पश्चिम बंगाल में झालमुड़ी और राजनीति: आम जीवन से जुड़ाव का बड़ा संदेश

झालमुड़ी पश्चिम बंगाल के सार्वजनिक जीवन का एक अभिन्न अंग है—यह रेलवे स्टेशनों और कॉलेजों से लेकर बाज़ारों और राजनीतिक रैलियों तक हर जगह मौजूद रहती है। ऐसे राज्य में,…

गुरु पूजन का पर्व है गुरु पूर्णिमा

आज गुरुवार को हर्षोल्लाष के साथ वेद व्यास की जयन्ती मनाई जा रही है। इस पावन पर्वोत्सव में अपने-अपने गुरु के पूजन करने की सनातन परम्परा है। अपनी गुरु परम्परा…

परमानंद झा से प्रेरणा: स्टार्टअप्स के लिए मौर्या होस्टिंग के संस्थापक की सीख

पटना, बिहार, 27 जून 2025 – सोनेमाटी के साथ एक विशेष साक्षात्कार में, निशांत ने मौर्या होस्टिंग के संस्थापक और वेब डेवलपर परमानंद झा से मुलाकात की। बिहार के पटना जैसे छोटे शहर से एक…

लघुकथा लेखन संक्षिप्तता का संयोजन नहीं बल्कि एक साधना है : सुनीता मिश्रा    

  पटना (सोनमाटी समाचार नेटवर्क)। कौन कहता है लघुकथा का विकास नहीं हो रहा ? लघुकथा में नित्य नए प्रयोग हो रहे हैं, यह संकेत मिलता है आज के कई समकालीन…

सुकून,शांति,आनंद और सरसता का एहसास है :संगीत

पटना (सोनमाटी समाचार नेटवर्क)। फेसबुक पर अवसर साहित्यधर्मी पत्रिका के पेज पर आनलाइन हेलो फेसबुक पर संगीत सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुरारी मधुकर  ने कहा…

साहित्यिक गोष्ठियां सांस्कृतिक चेतना जगाने में महत्वपूर्ण

पटना (सोनमाटी समाचार नेटवर्क)। भारतीय युवा साहित्यकार परिषद (पटना) के तत्वावधान में वरीय साहित्यकार एवं चित्रकार सिद्धेश्वर प्रसाद के आवास ‘सिद्धेश्वर सदन’ में एक सारगर्भित काव्य संध्या का आयोजन किया…

संकट में पत्रकार

विस्तृत और प्रामाणिक अध्ययन की जरूरत। पत्रकार कितने भी समर्थ हों और मीडिया कितना भी जागरूक हो, लेकिन वह इस प्रश्न तक का उत्तर नहीं दे पा रहा कि भारत…

(प्रसंगवश/कृष्ण किसलय) : इस उपद्रव की स्वीकृति नहीं, मगर इस कृत्य की पड़ताल भी जरूरी

-0 प्रसंगवश 0-इस उपद्रव की स्वीकृति नहीं, मगर इस कृत्य की पड़ताल भी जरूरी-कृष्ण किसलय (संपादक : सोनमाटी) जरा कल्पना करें कि किसी शहर के अति व्यस्त प्रमुख सड़क पर…

(प्रसंगवश/कृष्ण किसलय) : रेणु को जन्मशती वर्ष पर नई पीढ़ी आखिर क्यों याद करे?

-0 प्रसंगवश 0–रेणु को जन्मशती वर्ष पर नई पीढ़ी आखिर क्यों याद करे?-कृष्ण किसलय (संपादक, सोनमाटी) फणीश्वरनाथ रेणु की जन्मशती वर्ष पर भारत की नई पीढ़ी आखिर उन्हें क्यों याद…

(प्रसंगवश/कृष्ण किसलय) : उपेन्द्र कुशवाहा ने अंतत: मान लिया नीतीश कुमार का नेतृत्व

-0 प्रसंगवश 0-उपेन्द्र कुशवाहा ने अंतत: मान लिया नीतीश कुमार का नेतृत्व-कृष्ण किसलय (संपादक, सोनमाटी) क्षेत्रीय राजनीतिक दल रालोसपा बनाकर पिछले आठ सालों से बिहार और फिर केेंद्र में भी…

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