तीसरे दिन नाट्य मंच पर गूंजे कर्ण, मुराबी और यूं ही के नैतिक संदेश

डेहरी-आन-सोन (रोहतास) – निशांत राज। अभिनव कला संगम (अकस) के तत्वावधान में आयोजित 34वीं अखिल भारतीय लघु नाट्य एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिता के तीसरे दिन शहर का कैनाल रोड स्थित ई. ललन सिंह स्पोर्टिंग क्लब परिसर में देश के विभिन्न राज्यों से आई नाट्य संस्थाओं ने अपने सशक्त अभिनय, गहन कथ्य और प्रभावी मंचीय प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को न केवल मनोरंजन दिया, बल्कि उन्हें सोचने और आत्ममंथन के लिए भी विवश किया।

संस्था के अध्यक्ष संतोष सिंह एवं सचिव नन्दन कुमार ने बताया कि प्रतियोगिता के तीसरे दिन दिन के सत्र में नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रंग, ताल और भाव-भंगिमाओं से सजी प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया।

शाम होते ही नाट्य प्रस्तुतियों का सिलसिला आरंभ हुआ, जिसमें कर्म-दर्शन, सत्य, ईमानदारी, सामाजिक संवेदना और मानवीय मूल्यों से जुड़े विषय प्रमुखता से उभरे।तीसरे दिन की प्रस्तुतियों में कर्म-दर्शन, सत्य की खोज, ईमानदारी, मानवीय संवेदनाएं और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषय प्रमुखता से उभरे।

इंफाल (मणिपुर) की संस्था कल्चरल स्टार अकादमी द्वारा प्रस्तुत नाटक “महाभारत ता कर्ण” महाभारत के महान योद्धा कर्ण के जीवन-दर्शन, उसके अंतर्द्वंद्व और सत्य की खोज को केंद्र में रखता है। प्रस्तुति में यह प्रभावी ढंग से दर्शाया गया कि मनुष्य प्रायः अहंकार और लालसा में उलझकर सत्य से दूर चला जाता है, जबकि सच्चा जीवन सद्कर्म और नैतिक मूल्यों पर आधारित होता है।

नाटक में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को कर्तव्य का बोध कराना, कर्ण का अपने जन्म-सत्य से अनभिज्ञ रहकर भी सत्य की तलाश में निरंतर संघर्ष करना और युद्ध के दौरान नैतिक संयम बरतना दर्शकों को गहराई से प्रभावित करता है। कर्ण का यह निर्णय कि वह युद्ध में पांडवों को मारने के अवसर के बावजूद ऐसा नहीं करता, उसके चरित्र की महानता को उजागर करता है। अंततः कर्ण की वीरगति नाटक का सबसे मार्मिक क्षण रहा।इसके बाद सस्वती, ब्रह्मपुर (ओडिशा) द्वारा प्रस्तुत नाटक “मुराबी” ने ईमानदारी और सत्यनिष्ठा की मिसाल पेश की। नाटक एक ऐसे सरकारी कर्मचारी की कहानी है, जिसने अपने पूरे सेवाकाल में कभी रिश्वत या झूठ का सहारा नहीं लिया। सेवानिवृत्ति के बाद एक दुर्घटना में उसे मृत मान लिया जाता है, लेकिन वर्षों बाद जब वह जीवित लौटता है, तो परिवार और समाज के सामने नैतिक संकट खड़ा हो जाता है।

सरकारी सहायता, बीमा राशि और अन्य लाभ लौटाने का उसका निर्णय आज के स्वार्थपरक समाज में सत्य और नैतिकता की कठिन राह को उजागर करता है। नाटक यह सवाल उठाता है कि जब ईमानदारी खुद संकट बन जाए, तब समाज और न्याय व्यवस्था की भूमिका क्या होनी चाहिए।

गिरिडीह की संस्था “द रग” द्वारा प्रस्तुत नाटक “कैनवास की मौत” ने आधुनिक समाज में संवेदनाओं के क्षरण, अकेलेपन और रिश्तों की टूटन को प्रतीकात्मक शैली में प्रस्तुत किया। यह प्रस्तुति अपने प्रयोगधर्मी मंच-रूप और गहन प्रतीकों के कारण विशेष चर्चा में रही।

तो असम से आई नाट्य संस्था अतेंद्र युवा मंच द्वारा प्रस्तुत चिकांतु राय लिखित नाटक “मुआवजा” ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। नाटक के माध्यम से कलाकारों ने आज की सामाजिक व्यवस्था पर तीखा कटाक्ष करते हुए दिखाया कि इच्छाओं, लालच और भौतिक लक्ष्यों की दौड़ में इंसान अपनी इंसानियत से दूर होता जा रहा है। नाटक यह संदेश देता है कि शांति और संतुलन से भटके जीवन में लालच, भ्रम, वासना और क्रोध विनाश का कारण बनते हैं। कलाकारों के सशक्त अभिनय ने दर्शकों का मन मोह लिया।

वहीं समय अकैडमी, मुंबई (महाराष्ट्र) द्वारा प्रस्तुत नाटक “यूं ही” ने आज की युवा पीढ़ी को आईना दिखाने का काम किया। चार पात्रों पर आधारित इस नाटक में यह संदेश दिया गया कि मनोरंजन या मज़ाक के नाम पर की गई लापरवाही किसी के जीवन को तबाह कर सकती है। प्रस्तुति ने दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर किया कि छोटी-सी असंवेदनशीलता भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

इसके अतिरिक्त असम से आई नाट्य संस्था की प्रस्तुति ने बहुभाषी रंगमंच की समृद्ध परंपरा को और सशक्त किया। असमिया सांस्कृतिक रंग और अभिनय शैली ने दर्शकों को एक अलग अनुभव प्रदान किया।

अकस द्वारा आयोजित 34वीं अखिल भारतीय बहुभाषीय लघु नाट्य एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिता के तीसरे दिन औरंगाबाद के पूर्व सांसद एवं भाजपा नेता सुशील कुमार सिंह ने कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों के आगमन से बिहार की धरती धन्य हो गई है।पूर्व सांसद श्री सिंह ने कहा कि कलाकार अपनी कला के माध्यम से समाज की बुराइयों को दूर करने और लोगों के बीच जागरूकता फैलाने का जो प्रयास कर रहे हैं, उसकी जितनी सराहना की जाए, वह कम है।

इस अवसर पर अकस के निर्देशक संजय सिंह बाला, अध्यक्ष संतोष कुमार सिंह, अरुण शर्मा, राघवेंद्र प्रताप सिंह उर्फ बिशु सहित अन्य पदाधिकारियों ने पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह को बुके एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।

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