिक चिकित्सा के लिए अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम के अंत में माइक्रोबायोलॉजी विभाग के सह-प्राध्यापक डॉ. राकेश कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

(रिपोर्ट, तस्वीर : भूपेंद्रनारायण सिंह, पीआरओ, जीएनएसयू)

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