नाटक के पहले दिन :लोक रंगमंच की गूंज से गूंजा शहर, 34वीं अखिल भारतीय नाट्य प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ

डेहरी-आन-सोन (रोहतास) – निशांत राज। नाटक केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज का दर्पण और संवेदना की सशक्त आवाज़ है। इसी विचार को साकार करते हुए शहर के कैनाल रोड स्थित इ. ललन सिंह स्पोर्टिंग क्लब शुक्रवार को एक जीवंत नाट्य ग्राम में तब्दील हो गया। अभिनव कला संगम के तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय 34वीं अखिल भारतीय बहुभाषीय लघु नाटक एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ महान लोक कलाकार भिखारी ठाकुर की अमर कृति ‘विदेशिया’ से हुआ।

अखिल भारतीय स्तर के कलाकारों के सशक्त अभिनय ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। उद्घाटन नाटक ‘विदेशिया’ में बेरोजगारी, पलायन और पारिवारिक विघटन जैसी ज्वलंत सामाजिक समस्याओं को अत्यंत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया।

नाटक की कथा में दिखाया गया कि रोजगार की तलाश में गांव से शहर गए लोग किस तरह काम के बोझ और शहरी जीवन की चकाचौंध में अपने घर-परिवार तक को भूल जाते हैं। विदेशी नामक युवक अपनी पत्नी प्यारी सुंदरी से विवाह कर कुछ दिनों बाद काम की तलाश में कोलकाता चला जाता है। वहां वह शहरी जीवन में उलझकर दूसरी शादी कर लेता है, जबकि गांव में प्यारी सुंदरी विरह और वियोग की आग में झुलसती रहती है।

वर्षों बाद एक बटोही के माध्यम से विदेशी को उसकी पहली पत्नी की याद दिलाई जाती है। अंततः परिस्थितियां ऐसी बनती हैं कि दोनों स्त्रियां आपसी समझ और सामंजस्य के साथ एक ही छत के नीचे रहने को विवश हो जाती हैं। नाटक स्त्री-संघर्ष, सामाजिक विवशता और मानवीय संवेदना को गहराई से उभारता है।

नाटक में विदेशी की भूमिका में अभय सिंह कुशवाहा, प्यारी सुंदरी के रूप में निधि, रखे-रखेलिन की भूमिका में शालिनी गुप्ता तथा बटोही की भूमिका में आनंद कुमार चौहान सहित अन्य कलाकारों ने प्रभावी अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया।निर्देशन अभय सिंह कुशवाहा ने किया, संगीत संयोजन पंकज कुमार का रहा। पार्श्व गायन माया, पुष्पा एवं गुड़िया ने किया। नाल वादन मृत्युंजय सिंह, तबला शराफत, प्रकाश व्यवस्था अखिलेश मौर्या, रूप सज्जा पुष्पा एवं गुड़िया तथा मंच व्यवस्था आनंद कुमार चौहान ने संभाली।

प्रतियोगिता के पहले दिन कुल पांच नाटकों का मंचन किया गया। हिंदी एवं भोजपुरी भाषा में प्रस्तुत इन नाटकों ने बहुभाषी भारतीय रंगमंच की समृद्ध परंपरा को दर्शाया।

प्रतियोगिता के अंतर्गत—

जागरूक संस्थान, बलिया (उत्तर प्रदेश) – “बिदेसिया” कलाक्षेत्र नाट्य मंच, जमशेरपुर (झारखंड) – “नाग मंडल” समाजात्रिक, कोलकाता (पश्चिम बंगाल) – “संपर्क” स्वर संबलपुर (ओडिशा) – “कारूवाकी” एंटीक इंडियंस, धनबाद (झारखंड) – “जादू का सूट” ने दर्शकों को अपनी कथावस्तु, अभिनय और मंचीय प्रस्तुति से मंत्रमुग्ध कर दिया।

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