समानता, स्त्री चेतना और सामाजिक संघर्षों का सशक्त मंचन

डेहरी-आन-सोन (रोहतास) – निशांत राज। ई. ललन सिंह स्पोर्टिंग क्लब परिसर में अभिनव कला संगम द्वारा आयोजित 34वीं अखिल भारतीय बहुभाषीय लघु नाट्य प्रतियोगिता के चौथे दिन सोमवार को रंगमंच सामाजिक चेतना, मानवीय मूल्यों और समकालीन सवालों का सशक्त माध्यम बनकर उभरा। देश के विभिन्न राज्यों से आई नाट्य संस्थाओं द्वारा कुल आठ नाटकों का मंचन किया गया, जिनमें सामाजिक समानता, नारी अधिकार, वर्गभेद, भय, उत्पीड़न और मानवीय एकता जैसे विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

मणिपुर, इंफाल की नाट्य संस्था कल्चरल पीस फोरम (लोइबी नापोम) के रंगकर्मियों ने “हावरंग लेस सफबी” नाटक की प्रस्तुति दी। इस नाटक में गांव के शांत वातावरण के भीतर छिपे सामाजिक भेदभाव को उजागर किया गया। कहानी में ऊँच-नीच के उभरते भेद गांव की एकता को तोड़ते हैं, लेकिन कांगलेई पिबारेल खोइसना के पुत्र का जन्म आशा की किरण बनकर सामने आता है। यह बालक समानता और एकता का प्रतीक बनते हुए पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों के बीच की दूरी को कम करने का प्रयास करता है। नाटक ने स्पष्ट संदेश दिया कि सामाजिक विभाजन चाहे जितना गहरा हो, मानवीय मूल्यों की विजय संभव है।

इसके बाद अभिव्यक्ति, राउरकेला द्वारा प्रस्तुत नाटक “फेस ऑफ़ वूमेन’ ने दर्शकों को गहरे आत्ममंथन के लिए विवश किया। नाटक की शुरुआत सृष्टि के निर्माण में स्त्री और पुरुष की समान भूमिका के प्रतीकात्मक दृश्य से होती है, लेकिन आगे बढ़ते हुए यह पुरुषप्रधान समाज की कठोर सच्चाइयों को सामने लाता है। रजिया सुल्तान, रानी लक्ष्मीबाई, माता सीता और द्रौपदी जैसे पौराणिक व ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से नारी संघर्ष को रेखांकित किया गया। नाटक ने यह सवाल उठाया कि आज़ादी के 78 वर्षों बाद भी नारी के जीवन के निर्णय—शिक्षा, पहनावा और मातृत्व—अब भी समाज और पुरुष क्यों तय करते हैं। समापन दृश्य में घरेलू हिंसा, वैवाहिक बलात्कार और यौन अपराधों की भयावह सच्चाई ने दर्शकों को स्तब्ध कर दिया।

कोलकाता की संस्था जन्हबी सांस्कृतिक चक्र द्वारा मंचित नाटक “ग्रेनाइट” में भय, दमन और मानवीय संघर्ष का गंभीर चित्रण किया गया। नाटक का वातावरण लगातार बढ़ते तनाव और उत्पीड़न को दर्शाता रहा, जिसने दर्शकों को समाज के भीतर छिपी हिंसक प्रवृत्तियों पर सोचने को मजबूर किया।

वहीं पटना की प्रसिद्ध नाट्य संस्था रंगश्री की प्रस्तुति “कथा एक सराय की” ने प्रतीकात्मक शैली में समाज की विविध परतों को उजागर किया। सराय में ठहरे पात्र अपने अनुभवों के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों, मानवीय रिश्तों और आत्मचिंतन का संदेश देते नजर आए।

पश्चिम बंगाल (जलपाईगुड़ी) की नाट्य संस्था द्वारा प्रस्तुत “परीक बाड़ी” ने भी दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ा। नाटक में लोक संवेदना और सामाजिक यथार्थ का सुंदर समन्वय देखने को मिला।

