आईसीएआर पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना ने त्रिपुरा में शुरू किया ‘मत्स्य-बागवानी मॉडल’, महिलाओं को मिलेगा रोजगार

पटना। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के कृषि अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा गुरुवार को त्रिपुरा के दक्षिण त्रिपुरा जिले के बिरचंद्र मनु में पूर्वोत्तर पर्वतीय घटक के अंतर्गत ‘किसान हित समूहों के लिए क्षमता निर्माण एवं आदान सहायता कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ग्रामीण महिलाओं के लिए ‘मछली-बागवानी आधारित तालाब एक्वाकल्चर मॉडल’ का शुभारंभ किया गया।

इस पहल का उद्देश्य समेकित कृषि प्रणाली के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाना तथा महिलाओं को कृषि-व्यवसाय से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र, दक्षिण त्रिपुरा का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

इस योजना के तहत त्रिपुरा में 100 एकड़ से अधिक क्षेत्र में प्रदर्शन फार्म विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रथम चरण में कृषि अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा किसानों को एक लाख उच्च गुणवत्ता वाले मछली बीज (फिंगरलिंग्स), 800 फलदार एवं उपयोगी पौधों की पौध तथा तालाबों की उर्वरता और जल गुणवत्ता बनाए रखने के लिए 960 किलोग्राम चूना उपलब्ध कराया गया।

किसानों की सामूहिक भागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्यक्रम के दौरान आठ नए किसान हित समूह (एफआईजी) का गठन किया गया। प्रत्येक समूह में आठ गांवों की 10 महिला सदस्य शामिल हैं। इन समूहों को संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा लगातार तकनीकी मार्गदर्शन और वैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वे मछली-बागवानी आधारित समेकित कृषि प्रणाली को सफलतापूर्वक अपना सकें।

प्रगतिशील महिला किसान श्रीमती टुनटुन सिंघा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह मॉडल ग्रामीण महिलाओं के लिए आय के नए अवसर सृजित करेगा। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से छोटे तालाबों का बेहतर उपयोग कर महिलाएं अतिरिक्त आय अर्जित कर सकती हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना सकती हैं।

कार्यक्रम का संचालन कृषि अनुसंधान परिसर, पटना के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बिश्वजीत देबनाथ और वैज्ञानिक डॉ. विवेकानंद भारती के नेतृत्व में किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र, दक्षिण त्रिपुरा की प्रमुख डॉ. इंगिता गोहैन ने किसानों को संगठित करने और उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई।

उद्घाटन सत्र में दक्षिण त्रिपुरा जिला परिषद के सभापति दीपक दत्ता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर त्रिपुरा मत्स्य पालन विभाग के उपनिदेशक टिकेंद्र जमातिया तथा अटारी, जोन-VII की संस्थान समिति के सदस्य डॉ. पी.बी. रॉय भी मौजूद थे।

यह कार्यक्रम संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। किसान संवाद एवं प्रतिक्रिया सत्र के दौरान किसानों ने अपनी समस्याएं साझा कीं और वैज्ञानिकों से समाधान प्राप्त किए। कार्यक्रम में कुल 80 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 73 महिलाएं और 7 पुरुष शामिल थे। महिलाओं की बड़ी भागीदारी यह दर्शाती है कि ग्रामीण महिलाएं कृषि और कृषि-व्यवसाय में सक्रिय नेतृत्वकारी भूमिका निभा रही हैं।

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