इसके अतिरिक्त मणिपुर से आई दूसरी नाट्य संस्था द्वारा प्रस्तुत “लोइबी नापोम” नाटक में ऊँच-नीच के भेद, सत्ता संघर्ष और सामाजिक टकराव को विस्तार से दिखाया गया। लोइबी नापोम के शांत वातावरण में जब भेदभाव की आग फैलती है, तो राजमहल से लेकर आम जनता तक उसका असर दिखाई देता है। अंततः अतीत की गलतियों को स्वीकार करते हुए पहाड़ और मैदान के लोगों के बीच टूटा रिश्ता फिर से जुड़ता है और मानवीय एकता की जीत होती है।

कार्यक्रम के दौरान मंच पर उपस्थित सभी आगत अतिथियों एवं अतिथि कलाकारों का पारंपरिक अंगवस्त्र देकर गर्मजोशी से स्वागत किया गया। आयोजकों ने कला, संस्कृति और रंगमंच के प्रति उनके योगदान की सराहना करते हुए उन्हें सम्मानित किया। इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य अतिथियों ने प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए अभिनव कला संगम की प्रशंसा की और कहा कि इस तरह के आयोजन न केवल कलाकारों को मंच प्रदान करते हैं, बल्कि समाज में सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक सरोकारों को भी सशक्त बनाते हैं।

इसी क्रम में कार्यक्रम के दौरान असम की 5 वर्षीय बाल कलाकार अहाना चक्रवर्ती ने अपने मनमोहक नृत्य से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। नन्हीं कलाकार की आत्मविश्वास से भरी प्रस्तुति ने यह सिद्ध कर दिया कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। अहाना की लयात्मक भंगिमाओं और भावपूर्ण नृत्य पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा, जिससे यह प्रस्तुति प्रतियोगिता का एक विशेष आकर्षण बन गई।

Share
  • Related Posts

    आज से देशभर में बड़े बदलाव: रेल रिफंड नियम सख्त, इनकम टैक्स, टोल और बैंकिंग में नए प्रावधान लागू

    नई दिल्ली । नए वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियम बदल गए हैं। भारतीय रेल, आयकर विभाग, भारतीय…

    Share

    ज्ञान, संवाद और वैश्विक सहयोग का संदेश: नालंदा दीक्षांत में राष्ट्रपति का आह्वान

    राजगीर (बिहार)। प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के संगम स्थल नालंदा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मंगलवार को उस गौरवशाली विरासत की झलक देखने को मिली, जब द्रौपदी मुर्मु…

    Share

    One thought on “समानता, स्त्री चेतना और सामाजिक संघर्षों का सशक्त मंचन

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

    You Missed

    आज से देशभर में बड़े बदलाव: रेल रिफंड नियम सख्त, इनकम टैक्स, टोल और बैंकिंग में नए प्रावधान लागू

    ज्ञान, संवाद और वैश्विक सहयोग का संदेश: नालंदा दीक्षांत में राष्ट्रपति का आह्वान

    ज्ञान, संवाद और वैश्विक सहयोग का संदेश: नालंदा दीक्षांत में राष्ट्रपति का आह्वान

    डब्ल्यूजेएआई, बिहार के कार्यकारी अध्यक्ष बने अक्षय आनंद

    डब्ल्यूजेएआई, बिहार के कार्यकारी अध्यक्ष बने अक्षय आनंद

    रोहतास में एनडीआरएफ की सीबीआरएन आपदा पर मॉक ड्रिल, आपदा तैयारी हुई और सुदृढ़

    रोहतास में एनडीआरएफ की सीबीआरएन आपदा पर मॉक ड्रिल, आपदा तैयारी हुई और सुदृढ़

    जलवायु अनुकूल कृषि पर पटना में हितधारकों की अहम बैठक, किसानों के अनुभवों से बनी रणनीति

    जलवायु अनुकूल कृषि पर पटना में हितधारकों की अहम बैठक, किसानों के अनुभवों से बनी रणनीति

    पूर्व सैनिकों के लिए रोजगार मेला, 850 से अधिक प्रतिभागियों को मिले अवसर